UAE Big Ticket Lottery Winner: 'उम्मीद कभी मत छोड़िए, आपका दिन भी एक दिन जरूर आएगा!' यह केवल एक कहावत नहीं, बल्कि उन लाखों-करोड़ों प्रवासियों के संघर्ष का सच है जो अपनों के बेहतर भविष्य के लिए अपने घर-परिवार से दूर परदेस में पसीना बहाते हैं। केरल के रहने वाले 44 वर्षीय सैदलावी करीओदन वारिचलील पिछले 17 सालों से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में एक स्कूल में वॉचमैन की नौकरी कर रहे हैं।
दिन-रात पहरेदारी करने वाले सैदलावी और उनके दोस्तों की जिंदगी में वह दिन आ ही गया, जिसका वे पिछले 4 सालों से इंतजार कर रहे थे। 'बिग टिकट' (Big Ticket Series 289) के ड्रॉ में उनकी किस्मत ऐसी चमकी कि वे 1,00,000 दिरहम (लगभग ₹26 लाख) का जैकपॉट जीत गए।
दोस्तों का साथ और 4 साल का लंबा इंतजार
एक मामूली तनख्वाह में घर चलाना और दूर बैठे परिवार की जरूरतें पूरी करना कितना मुश्किल होता है, यह सैदलावी बखूबी जानते हैं। 4 साल पहले उन्होंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर पहली बार 'बिग टिकट' का एक हिस्सा खरीदा था। तब से लेकर आज तक, हर महीने अपनी बचत में से कुछ पैसे निकालकर वे एक उम्मीद के साथ टिकट खरीदते रहे।
इस बार उनके दोस्त अनूब ने रैंडम तरीके से एक टिकट चुना था। जब विजेताओं की घोषणा हुई, तो उस टिकट पर सैदलावी और उनके ग्रुप का नाम लिखा था। सैदलावी ने नम आंखों से बताया कि यह जीत केवल पैसों की नहीं, बल्कि उनके और उनके दोस्तों के सालों के विश्वास की जीत है।
'यह पैसा सीधे घर जाएगा...'
₹26 लाख जैसी रकम किसी भी नॉर्मल व्यक्ति के लिए उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी खुशियों में से एक होती है। जब सैदलावी से पूछा गया कि वे इतने सारे पैसों का क्या करेंगे, तो उनका जवाब बेहद भावुक करने वाला था। उन्होंने कहा, 'यह सारा पैसा सीधे भारत में मेरे परिवार के पास जाएगा। वे सालों से मेरे लौटने और एक बेहतर जिंदगी का सपना देख रहे हैं। यह पैसा मेरे बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जरूरतों को पूरा करेगा।'
इतना बड़ा इनाम जीतने के बावजूद सैदलावी का स्वभाव नहीं बदला। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि वे आगे भी दोस्तों के साथ मिलकर टिकट खरीदते रहेंगे, क्योंकि उम्मीद ही इंसान को आगे बढ़ाती है।
तीन अलग कहानियां, लेकिन एक ही उम्मीद
इस ड्रॉ की सबसे खूबसूरत बात यह रही कि इसमें सैदलावी के अलावा केरल के दो और आम कर्मचारियों की किस्मत बदली:
अखिल चंद्रन (28 वर्ष): सेल्स की नौकरी करने वाले अखिल पिछले 7 सालों से टिकट खरीद रहे थे। उन्होंने कहा, 'आपको नहीं पता कि किस्मत कब दरवाजा खटखटा दे, बस प्रयास करते रहना चाहिए।'
शरथ ससिधरन (33 वर्ष): एक टेक्नीशियन के रूप में काम करने वाले शरथ का टिकट उनकी मां और बेटियों ने चुना था। शरथ इस पैसे का इस्तेमाल अपनी सेहत और इलाज के लिए करेंगे।
यूएई में काम करने वाले लाखों प्रवासियों के लिए सैदलावी और उनके साथियों की यह जीत केवल एक लॉटरी नहीं, बल्कि उनके त्याग, सब्र और एक-दूसरे के प्रति दोस्तों के अटूट भरोसे की कहानी है। यह साबित करता है कि मेहनत के साथ अगर उम्मीद का दिया रोशन रहे, तो देर से ही सही, हर किसी का दिन आता जरूर है।