अनार छोड़ शुरू की इस फसल की खेती, आज पैसे गिनते नहीं थकते किसान

भारत में खेती पर बढ़ती लागत, बदलते मौसम और घटते मुनाफे ने किसानों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। ऐसे में कई किसान पारंपरिक फसलों की बजाय नए विकल्प तलाश रहे हैं। महाराष्ट्र के एक किसान ने भी ऐसा ही फैसला लिया और एक नई फसल अपनाकर अपनी आय में बड़ा बदलाव लाने में सफलता हासिल की

अपडेटेड Aug 04, 2026 पर 9:10 AM
इसी दौरान एक दोस्त ने उन्हें व्यावसायिक सहजन की खेती का सुझाव दिया।

भारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है, लेकिन आज खेती पहले जैसी आसान नहीं रही। मौसम की अनिश्चितता, बढ़ती उत्पादन लागत, कीटों और बीमारियों का बढ़ता खतरा तथा बाजार में कीमतों का उतार-चढ़ाव किसानों की कमाई पर सीधा असर डाल रहे हैं। ऐसे में कई किसान पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने के बजाय नई और कम लागत वाली फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। सही योजना, आधुनिक तकनीक और बाजार की समझ के साथ ये किसान खेती को घाटे का सौदा नहीं, बल्कि मुनाफे का व्यवसाय बना रहे हैं। महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के किसान सागर येलपले इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं। उन्होंने वर्षों से चली आ रही अनार की खेती छोड़कर सहजन (ड्रमस्टिक) की खेती अपनाई।

शुरुआत केवल एक एकड़ में प्रयोग के तौर पर हुई, लेकिन शानदार नतीजों ने उनकी सोच और किस्मत दोनों बदल दी। आज उनका 18 एकड़ का सहजन फार्म हर साल करोड़ों रुपये का कारोबार करता है और लाखों रुपये का शुद्ध मुनाफा देता है। उनकी सफलता आज हजारों किसानों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

महंगी पड़ रही थी अनार की खेती


सागर ने 2012 में पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने पिता के साथ 10 एकड़ की खेती संभाली। परिवार कई पीढ़ियों से अनार उगा रहा था, लेकिन समय के साथ इसकी खेती महंगी होती चली गई। उनके अनुसार, अनार में बीमारियों का खतरा बढ़ गया था, कीटनाशकों और रसायनों पर भारी खर्च करना पड़ता था। एक एकड़ से करीब 3 लाख रुपये की कमाई होती थी, लेकिन लगभग आधी रकम खेती की लागत में ही चली जाती थी। ऊपर से फसल तैयार होने में छह महीने का इंतजार भी करना पड़ता था।

2017 में लिया जिंदगी बदलने वाला फैसला

इसी दौरान एक दोस्त ने उन्हें व्यावसायिक सहजन की खेती का सुझाव दिया। सागर ने बिना जोखिम लिए पहले सिर्फ एक एकड़ में इसकी खेती शुरू की। उन्होंने करीब 4,000 रुपये में 400 ग्राम बीज खरीदे, खेत में गोबर की सड़ी खाद डाली और जनवरी 2017 में बुवाई कर दी। सिर्फ पांच महीने बाद जून में पहली फसल तैयार हो गई।

पहली ही फसल ने बढ़ाया हौसला

एक एकड़ से लगभग 10 टन सहजन की पैदावार हुई। बाजार में 25 से 30 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक्री हुई और पहली ही फसल से 3 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई हुई। यहीं से सागर को भरोसा हो गया कि भविष्य सहजन की खेती में है।

धीरे-धीरे बदली पूरी खेती की तस्वीर

सागर ने एक साथ पूरी खेती बदलने की बजाय धीरे-धीरे अनार के बाग हटाकर सहजन लगाना शुरू किया। बाद में उन्होंने 8 एकड़ और जमीन जोड़ ली। आज उनके पास कुल 18 एकड़ में करीब 12,000 सहजन के पौधे हैं, जिनमें मुख्य रूप से ODC-3 और ODC-4 किस्में लगाई गई हैं।

हर साल 200 टन तक उत्पादन

शुरुआत में एक पेड़ से लगभग 25 किलो फल मिलता था, लेकिन सही देखभाल और नियमित छंटाई के कारण अब एक पेड़ से करीब 50 किलो तक उत्पादन हो रहा है। पूरे फार्म से हर साल 180 से 200 टन सहजन की पैदावार होती है।

बायोगैस प्लांट से घटाया खर्च

सागर ने खेत में बायोगैस प्लांट भी लगाया है, जिससे रोजाना 200 से 300 लीटर स्लरी निकलती है। यही स्लरी खेतों में जैविक खाद का काम करती है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर हुई, रासायनिक खाद का खर्च घटा और बायोगैस का इस्तेमाल घर में खाना बनाने के लिए भी होने लगा।

हैदराबाद बना सबसे बड़ा बाजार

अच्छी फसल के साथ सागर ने मजबूत बाजार भी तैयार किया। आज उनकी अधिकांश उपज लगभग 400 किलोमीटर दूर हैदराबाद भेजी जाती है, जहां व्यापारी पूरी फसल खरीद लेते हैं। पहले वे दुबई भी निर्यात करते थे, लेकिन अब हैदराबाद से ही इतनी मांग है कि पूरी उपज वहीं बिक जाती है।

मौसम बदलता है, मुनाफा नहीं

सर्दियों में सहजन की कीमत 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है, जबकि गर्मियों में यह 25 रुपये प्रति किलो तक आ जाती है। इसके बावजूद पूरे साल का औसत भाव करीब 50 रुपये प्रति किलो रहता है, जिससे खेती लगातार फायदे का सौदा बनी हुई है।

बीज बेचकर भी लाखों की कमाई

सिर्फ सहजन बेचकर ही नहीं, बल्कि सागर अब इसकी गुणवत्तापूर्ण बीज भी किसानों को बेचते हैं। वे करीब 10,000 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बीज बेचते हैं, जिससे सालाना लगभग 15 लाख रुपये की अतिरिक्त आय होती है।

1.15 करोड़ का कारोबार, 80 लाख तक मुनाफा

सहजन और बीज की बिक्री मिलाकर सागर का सालाना कारोबार करीब 1.15 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इसमें से करीब 80 लाख रुपये का शुद्ध लाभ होता है।

दूसरे किसानों को क्या सलाह देते हैं सागर?

सागर का मानना है कि किसी भी नई फसल में सीधे पूरी खेती बदलने की बजाय पहले छोटे स्तर पर प्रयोग करना चाहिए। फसल की देखभाल, बाजार की मांग और खरीदारों की उपलब्धता को समझने के बाद ही बड़े स्तर पर निवेश करना बेहतर होता है। यही सोच उनके लिए सफलता की सबसे बड़ी कुंजी साबित हुई।

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