पुणे के निहार पाटिल की जॉब स्विचिंग को लेकर दी गई सलाह सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। उनका कहना है कि करियर में एक ऐसा पड़ाव आता है, जब हर बार सिर्फ सैलरी बढ़ाने के लिए नौकरी बदलना जरूरी नहीं होता। खासकर जब नई नौकरी में मिलने वाला हाइक महज 20-30 हजार रुपये का हो, तो टैक्स और दूसरे पहलुओं को ध्यान में रखते हुए यह बढ़ोतरी उतनी बड़ी नहीं रह जाती।निहार के मुताबिक, नौकरी चुनते समय केवल पैकेज पर ध्यान देने के बजाय अच्छा मैनेजर, बेहतर प्रोजेक्ट, जॉब सिक्योरिटी और वर्क-लाइफ बैलेंस भी देखना चाहिए।
उनका मानना है कि एक स्थिर नौकरी के साथ अपने खाली समय का इस्तेमाल नई स्किल सीखने, कुछ नया शुरू करने या अतिरिक्त इनकम सोर्स बनाने में किया जा सकता है। इसी सोच को लेकर उनकी बात पर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
1.5 से 2 लाख की सैलरी के बाद बदलें नजरिया
इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो में निहार ने कहा कि भारत में जब किसी की मासिक सैलरी करीब 1.5 से 2 लाख रुपये तक पहुंच जाती है, तो नौकरी बदलने को लेकर सोच थोड़ी अलग होनी चाहिए। उनका तर्क है कि इस स्तर पर ऐसी कंपनियों और भूमिकाओं की संख्या कम हो जाती है, जहां बहुत बड़ा सैलरी जंप मिल सके। ऐसे में अगर नई नौकरी से सिर्फ 20-30 हजार रुपये ज्यादा मिल रहे हैं, तो टैक्स कटने के बाद हाथ में आने वाला वास्तविक अंतर काफी कम महसूस हो सकता है।
ज्यादा CTC का मतलब ज्यादा रिस्क भी?
निहार ने नौकरी बदलने से जुड़े एक और पहलू की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि ज्यादा सैलरी के साथ CTC भी बढ़ता है और कंपनियों में होने वाली री-स्ट्रक्चरिंग या छंटनी के दौरान यह एक जोखिम बन सकता है। ऐसे में अगर मौजूदा कंपनी में काम अच्छा चल रहा है, मैनेजर सपोर्टिव है और करियर स्थिर है, तो केवल छोटे सैलरी हाइक के लिए नौकरी छोड़ना जरूरी नहीं है।
9 से 5 के बाद बनाएं अपना ‘5 से 9’
निहार की सलाह का सबसे दिलचस्प हिस्सा नौकरी के बाहर की जिंदगी को लेकर है। उनका कहना है कि जब आपकी 9 से 5 की नौकरी स्थिर हो जाए, तो उसके बाद के समय को अपनी ग्रोथ के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। नई स्किल सीखना, अपना कोई प्रोजेक्ट शुरू करना या कमाई का दूसरा जरिया तैयार करना भविष्य में ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है।
उनके मुताबिक, करियर का अंतिम लक्ष्य केवल नौकरी से ज्यादा पैसा कमाना नहीं होना चाहिए। असली मकसद ऐसी जिंदगी बनाना होना चाहिए, जहां आपकी पूरी आर्थिक सुरक्षा सिर्फ एक नौकरी पर निर्भर न हो।
सोशल मीडिया पर छिड़ी दिलचस्प बहस
निहार की बात पर सोशल मीडिया यूजर्स की राय भी बंटी नजर आई। कुछ लोगों ने उनकी सोच को सही बताते हुए कहा कि एक स्तर के बाद फोकस मल्टीपल इनकम सोर्स, बेहतर लाइफस्टाइल और उद्देश्यपूर्ण जिंदगी पर होना चाहिए। वहीं, कुछ यूजर्स ने कॉरपोरेट वर्क कल्चर की हकीकत सामने रखी। एक यूजर ने कहा कि इतनी ज्यादा सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के पास अक्सर दूसरी चीजों के लिए समय ही नहीं बचता, क्योंकि कंपनियां उनसे दिन-रात उपलब्ध रहने की उम्मीद करती हैं।
एक अन्य यूजर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि कई कंपनियों में 9 से 5 का मतलब अब 9 से 9 हो चुका है। ऐसे में नौकरी के बाद किसी दूसरी चीज पर ध्यान देना आसान नहीं।
सिर्फ नौकरी या पूरी जिंदगी? असली सवाल यही है
एक यूजर ने इस बहस में संतुलित नजरिया रखते हुए कहा कि 5 से 9 को बेहतर बनाने के साथ-साथ 9 से 5 में भी संतुलन जरूरी है, क्योंकि अगर नौकरी ही नीरस और थकाऊ हो जाए तो बाकी चीजों पर भी असर पड़ता है।