Flying Snake: बिना पंख के उड़ता जंगल का सुपर सांप, देखें कैसे करता है शिकार

Flying Snake: दक्षिण-पूर्व एशिया के जंगलों में रहने वाले क्राइसोपेलीया सांप बिना पंख के हवा में तैरने जैसी क्षमता रखते हैं। ये पेड़ से छलांग लगाकर अपने शरीर को चपटा कर ग्लाइड करते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार यह अनोखी कला उन्हें शिकारियों से बचाती है और ऊर्जा भी बचाती है

अपडेटेड Jan 07, 2026 पर 10:34 AM
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Flying Snake: क्राइसोपेलीया जीनस के ये सांप आमतौर पर फ्लाइंग स्नेक या ग्लाइडिंग स्नेक कहलाते हैं।

जब कोई कहता है कि सांप उड़ सकते हैं, तो लोग सोचते हैं ये मजाक है या कोई फिल्म की कहानी। आखिरकार, हम हमेशा सांप को रेंगते हुए, चुपचाप हमला करने वाले और जमीन पर रहने वाले जीव के रूप में जानते हैं। उड़ान? बिना पंख के? सुनकर लगता है यह किसी सुपरहीरो की कहानी हो। लेकिन सच में, दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के जंगलों में रहने वाले क्राइसोपेलीया नाम के सांप वाकई पेड़ से पेड़ तक हवा में छलांग लगा सकते हैं। ये नीचे उतरे बिना ही हवा में अपने शरीर को फैलाकर संतुलन बनाते हैं और सुरक्षित जगह पर उतर जाते हैं।

उड़ने वाले सांप की असली कहानी

लेकिन सच्चाई इससे भी ज्यादा हैरान करने वाली है। दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के घने जंगलों में रहने वाली क्राइसोपेलीया प्रजाति के सांप सच में हवा में छलांग लगाकर पेड़ से पेड़ तक ‘तैरते’ हैं। ये कोई अफवाह नहीं, बल्कि वैज्ञानिक रिसर्च द्वारा प्रमाणित जैविक क्षमता है।


फ्लाइंग स्नेक्स कौन हैं?

क्राइसोपेलीया जीनस के ये सांप आमतौर पर फ्लाइंग स्नेक या ग्लाइडिंग स्नेक कहलाते हैं। इसमें पैराडाइज ट्री स्नेक, ऑर्नेट फ्लाइंग स्नेक और बैंडेड फ्लाइंग स्नेक शामिल हैं। ये ज्यादातर पेड़ों की ऊंचाई पर रहते हैं, हल्के विषैले होते हैं और आक्रामक नहीं माने जाते।

उड़ने की जरूरत क्यों पड़ी?

इनका घर जंगल की ऊपरी छतरी यानी कैनोपी होती है, जहां पेड़ सीधे जुड़े नहीं होते। हर बार नीचे उतरकर ऊपर चढ़ना ऊर्जा खर्च करता है और जमीन पर शिकारी खतरा बढ़ा देता है। विकास ने इन्हें अनोखा तरीका दिया पेड़ों के बीच हवा में सफर करना।

उड़ान की तकनीक

उड़ान की शुरुआत एक सोच-समझकर छलांग से होती है। सांप अपने शरीर को J शेप में मोड़ता है और धक्का देकर हवा में छलांग लगाता है। हवा में ये अपनी सबसे अनोखी क्षमता दिखाता है – शरीर को चपटा कर पंख जैसी चौड़ी संरचना में बदलना।

शरीर बनता है पंख

सांप का पेट हल्का अंदर की ओर और किनारे फैले होते हैं, जो एयरक्राफ्ट विंग जैसी लिफ्ट उत्पन्न करते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि सांप कई मीटर तक हवा में उड़ सकता है और संतुलन भी बना रहता है।

हवा में नियंत्रण

हवा में भी सांप शरीर को लहरदार तरीके से हिलाता रहता है, जैसे जमीन पर रेंगते समय। इससे दिशा, संतुलन और स्थिरता मिलती है। वे सिर्फ गिरते नहीं, बल्कि पूरी तरह ग्लाइड करते हुए सुरक्षित उतरते हैं।

उड़ान की दूरी

फ्लाइंग स्नेक्स धीरे ढलान के साथ कई मीटर तक उड़ सकते हैं। इनके पूरे शरीर की बनावट ही बदलते हुए पंख की तरह काम करती है। यही वजह है कि रोबोटिक्स, एयरोडायनामिक्स और सॉफ्ट रोबोट डिज़ाइन जैसे क्षेत्रों में इन पर रिसर्च हो रही है।

प्रकृति का अनोखा सबक

ये सांप हमें ये सिखाते हैं कि प्रकृति के नियम सीमित नहीं हैं। जो असंभव लगता है, सही परिस्थितियों में संभव हो सकता है। बिना पंख उड़ने वाले ये सांप दिखाते हैं कि विकास हमेशा नए रास्ते खोजता है।

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