Fast Promotion Trick: 5 साल में 4 प्रमोशन, Microsoft में भारतीय मूल की इंजीनियर ने खोला राज

Fast Promotion Trick: कॉलेज की पढ़ाई खत्म होने के बाद जब कैरियर की शुरुआत की जाती है, तो हर किसी का सपना होता है कि जल्द से जल्द प्रमोशन मिले। हालांकि कुछ लोगों को इसमें लंबा समय लग जाता है तो कुछ का जल्द ही प्रमोशन हो जाता है। हालांकि एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें छंटनी के माहौल में भारतीय मूल की माइक्रोसॉफ्ट में काम कर रही एक इंजीनियर का पांच साल में चार प्रमोशन हुआ है। जानिए ऐसा कैसे हुआ?

अपडेटेड Aug 15, 2025 पर 4:14 PM
भारतीय मूल की एक इंजीनियर रित्विका नागुला ने महज पांच साल के छोटे से पीरियड ने सबसे अधिक कॉम्पटीशन वाली इंडस्ट्री में शुमार इंडस्ट्री में चार बार प्रमोशन हासिल किया।

Fast Promotion Trick: जब वैश्विक टेक इंडस्ट्रीज भारी बदलाव से गुजर रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जूनियर लेवल के एंप्लॉयीज की जगह ले रहा। प्रोफेशनल लगातार छंटनी की आशंका के साए में जूझ रहे हैं। ऐसे समय में माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) में काम कर रही भारतीय मूल की एक इंजीनियर रित्विका नागुला का एक मामला सामने आया है जो टेक इंडस्ट्री की एक अलग ही तस्वीर पेश कर रहा है। महज पांच साल के छोटे से पीरियड में उन्होंने सबसे अधिक कॉम्पटीशन वाली इंडस्ट्री में शुमार इंडस्ट्री में चार बार प्रमोशन हासिल किया।

आखिर कैसे मिला पांच साल में चार प्रमोशन?

रित्विका ने अप्रैल 2019 में माइक्रोसॉफ्ट की एजुरे में स्थित डिविजन में काम शुरू किया था। पहले साल उनका मानना था कि अच्छा काम करने पर अपने आप प्रमोशन मिलता जाएगा। एक मीडिया इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि पहले साल उनकी यह सोच गलत साबित हुई। उन्होंने महसूस किया कि अगर अपनी महत्वाकांक्षाओं को सामने नहीं लाया गया तो मान लिया जाएगा कि कोई महत्वाकांक्षा ही नहीं है। इसके बाद तो रित्विका ने अपने काम काम करने के तरीके में बदलाव किया


दूसरे साल में से उन्होंने अपनी मैनेजर के साथ हर महीने वन-ऑन-वन मीटिंग शेड्यूल कीं। हर बार बातचीत में उन्होंने अपने कैरियर की ग्रोथ पर फोकस किया। साथ ही वह यह भी पूछती थीं कि क्या अच्छा चल रहा है?, कहाँ सुधार की ज़रूरत है? और क्या कुछ छूट रहा है? इसके अलावा उन्होंने अपना एक पर्सनल टाइमटेबल बनाया और यह लक्ष्य तय किया कि हर 18 से 24 महीने में ऊपर चढ़ना है। उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट के इंटर्नल रोल लाइब्रेरी का इस्तेमाल किया ताकि कैरियर के हर लेवल पर जितनी उम्मीद की जाती है, उसके हिसाब से उनका काम किस प्रकार का है, यह पता लग सके। रित्विका का कहना है कि सबसे पहले तो यह जानना महत्वपूर्ण है कि अभी क्या जरूरत है और अगले लेवल पर क्या उम्मीद है, फिर इसके बाद फर्क का पता करके उसे भरने की कोशिश करो।

फीडबैक से हासिल की उपलब्धि

रित्विका ने अपने काम को लेकर फीडबैक को स्थायी बना लिया। सिर्फ मैनेजर से ही नहीं, बल्कि अपने साथ के लोगों से भी वह लगातार फीडबैक लेती रहीं। जब उन्हें पता चलता कि किसी प्रोजेक्ट के लिए सीनियर रोल की जरूरत है तो उन्होंने उसे सौंपे जाने का इंतजार नहीं किया, बल्कि इसके लिए अनुरोध किया। इसे लेकर रित्विक की सोच एकदम स्पष्ट थी कि अगर प्रमोशन का लक्ष्य है तो किसी फुल प्रोजेक्ट को लीड करने की जरूरत है और इसके लिए सबसे मौका अपने को यही दिखाने का है कि मैनेजर को लगे कि वह जिम्मेदारी उठाने को तैयार है। हालांकि रित्विका ने आगे बढ़ने के लिए सिर्फ यही स्ट्रैटेजी नहीं अपनाई बल्कि उनका फोकस ऐसे प्रोजेक्ट पर रहा जिसका असर दिखे और वह टीम और कंपनी की प्राथमिकताओं से मेल खाए।

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