आज के दौर में ज्यादा कमाने की चाह शायद ही किसी से छिपी हो। नौकरी में प्रमोशन, बढ़ती सैलरी और बेहतर पैकेज को अक्सर सफलता की निशानी माना जाता है। लेकिन क्या जिंदगी भर ज्यादा से ज्यादा पैसे कमाने की दौड़ जरूरी है? इसी सवाल ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है। मोहित तलरेजा ने अपनी राय साझा करते हुए कहा कि भारत के शहरों में रहने वाले लोगों के लिए 1.5 लाख से 2 लाख रुपये महीने की कमाई एक ऐसा पड़ाव हो सकती है, जहां से जिंदगी को सिर्फ पैसे के पीछे दौड़ाने के बजाय दूसरी जरूरी चीजों पर भी ध्यान दिया जा सके।
‘एक सीमा तय करिए, फिर जिंदगी भी जीना सीखिए’
तलरेजा का मानना है कि हर व्यक्ति के लिए यह सीमा अलग हो सकती है और यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस उम्र में इस आय तक पहुंचता है। लेकिन एक बार यह स्तर हासिल हो जाए, तो लगातार ज्यादा कमाने की कोशिश के बजाय जीवन के दूसरे पहलुओं को समय देना ज्यादा अहम हो सकता है। उनके मुताबिक, शहर में एक परिवार को आरामदायक जीवन देने के लिए 1.5 से 2 लाख रुपये की मासिक आय पर्याप्त हो सकती है।
ज्यादा कमाई के साथ बढ़ सकता है दबाव
तलरेजा ने यह भी सवाल उठाया कि क्या हर बार बढ़ती सैलरी के पीछे भागना वाकई खुशहाल जिंदगी की गारंटी देता है। उनका कहना है कि जैसे-जैसे कोई व्यक्ति ज्यादा कमाई के लिए ऊपर बढ़ता है, वैसे-वैसे उसे अपनी जिंदगी के दूसरे हिस्सों से समझौता करना पड़ सकता है। काम का बढ़ता दबाव, कम होता खाली समय और परिवार से दूरी ये ऐसी कीमतें हैं, जिनका एहसास अक्सर बाद में होता है।
पैसा कमाइए, लेकिन खुद के लिए भी वक्त बचाइए
उनकी सलाह है कि करियर में एक तय आर्थिक मुकाम हासिल करने के बाद काम को सामान्य गति से आगे बढ़ने दिया जाए। इस दौरान व्यक्ति अपने स्वास्थ्य, परिवार, सीखने और निजी विकास पर भी ध्यान दे सकता है। तलरेजा का मानना है कि नौकरी के साथ कोई नया कौशल सीखना या अपनी कमाई का दूसरा जरिया तैयार करना भविष्य में ज्यादा संतोष दे सकता है।
‘बहुत ज्यादा सैलरी भी बन सकती है जाल’
तलरेजा ने लगातार ज्यादा पैसे कमाने की मानसिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि सिर्फ दूसरों के लिए ज्यादा से ज्यादा काम करते रहना लंबे समय में संतुष्टि नहीं देता। उनके अनुसार, हर व्यक्ति को खुद तय करना चाहिए कि उसके लिए ‘कितना काफी है’। उनकी यह बात सोशल मीडिया यूजर्स के बीच भी चर्चा का विषय बन गई। कुछ लोगों ने इसे सही नजरिया बताया, तो कुछ ने माना कि ज्यादा सैलरी के साथ जिम्मेदारियां और दबाव भी बढ़ते हैं। वहीं कई यूजर्स ने कहा कि पैसों के साथ परिवार और खुद के लिए समय निकालना भी उतना ही जरूरी है।