कर्नाटक के एक स्कूल की वायरल मार्कशीट ने इंटरनेट पर ऐसी बहस छेड़ दी है, जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। जहां छोटे-छोटे बच्चों के शानदार नंबर देखकर कुछ लोग उनकी मेहनत की तारीफ कर रहे हैं, तो वहीं कई लोग इसे बचपन पर बढ़ते पढ़ाई के दबाव से जोड़ रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या पहली-दूसरी क्लास से ही बच्चों को रैंक और परफेक्ट नंबर की दौड़ में शामिल कर देना सही है? कई यूजर्स का मानना है कि आज बच्चों का बचपन किताबों और मार्क्स के बीच कहीं खोता जा रहा है।
वहीं कुछ लोग इसे बदलते शिक्षा सिस्टम और समाज की बढ़ती उम्मीदों का असर बता रहे हैं। ये वायरल तस्वीर अब सिर्फ रिजल्ट नहीं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई और मानसिक दबाव को लेकर बड़ी चर्चा का विषय बन चुकी है।
200 में 200 नंबर पाने वाले बच्चे
बताया जा रहा है कि ये रिजल्ट नंदना प्राइमरी स्कूल शिमोगा का है। II Semester परीक्षा 2025-26 के इस चार्ट में एस. यज्ञसूर्या ऐताल और खुशिका वी ने 200 में 200 अंक हासिल किए। वहीं कुछ और बच्चों ने भी 197 से 199 तक नंबर पाए। सोशल मीडिया पर ये तस्वीर तेजी से वायरल हो गई।
वायरल पोस्ट देखने के बाद कई लोगों ने चिंता जताई कि पहली-दूसरी क्लास के बच्चों के बीच इतनी प्रतिस्पर्धा क्यों बढ़ाई जा रही है। कुछ यूजर्स ने लिखा कि इस उम्र में बच्चों को खेलने और सीखने की आजादी मिलनी चाहिए, न कि सिर्फ नंबरों की दौड़ में धकेला जाना चाहिए।
कई लोगों ने कहा कि ये मामला सिर्फ एक स्कूल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश की सोच को दिखाता है। बच्चों की तुलना, टॉप रैंक और हाई स्कोर का दबाव अब बहुत छोटी उम्र से शुरू हो रहा है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने माना कि इससे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।
लोगों ने National Education Policy 2020 का भी जिक्र किया। इस नीति में छोटे बच्चों के लिए खेल-आधारित शिक्षा और कम दबाव वाली पढ़ाई की बात कही गई है। लेकिन यूजर्स का कहना है कि असलियत में आज भी बच्चों को शुरुआत से ही नंबरों की रेस में डाल दिया जाता है।
सोशल मीडिया पर मजेदार रिएक्शन भी आए
इस बहस के बीच कुछ मजेदार प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिलीं। कई लोगों ने मजाक में कहा कि 200 में 200 नंबर लाने के बाद भी खुशिका वी दूसरे स्थान पर कैसे आ गईं। वहीं कुछ यूजर्स ने अपने स्कूल दिनों को याद करते हुए हल्के-फुल्के कमेंट भी किए।