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क्या आप जानते हैं? थाली में परोसी मछली मरने से पहले कैसे तड़पती है, रिसर्च में खुली दर्दनाक सच्चाई!

एक नए शोध ने चौंकाया है कि रेनबो ट्राउट मछलियां मारने से पहले 2 से 20 मिनट तक तड़पती हैं। आमतौर पर इन्हें पानी से निकालकर दम घुटने से मारा जाता है। वैज्ञानिकों का दावा है कि अगर इलेक्ट्रिक स्टनिंग तरीका अपनाया जाए तो इस दर्दनाक सच्चाई को काफी हद तक बदला जा सकता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jun 15, 2025 पर 10:24 AM
क्या आप जानते हैं? थाली में परोसी मछली मरने से पहले कैसे तड़पती है,  रिसर्च में खुली दर्दनाक सच्चाई!
रेनबो ट्राउट मछलियां 2-20 मिनट तक दर्द सहती हैं

हाल ही में किए गए एक चौंकाने वाले वैज्ञानिक अध्ययन ने मछली प्रेमियों के लिए सोचने पर मजबूर कर देने वाला सच सामने रखा है। इस शोध में बताया गया है कि इंसानों के खाने के लिए पकड़ी जाने वाली रेनबो ट्राउट जैसी मछलियां मरने से पहले करीब 2 से 20 मिनट तक असहनीय दर्द झेलती हैं। यह खुलासा मशहूर विज्ञान पत्रिका ‘साइंटिफिक रिपोर्ट्स’ में प्रकाशित हुआ है। रिसर्च के मुताबिक मछलियों को मारने के लिए आम तौर पर जो तरीका अपनाया जाता है, उसमें उन्हें पानी से निकालकर हवा में छोड़ दिया जाता है, जिससे उनकी मौत दम घुटने से होती है। इस दौरान मछलियां लंबे समय तक तड़पती रहती हैं।

इतना ही नहीं, कुछ जगहों पर मछलियों को बर्फ के पानी में डालकर मारा जाता है, लेकिन यह तरीका भी उनके लिए और ज्यादा तकलीफदेह साबित हो रहा है। अब वैज्ञानिकों ने इस क्रूरता को कम करने के लिए समाधान भी सुझाया है।

हवा में दम घुटना बनता है मौत का कारण

मछलियों को मारने की सबसे सामान्य तकनीक होती है एयर एस्फीक्सिएशन, यानी पानी से निकाल कर उन्हें हवा में छोड़ देना। इस दौरान मछली धीरे-धीरे ऑक्सीजन की कमी से मरती है। शोध में बताया गया कि इस प्रक्रिया में रेनबो ट्राउट को करीब 10 मिनट तक असहनीय दर्द झेलना पड़ता है।

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