भारत में हवाई यात्रा लगातार आधुनिक और सुरक्षित होती जा रही है, लेकिन इसके बावजूद देश के कुछ बेहद संवेदनशील क्षेत्रों को नो-फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है। यानी इन इलाकों के ऊपर से किसी भी प्रकार का विमान, हेलीकॉप्टर या ड्रोन उड़ाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। यह रोक सिर्फ तकनीकी कारणों से नहीं लगाई गई, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, संवेदनशील सरकारी और वैज्ञानिक गतिविधियों, तथा धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए लागू की गई है। इन क्षेत्रों में एयरस्पेस पर सख्त नियंत्रण होता है और किसी भी अनधिकृत उड़ान पर कड़ी कार्रवाई की जाती है।
राष्ट्रपति भवन, संसद भवन, प्रधानमंत्री आवास और महत्वपूर्ण परमाणु व रक्षा केंद्र जैसे स्थल इस श्रेणी में आते हैं। नियमों का उल्लंघन करने पर कानूनी सजा का भी प्रावधान है। इस तरह के नो-फ्लाइंग जोन देश की सुरक्षा और संवेदनशीलता को सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी हैं।
राष्ट्रपति का आधिकारिक निवास होने के कारण यह क्षेत्र देश का सबसे संवेदनशील स्थल माना जाता है। बहु-स्तरीय सुरक्षा तैनात है और यहां किसी भी अनधिकृत हवाई गतिविधि—चाहे ड्रोन हो, हेलीकॉप्टर या निजी विमान—पर सख्त प्रतिबंध है। यह व्यवस्था राष्ट्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए है।
भारतीय लोकतंत्र का मुख्य केंद्र होने के कारण संसद भवन के ऊपर का एयरस्पेस विशेष रूप से नियंत्रित है। यहां देश के शीर्ष नेता और कानून निर्माण की प्रक्रिया चलती है। बिना अनुमति उड़ान भरना गंभीर अपराध माना जाता है और इसके लिए कड़ी कानूनी कार्रवाई संभव है।
प्रधानमंत्री का आधिकारिक निवास उच्च सुरक्षा घेरे में आता है। यहां SPG और अन्य एजेंसियां लगातार निगरानी रखती हैं। निजी या व्यावसायिक उड़ान की अनुमति नहीं है, और ड्रोन उड़ाना भी पूरी तरह प्रतिबंधित है।
4. भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र
मुंबई में स्थित यह केंद्र देश की सामरिक और वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां परमाणु शोध और संवेदनशील परियोजनाएं संचालित होती हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से इसका एयरस्पेस पूरी तरह प्रतिबंधित है और किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत रोका जाता है।