इंटरव्यू पाने के लिए रिज्यूमे में छिपा रहे AI के सीक्रेट प्रॉम्प्ट, सफेद टेक्स्ट में लिखी ऐसी बात कि HR भी रह गए हैरान

नौकरी पाने की होड़ में अब कुछ उम्मीदवार AI को भी ‘चकमा’ देने की कोशिश कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जॉब सीकर्स अपने रिज्यूमे में ऐसे छिपे हुए प्रॉम्प्ट डाल रहे हैं, जो AI स्क्रीनिंग टूल्स को प्रभावित कर उन्हें बेहतर कैंडिडेट दिखा सकें। इस नए ट्रेंड ने रिक्रूटर्स के बीच नैतिकता और भरोसे को लेकर चिंता बढ़ा दी है

अपडेटेड Sep 07, 2026 पर 2:16 PM
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रिज्यूमे में AI प्रॉम्प्ट छिपाने की यह रणनीति पूरी तरह नई सोच नहीं है।

नौकरी पाने की होड़ अब सिर्फ अच्छे रिज्यूमे और शानदार अनुभव तक सीमित नहीं रह गई है। AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच कुछ जॉब सीकर्स अपने रिज्यूमे में ऐसे छिपे हुए AI प्रॉम्प्ट डाल रहे हैं, जो स्क्रीनिंग करने वाले AI टूल्स को प्रभावित कर सकें। इस नए तरीके ने रिक्रूटर्स और HR प्रोफेशनल्स के बीच भरोसे और नैतिकता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

सफेद अक्षरों में छिपा था करीब 1,500 कैरेक्टर का मैसेज

यह मामला तब सामने आया जब कैलिफोर्निया की कैप्शनिंग टेक्नोलॉजी कंपनी InnoCaption के CEO पॉल ली ने एक जॉब एप्लीकेशन में कुछ अजीब देखा। कानूनी और कंप्लायंस पद के लिए भेजे गए रिज्यूमे में करीब 1,500 कैरेक्टर का सफेद रंग का टेक्स्ट छिपा हुआ था। यह टेक्स्ट सफेद बैकग्राउंड में होने के कारण सामान्य तौर पर दिखाई नहीं देता था।


रिपोर्ट के मुताबिक, इस छिपे निर्देश में AI सिस्टम को पुराने निर्देशों को नजरअंदाज कर आवेदक को टॉप कैंडिडेट बताने के लिए कहा गया था, भले ही उसकी योग्यता उस स्तर की हो या नहीं।

लाइन में आगे निकलनेकी कोशिश से नाराज CEO

पॉल ली के लिए यह सिर्फ एक चालाकी नहीं, बल्कि भरोसे से जुड़ा गंभीर मुद्दा था। उन्होंने इसे लाइन में दूसरों से आगे निकलने की कोशिश बताया। खास तौर पर जिस पद के लिए आवेदन किया गया था, उसमें ईमानदारी और भरोसा बेहद महत्वपूर्ण थे। ऐसे में AI को प्रभावित करने के लिए छिपे निर्देशों का इस्तेमाल करना कंपनी के लिए और भी चिंताजनक बन गया।

पहले छिपे Keywords, अब AI Prompts का खेल

रिज्यूमे में AI प्रॉम्प्ट छिपाने की यह रणनीति पूरी तरह नई सोच नहीं है। पहले भी कुछ उम्मीदवार Applicant Tracking Systems (ATS) को प्रभावित करने के लिए रिज्यूमे में ऐसे Keywords या टेक्स्ट छिपाते थे, जिन्हें इंसान आसानी से नहीं देख पाता था। अब AI के भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के साथ यह तरीका एक कदम आगे बढ़ गया है। उम्मीदवार ऐसे निर्देश डालने की कोशिश कर रहे हैं, जो जनरेटिव AI को उनके पक्ष में फैसला लेने के लिए प्रभावित कर सकें।

Hiring Process के ‘Black Box’ बनने की चिंता

HR प्लेटफॉर्म Lattice की CEO सारा फ्रैंकलिन के मुताबिक, भर्ती प्रक्रिया पहले से ही कई लोगों को एक तरह के ‘ब्लैक बॉक्स’ जैसी लगती है। उम्मीदवारों को अक्सर यह साफ नहीं होता कि उनका रिज्यूमे किस आधार पर शॉर्टलिस्ट या रिजेक्ट किया गया। ऐसे में AI को प्रभावित करने वाली तकनीकें सामने आने से भर्ती प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता और भरोसे की चिंता और बढ़ सकती है।

क्या सच में मिलेगा इंटरव्यू का फायदा?

हालांकि, HR एक्सपर्ट्स इस बात को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं कि छिपे AI प्रॉम्प्ट उम्मीदवारों को वास्तविक फायदा पहुंचाएंगे। Terra Vista की HR कॉर्पोरेट डायरेक्टर नथालिया अरयानी के मुताबिक, रिक्रूटर्स अक्सर बड़ी संख्या में आवेदन एक साथ देखते हैं और पर्याप्त योग्य उम्मीदवार मिलने के बाद आगे बढ़ जाते हैं। ऐसे में रिज्यूमे में कितनी भी चालाकी से AI निर्देश छिपाए जाएं, यह जरूरी नहीं कि वह स्क्रीनिंग सिस्टम के जरिए उम्मीदवार को इंटरव्यू तक पहुंचा ही दें।

AI और नौकरी की दुनिया में शुरू हुई नई रेस

AI जहां कंपनियों के लिए भर्ती प्रक्रिया को तेज और आसान बना रहा है, वहीं उम्मीदवार भी इसी तकनीक को मात देने के नए तरीके खोज रहे हैं। रिज्यूमे में छिपे प्रॉम्प्ट इसी बदलती जॉब मार्केट की एक झलक हैं।

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