कॉर्पोरेट दुनिया में बेहतर सैलरी और बड़ा पद हासिल करना अक्सर सफलता की सबसे बड़ी पहचान माना जाता है। हर नई नौकरी, प्रमोशन और वेतन वृद्धि लोगों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। लेकिन क्या लगातार अधिक कमाई की चाह वास्तव में बेहतर जीवन की गारंटी देती है, या फिर ये इंसान को ऐसी दौड़ में शामिल कर देती है, जहां संतुष्टि हमेशा एक कदम दूर रहती है? यही सवाल इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है। एक अनुभवी प्रोफेशनल की राय ने इस बहस को नई दिशा दे दी है।
उनका मानना है कि करियर में एक स्तर के बाद केवल ज्यादा सैलरी पर ध्यान देने के बजाय जीवन की गुणवत्ता, मानसिक शांति, परिवार और भविष्य की सुरक्षा पर भी उतना ही फोकस होना चाहिए। उनकी यह सोच लोगों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं पैदा कर रही है और एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इंसान के लिए 'पर्याप्त कमाई' की सीमा क्या होनी चाहिए।
'₹2 लाख महीने के बाद शुरू हो जाता है असली ट्रैप'
करीब 13 साल का कॉर्पोरेट अनुभव रखने वाले MBA ग्रेजुएट मोहित तलरेजा ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर कहा कि भारत में यदि किसी की मासिक आय लगभग ₹2 लाख तक पहुंच जाती है, तो वह आरामदायक जीवन जी सकता है। उनके मुताबिक इसके बाद सिर्फ ज्यादा सैलरी के पीछे भागना इंसान को ऐसी रेस में धकेल देता है, जहां प्रतिस्पर्धा कभी खत्म नहीं होती।
कॉर्पोरेट सीढ़ी जितनी ऊंची, उतना बढ़ता है दबाव
तलरेजा का मानना है कि ऊंचे पदों पर पहुंचने के साथ काम का तनाव और जिम्मेदारियां कई गुना बढ़ जाती हैं। ऐसे स्तर पर अक्सर उन्हीं लोगों से मुकाबला होता है जो करियर के लिए अपनी सेहत, परिवार और निजी जिंदगी तक दांव पर लगाने को तैयार रहते हैं। उनका कहना है कि हर किसी के लिए ऐसी प्रतिस्पर्धा सही विकल्प नहीं हो सकती।
पहले तय करें 'कितना काफी है'
उन्होंने सलाह दी कि हर प्रमोशन को अगला लक्ष्य बनाने के बजाय लोगों को पहले यह तय करना चाहिए कि उनकी जरूरतों के हिसाब से कितनी आय पर्याप्त है। जब वो स्तर हासिल हो जाए, तो जीवन की गुणवत्ता सुधारने, परिवार के साथ समय बिताने और स्वास्थ्य पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी हो जाता है।
सिर्फ नौकरी नहीं, भविष्य के लिए दूसरा सहारा भी बनाएं
तलरेजा का कहना है कि प्रोफेशनल्स को ऐसी स्किल्स विकसित करनी चाहिए जो आने वाले 10-15 सालों में नौकरी पर निर्भर हुए बिना भी कमाई का जरिया बन सकें। उन्होंने कंटेंट क्रिएशन का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे कई विकल्प मौजूद हैं, जिनसे भविष्य में स्वतंत्र आय अर्जित की जा सकती है।
लंबी दौड़ में क्या है असली जीत?
उनके अनुसार लक्ष्य सिर्फ बड़ा पैकेज या ऊंचा पद हासिल करना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसी जिंदगी बनानी चाहिए जिसमें आर्थिक सुरक्षा के साथ मानसिक शांति और व्यक्तिगत संतुलन भी बना रहे।
सोशल मीडिया पर बंट गई राय
वीडियो वायरल होने के बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं भी दो हिस्सों में बंट गईं। कुछ यूजर्स ने उनकी बात से सहमति जताते हुए कहा कि एक समय के बाद पैसा नहीं, जीवन का संतुलन ज्यादा मायने रखता है। वहीं कई लोगों का कहना था कि आज के दौर में ₹2 लाख महीना भी हर किसी के लिए पर्याप्त नहीं है। एक यूजर ने लिखा कि इतनी आय में बड़े शहरों में घर खरीदना आसान नहीं, जबकि दूसरे ने सलाह दी कि इस स्तर की कमाई के बाद खुद का बिजनेस शुरू करने पर विचार करना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर साझा किए गए यूजर-जनरेटेड कंटेंट पर आधारित है। Moneycontrol ने इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है और न ही इनका समर्थन करता है।