
पोस्ट में आगे कहा कि, 17वीं से 19वीं शताब्दी के बीच बने मराठा साम्राज्य के 12 ऐतिहासिक किले इस सूची में शामिल हुए हैं, जो महाराष्ट्र और तमिलनाडु में फैले हुए हैं। (Photo:X/@ASIGoI)
इनमें महाराष्ट्र के साल्हेर, शिवनेरी, लोहागढ़, खंडेरी, रायगढ़, राजगढ़, प्रतापगढ़, सुवर्णदुर्ग, पन्हाला, विजयदुर्ग और सिंधुदुर्ग किले शामिल हैं, जबकि तमिलनाडु में स्थित जिंजी किला भी इस सूची का हिस्सा है।(Photo:X/@ASIGoI)
2024-25 के लिए नामित यह धरोहर स्थल मराठा शासन के दौर की किला निर्माण कला और सैन्य रणनीति को दर्शाता है, जो 17वीं से 19वीं शताब्दी के बीच विकसित हुई थी। यह भारत की ऐतिहासिक विरासत और युद्धकला की एक खास पेश करता है।(Photo:X/@ASIGoI)
मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स वो क्षेत्रीय ढांचा था जो मराठा साम्राज्य की सैन्य रणनीति का आधार बना। पहाड़, किले, नदियां और जंगल इनकी खासियत थे, जिनका मराठाओं ने युद्ध और रक्षा में कुशलता से इस्तेमाल किया। (Photo:X/@ASIGoI)
मराठा सैन्य धरोहर को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने खुशी जताई और देशवासियों को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए बधाई दी। (Photo:X/@ASIGoI)
इस नई धरोहर को शामिल किए जाने के बाद अब भारत के पास कुल 44 विश्व धरोहर स्थल हैं, जिन्हें उनके सांस्कृतिक, ऐतिहासिक या प्राकृतिक महत्व के लिए यूनेस्को द्वारा मान्यता मिली है।(Photo:X/@ASIGoI)