किसान के लिए ज्यादा जमीन का मतलब हमेशा ज्यादा कमाई नहीं होता। कई बार छोटी-सी जमीन पर सही फसल और आधुनिक तकनीक अपनाकर भी आमदनी का बड़ा जरिया तैयार किया जा सकता है। महाराष्ट्र के किसान अर्जुन साबले ने इसी सोच को अपनी मेहनत और प्रयोगों से सच कर दिखाया है। कभी उनके परिवार की खेती गेंदे और गुलदाउदी जैसे पारंपरिक फूलों तक सीमित थी, लेकिन बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और गिरते दामों ने उन्हें कुछ नया सोचने पर मजबूर किया। खेती की पढ़ाई के दौरान अर्जुन ने पॉलीहाउस में फूलों की खेती देखी और इसी ने उनकी दिशा बदल दी।
उन्होंने महज 10 गुंठे जमीन से गुलाब की खेती शुरू की। छोटे से प्रयोग से मिली अच्छी कमाई ने उनका हौसला बढ़ाया और धीरे-धीरे उन्होंने जरबेरा को भी खेती में शामिल कर लिया। आज एक एकड़ में फूलों की खेती से वह रोजाना 12 से 13 हजार रुपये तक कमाते हैं।
पीढ़ियों से फूल उगाए, लेकिन कमाई ने रास्ता बदला
अर्जुन का परिवार कई पीढ़ियों से गेंदे और गुलदाउदी की खेती करता आया है। खेत में फूल उगाकर उन्हें मुंबई के बाजारों तक पहुंचाया जाता था। लेकिन समय बदला तो फूलों के दाम गिरने लगे और बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई। मेहनत बढ़ रही थी, लेकिन आमदनी उसी हिसाब से नहीं बढ़ रही थी। यही वह दौर था जब अर्जुन ने खेती में कुछ नया करने का फैसला किया।
पढ़ाई के दौरान मिला पॉलीहाउस खेती का आइडिया
बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई के दौरान अर्जुन कई किसानों के खेतों पर जाते थे। इसी दौरान उन्होंने पॉलीहाउस में फूलों की खेती देखी। गुलाब को नियंत्रित वातावरण में उगाने का तरीका उन्हें काफी पसंद आया। उन्होंने तय किया कि बड़े पैमाने पर निवेश करने के बजाय पहले छोटे स्तर पर प्रयोग किया जाए।
अर्जुन ने करीब 10 गुंठे यानी एक-चौथाई एकड़ जमीन पर गुलाब की खेती शुरू की। शुरुआती रोपण सामग्री उन्होंने बेंगलुरु के एक किसान से खरीदी और करीब 8 हजार रुपये लगाए। करीब छह महीने बाद उनके खेत से रोजाना 500 गुलाब निकलने लगे। स्थानीय बाजार में एक गुलाब करीब 5 रुपये में बिकता था। यानी रोजाना लगभग 2,500 रुपये की कमाई होने लगी। यह छोटा-सा प्रयोग अर्जुन के लिए बड़ा हौसला बन गया। इसके बाद उन्होंने गुलाब के साथ जरबेरा की खेती भी शुरू कर दी।
अब एक एकड़ में 32 हजार पौधे
आज अर्जुन एक एकड़ में करीब 16 हजार गुलाब और 16 हजार जरबेरा के पौधे उगा रहे हैं। उनके खेत से रोज लगभग 1,000 गुलाब और 2,000 जरबेरा स्टिक निकलती हैं। 5 रुपये प्रति गुलाब और 4 रुपये प्रति जरबेरा के हिसाब से रोजाना करीब 13 हजार रुपये की बिक्री हो जाती है।
अर्जुन ने खेती के लिए नेचुरली वेंटिलेटेड पॉलीहाउस तैयार किया है। इसमें छत के वेंट और साइड कर्टन हवा के आवागमन में मदद करते हैं। उनका पहला 10 हजार वर्गफुट का पॉलीहाउस करीब 3 लाख रुपये में तैयार हुआ था। गुलाब और जरबेरा के पौधे 5 से 7 साल तक उत्पादन दे सकते हैं, जिससे शुरुआती निवेश का फायदा लंबे समय तक मिलता रहता है। सिंचाई के लिए ड्रिप और माइक्रो स्प्रिंकलर का इस्तेमाल होता है, जबकि कीट नियंत्रण के लिए नियमित स्प्रे किया जाता है।
फूल पहुंचे कई बड़े शहरों तक
अर्जुन अपने फूल सीधे स्टॉल और थोक बाजारों में बेचते हैं। मांग के अनुसार जरबेरा बेंगलुरु, वडोदरा, अहमदाबाद, हैदराबाद और मुंबई तक पहुंचता है। 10 गुंठे से शुरू हुआ यह सफर आज एक एकड़ के फायदे वाले कारोबार में बदल चुका है। अर्जुन की कहानी बताती है कि खेती में बड़ा बदलाव हमेशा बड़ी जमीन से नहीं, बल्कि सही फसल, आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार की समझ से आता है।