नौकरी छोड़े महीनों बीते, लेकिन अटका रहा वेतन; कोलकाता प्रोफेशनल ने साझा किया दर्द

कोलकाता के एक प्रोफेशनल की LinkedIn पोस्ट ने वेतन भुगतान और कर्मचारी अधिकारों को लेकर चर्चा बढ़ा दी है। पूर्व कर्मचारी का दावा है कि नौकरी छोड़ने के करीब एक साल बाद भी उसकी ₹10,000 की बकाया सैलरी नहीं मिली। उसने इसे सिर्फ पैसों का नहीं, बल्कि सम्मान और मेहनत की कद्र का मुद्दा बताया

अपडेटेड Jul 21, 2026 पर 11:49 AM
पोस्ट वायरल होने के बाद कई LinkedIn यूजर्स ने कर्मचारी के समर्थन में प्रतिक्रियाएं दीं।

कोलकाता के एक प्रोफेशनल की LinkedIn पोस्ट ने इन दिनों नौकरी, वेतन भुगतान और कर्मचारी अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। पूर्व कर्मचारी ने दावा किया है कि संगठन छोड़ने के लगभग एक साल बाद भी उसकी करीब ₹10,000 की बकाया सैलरी का भुगतान नहीं किया गया। उनका कहना है कि यह मुद्दा सिर्फ एक छोटी रकम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस सम्मान और भरोसे से जुड़ा है, जिसकी उम्मीद हर कर्मचारी अपने काम के बदले करता है। पोस्ट में उन्होंने बताया कि कई बार संपर्क करने और इंतजार करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।

इसके बाद उन्होंने अपनी बात सार्वजनिक रूप से साझा करने का फैसला किया। इस मामले ने सोशल मीडिया पर कर्मचारियों के अधिकारों, कंपनियों की जिम्मेदारी और बेहतर वर्क कल्चर को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

अक्टूबर 2025 में छोड़ी थी नौकरी


पूर्व कर्मचारी के मुताबिक, उसने Go Future Digital Team में अप्रैल 2025 से अक्टूबर 2025 तक काम किया था। उसने 13 अक्टूबर 2025 को इस्तीफा दिया और 15 अक्टूबर उसका आखिरी कार्यदिवस था। उसका दावा है कि अक्टूबर के बाकी दिनों की सैलरी को लेकर उसने ज्यादा उम्मीद नहीं रखी, लेकिन करीब ₹10,000 की राशि अब तक लंबित है।

बार-बार संपर्क के बावजूद नहीं हुआ भुगतान

LinkedIn पोस्ट में कर्मचारी ने आरोप लगाया कि उसने कंपनी के मालिक Ayon Chatterjjee से कई बार संपर्क कर बकाया राशि का भुगतान करने की कोशिश की। उसके अनुसार, हर बार उसे कुछ और समय इंतजार करने को कहा गया और जल्द भुगतान का भरोसा दिलाया गया, लेकिन रकम कभी जारी नहीं हुई।

एक हफ्ते चुप रहो, पेमेंट हो जाएगा’ वाले मैसेज का दावा

कर्मचारी ने अपनी पोस्ट के साथ कुछ बातचीत के स्क्रीनशॉट भी साझा किए, जिनमें उसने कंपनी प्रतिनिधि के साथ भुगतान को लेकर हुई बातचीत का दावा किया। एक स्क्रीनशॉट में कथित तौर पर जवाब दिया गया कि सात दिन तक कॉल और मैसेज न करने पर भुगतान कर दिया जाएगा। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

पब्लिक पोस्ट करने की बताई वजह

पूर्व कर्मचारी ने कहा कि शुरुआत के करियर में ऐसा अनुभव काफी निराशाजनक रहा। उसने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं, बल्कि अन्य नौकरी तलाशने वालों को सतर्क करना है। उसने कर्मचारियों को सलाह दी कि वे जॉइन करने से पहले कंपनी की भुगतान व्यवस्था समझें और सभी जरूरी दस्तावेज व रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।

सोशल मीडिया पर लोगों ने जताया समर्थन

पोस्ट वायरल होने के बाद कई LinkedIn यूजर्स ने कर्मचारी के समर्थन में प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों ने कहा कि किसी भी कर्मचारी की मेहनत की कमाई समय पर मिलनी चाहिए। वहीं कुछ यूजर्स ने अपने अनुभव भी साझा किए और दावा किया कि उन्हें भी वेतन भुगतान से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा है।

वर्क कल्चर और कर्मचारियों के अधिकारों पर फिर चर्चा

इस मामले ने एक बार फिर नौकरी की दुनिया में वेतन भुगतान, कर्मचारियों के सम्मान और कंपनियों की जिम्मेदारी जैसे मुद्दों को सामने ला दिया है। हालांकि, LinkedIn पोस्ट में किए गए आरोपों और कमेंट्स की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

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