Howrah Bridge: जिसका बम और भूकंप कुछ नहीं बिगाड़ पाया, उसे 5 रुपये के गुटखे ने किया घायल, देखें वीडियो

Viral Video: कोलकाता के प्रतिष्ठित हावड़ा ब्रिज का हवाई हमलों, भूकंपों और हर दिन लाखों यात्रियों के बोझ के बावजूद कुछ नहीं बिगड़ा। लेकिन पांच रुपये वाले गुटखे के हमले से उसकी हालत धीरे-धीरे बिगड़ती जा रही है। इसकी मुख्य वजह है पैदल चलने वालों का लापरवाही से गुटखा थूकना

अपडेटेड Aug 28, 2025 पर 11:30 PM
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Viral Video: हाबड़ा ब्रिज पर बने एक नए वायरल वीडियो ने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है

Howrah Bridge Viral Video: कोलकाता का प्रतिष्ठित हावड़ा ब्रिज करीब 80 सालों से मजबूती से खड़ा है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी हवाई हमलों, कई बड़े से बड़े भूकंपों और हर दिन लाखों यात्रियों के बोझ के बावजूद उसका कुछ नहीं बिगड़ा। लेकिन वह पांच रुपये वाले गुटखे के हमले से खुद को नहीं बचा पाया। जी हां, युद्ध और भूकंप से बचे रहने के बावजूद हावड़ा ब्रिज की हालत धीरे-धीरे बिगड़ती जा रही है। इसकी मुख्य वजह है पैदल चलने वालों का लापरवाही से गुटखा थूकना... एक नए वायरल वीडियो ने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है।

इंस्टाग्राम पर शेयर की गई वायरल क्लिप में पुल के स्टील स्ट्रक्चर पर सालों से पान और गुटखे की पीक थूकने से हुए नुकसान को दिखाया गया है। इंटरनेट पर इस पर खूब प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। 2013 में कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट (KoPT) के मुख्य अभियंता ए.के. मेहरा ने हैंगर बेस के कवर पर गुटखे की मोटी परतें जमी हुई पाईं। लार, बुझा हुआ चूना और नमक मिला गुटखा एक हानिकारक रासायनिक होता है। इस समस्या से निपटने के लिए अब कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट ने स्टील की प्लेटों की जगह आसानी से धुलने वाले फाइबरग्लास कवर लगा दिए हैं।

हाल ही में इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में गुटखा की समस्या पर बात की गई है। एक यूजर ने एक्टर अजय देवगन के पान मसाला विज्ञापन की ओर इशारा करते हुए लिखा, "अजय देवगन का वर्चस्व...।" एक अन्य ने चबाने वाले तंबाकू की मामूली कीमत का जिक्र करते हुए मजाक में लिखा, "5 रुपये की ताकत...।"

एक व्यक्ति ने तंज कसते हुए कहा, "अजय देवगन से वसूला गया हर्जाना ले लो।" एक टिप्पणी में लिखा था, "गुटखा चबाने वाले लोगों को बंगाल से बाहर करो।" गुटखा ब्रांड विमल की टैगलाइन "बोलो ज़ुबान केसरी" वाला मीम्स जमकर वायरल हो रहा है। हावड़ा ब्रिज कई चुनौतियों के बावजूद हर दिन लाखों यात्रियों को ढोते हुए गौरव का प्रतीक बना हुआ है।

हुगली नदी तक फैले इस इंजीनियरिंग चमत्कार को कोलकाता और हावड़ा को जोड़ने के लिए बिना किसी नट या बोल्ट के बनाया गया था। 1943 में अपने निर्माण के समय यह अद्भुत वास्तुशिल्पीय चमत्कार दुनिया का तीसरा सबसे लंबा कैंटिलीवर ब्रिज था।

हावड़ा ब्रिज डेक स्लैब पर दोनों तरफ 39 हैंगरों द्वारा टिका हुआ है। इसका प्रस्ताव सबसे पहले ब्रिटिश इंजीनियर सर ब्रैडफोर्ड लेस्ली ने 1871 में रखा था। बाद में सिविल इंजीनियर जेम्स मीडोज रेंडेल द्वारा स्थापित आर्किटेक्चरल फर्म रेंडेल पामर एंड ट्रिटन ने 1930 के दशक में इस कैंटिलीवर ब्रिज का डिजाइन तैयार किया।


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हावड़ा ब्रिज को पूरा होने में 8 साल लगे, जिसमें 26,000 टन स्टील का इस्तेमाल किया गया। इसकी लागत 3.33 करोड़ रुपये थी। पूरा पुल विशाल कंक्रीट के खंभों पर टिका है। इतने वर्षों से हावड़ा ब्रिज न केवल भूकंपों, बल्कि बमबारी को भी झेलता रहा है। 1942 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इंपीरियल जापानी आर्मी एयर फ़ोर्स (IJAAF) के सैनिकों ने कोलकाता पर बमबारी की थी। लेकिन बच गया।

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