मां के गहने बिकने से पहले बेटे ने लिया बड़ा फैसला, आज बना 50 करोड़ रुपये की कंपनी का मालिक
मध्य प्रदेश के किसान परिवार से आने वाले अंश पाटीदार ने कम उम्र में ऐसे हालात देखे, जिनसे कई लोग हार मान लेते हैं। लेकिन उन्होंने चुनौतियों को अवसर में बदला और मेहनत के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई। आज उनकी सफलता की कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है
अंश पाटीदार का जन्म मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के बोरला गांव में हुआ।
सफलता की कहानियां अक्सर बड़े शहरों से जुड़ी सुनाई देती हैं, लेकिन कई बार छोटे गांवों से निकले युवा भी अपनी मेहनत और सोच के दम पर नई पहचान बना लेते हैं। मध्य प्रदेश के एक किसान परिवार से आने वाले अंश पाटीदार ने भी कम उम्र में चुनौतियों का सामना करते हुए उद्यमिता की राह चुनी। आर्थिक तंगी, असफलता और भारी कर्ज जैसी मुश्किलों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार प्रयास करते रहे।
उनकी यही लगन उन्हें एक ऐसे मुकाम तक ले गई, जहां उनका स्टार्टअप तेजी से पहचान बनाने लगा। आज उनकी कहानी सिर्फ बिजनेस की सफलता नहीं, बल्कि धैर्य, जोखिम उठाने की क्षमता और नई सोच का उदाहरण भी मानी जाती है, जो कई युवाओं को अपने सपनों के लिए मेहनत करने की प्रेरणा देती है।
खेती करने वाले परिवार में बीता बचपन
अंश पाटीदार का जन्म मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के बोरला गांव में हुआ। उनके पिता किसान हैं और खेती से ही परिवार का गुजारा चलता था। लेकिन लगातार फसल खराब होने और उचित दाम न मिलने से परिवार आर्थिक संकट में फंस गया। हालात इतने खराब हो गए कि उनकी पढ़ाई पर भी असर पड़ने लगा।
मां के गहने बिकने से पहले लिया बड़ा फैसला
जब पढ़ाई के खर्च के लिए मां के गहने बेचने की नौबत आई, तब अंश ने खुद कुछ करने का फैसला किया। खेतों में पिता के साथ काम करते हुए उन्होंने देखा कि किसान एक जैसी गुणवत्ता वाले कीटनाशकों के लिए अलग-अलग कीमत चुका रहे हैं। यहीं से उन्हें अपना बिजनेस शुरू करने का विचार आया।
सिर्फ ₹3,000 से शुरू किया कारोबार
अंश ने महज ₹3,000 की पूंजी से गुजरात के एक निर्माता से कृषि उत्पाद खरीदने शुरू किए और उन्हें स्थानीय किसानों को कम कीमत पर बेचना शुरू किया। बेहतर गुणवत्ता और किफायती दाम की वजह से किसानों का भरोसा बढ़ता गया और उनका कारोबार आसपास के गांवों तक फैलने लगा।
स्कूल के साथ संभाला बिजनेस
कम उम्र में ही अंश ने पढ़ाई और कारोबार दोनों को साथ लेकर चलना शुरू किया। दिन में स्कूल जाते, शाम को गांव-गांव जाकर किसानों से मिलते और रात में पढ़ाई करते थे। बताया जाता है कि 15 साल की उम्र में उन्हें GST रजिस्ट्रेशन भी मिल गया था। करीब 18 महीनों में उनके कारोबार का टर्नओवर लगभग ₹40 लाख तक पहुंच गया।
17 साल की उम्र में ₹95 लाख का कर्ज
कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए अंश ने एक एग्रीटेक प्लेटफॉर्म शुरू किया। हालांकि, यह प्रयास सफल नहीं हुआ और 17 साल की उम्र में उन पर करीब ₹95 लाख का कर्ज हो गया। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। किसानों का भरोसा दोबारा जीतने के लिए पारदर्शिता के साथ काम किया और धीरे-धीरे पूरा कर्ज चुका दिया।
नई शुरुआत ने बदल दी किस्मत
साल 2022 में अंश ने Ariva Organics की शुरुआत की। कंपनी बायो-पेस्टीसाइड और ड्रोन आधारित खेती के समाधान उपलब्ध कराती है। इन तकनीकों की मदद से किसानों को पानी, खाद और मजदूरी की लागत कम करने में मदद मिली।
आज 5,000 से ज्यादा किसानों के साथ जुड़ी कंपनी
बताया जाता है कि शुरुआत के एक साल के भीतर ही Ariva Organics की वैल्यू ₹50 करोड़ से अधिक पहुंच गई। कंपनी 15,000 एकड़ से ज्यादा कृषि भूमि पर काम कर रही है और 5,000 से अधिक किसानों को आधुनिक खेती से जोड़ चुकी है।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
अंश पाटीदार की कहानी बताती है कि कठिन परिस्थितियां अगर सही सोच और लगातार मेहनत के साथ मिलें, तो वे नई शुरुआत का कारण भी बन सकती हैं। कम पूंजी से शुरू हुआ उनका सफर आज देश के उभरते युवा उद्यमियों की प्रेरणादायक कहानियों में गिना जाता है।