Micromoon May 2026: आज बुद्ध पूर्णिमा की रात आसमान में उगेगा माइक्रोमून, जानें खगोल प्रेमियों के लिए क्यों खास रहने वाला है मई का महीना

Micromoon May 2026: आज मई का पहला दिन है और बुद्ध पूर्णिमा के साथ ही वैशाख पूर्णिमा का महत्वपूर्ण पर्व भी है। यह दिन खगोल प्रेमियों के लिए बेहद खास होगा, क्योंकि आज की रात आसमान में माइक्रो मून का बेहद खास नजारा देखने को मिलेगा। आइए जानें मई का महीना इनके लिए कैसे खास होगा

अपडेटेड May 01, 2026 पर 5:26 PM
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मई 2026 में दो माइक्रोमून की घटनाएं होंगी, जिसमें चांद छोटा और कम चमकीला दिखाई देगा।

Micromoon May 2026: आज से शुरू हुआ मई का महीना कई मायनों में खास माना जा रहा है। आज जहां वैशाख पूर्णिमा के साथ बुद्ध पूर्णिमा का पर्व मनाया जा रहा है। वहीं, आज का दिन या यूं कहें कि आज की रात खगोल प्रेमियों के लिए बेहद खास होगी। आज आसमान चांद का ऐसा रूप दिखेगा, जो एक खास स्थिति में ही देखने को मिलता है। इसे माइक्रोमून कहते हैं। इतना ही नहीं, मई के महीने की शुरुआत और अंत दोनों माइक्रोमून के साथ होंगे। और हां, कैलेंडर माह में दो पूर्णिमा आने की वजह से ब्लू मून भी होगा।

बुद्ध पूर्णिमा पर 15% छोटा होगा चांद का आकार

जैसा कि हम जानते हैं चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाता है। पृथ्वी के इर्द-गिर्द चंद्रमा का यह चक्कर परफेक्ट गोलाकार न होकर अंडाकार होता है। चंद्रमा जब अपनी कक्षा में घूमते हुए उसके सबसे करीब (पेरिजी) होता है, तब पड़ने वाली पूर्णिमा के चांद को सुपरमून कहते हैं। इसी सिद्धांत के बिलकुल विपरीत माइक्रोमून का सिद्धांत है। यानी अपनी कक्षा में पृथ्वी के चारों ओर घूमते हुए चंद्रमा उससे सर्वाधिक दूर (अपोजी) भी जाता है। ऐसे समय में जब पूर्णिमा पड़ती है, तब यह दुर्लभ नजारा देखने को मिलता है। इस दिन चंद्रमा का आकार सुपर मून के मुकाबले 15% छाेटा और कम चमकीला नजर आता है। नेटिव अमेरिकी लोग मई की पूर्णिमा को फ्लावर मून भी कहते हैं।

आज माइक्रोमून के दीदार का समय

बुद्ध पूर्णिमा यानी आज 1 मई 2026 को माइक्रो फ्लावर मून का दीदार होगा। इसका चरम समय रात्रि 10:53 बजे होगा। हालांकि इसका समय अलग-अलग समय क्षेत्र के अनुसार भिन्न हो सकता है। इस समय चंद्रमा पृथ्वी से लगभग 401,999.9 किलोमीटर दूर होगा।

एक महीने में दो पूर्णिमा, दोनों में माइक्रोमून


मई 2026 में दो माइक्रोमून की घटनाएं होंगी। इसमें पूर्णिमा पृथ्वी से अपने सबसे दूर के बिंदु (अपोजी) पर होगी, जिससे यह छोटा और कम चमकीला दिखाई देगा। दूसरी माइक्रोमून पूर्णिमा मई महीने के अंत में होगी, जो ब्लू मून कहलाएगी। ब्लू मून एक कैलेंडर माह या एक मौसम में चार से अधिक पूर्णिमा होने पर आखिरी पूर्णिमो को ब्लू मून कहा जाता है। यहां से मुहावरा बना, 'वंस इन अ ब्लू मून' (कभी-कभी होने वाली घटना)। इसका अर्थ है कि यह बहुत दुर्लभ है। मगर, इसमें चांद का रंग जरा भी ब्लू नहीं होता है। यह बस इस घटना की दुर्लभता बताने का तरीका है।

एक वर्ष में कितनी पूर्णिमाएं होती हैं

खगोलविद ने बताया कि अधिकांश वर्षों में 12 पूर्णिमाएं होती हैं। हालांकि, इसलिए कभी-कभी किसी वर्ष में 13 पूर्णिमाएं भी हो जाती हैं। जब ऐसा होता है तो उनमें से कम से कम एक को ब्लू मून कहा जाता है।

12 महीनों के 12 पूर्णिमाओं के नाम

पूर्णिमा के चांद का नाम जनवरी वुल्फ मून, फरवरी स्नो मून, मार्च बर्म मून, अप्रैल पिंक मून, मई फ्लावर मून/माइक्रोमून, जून स्ट्रॉबेरी मून, जुलाई बक मून, अगस्त स्टर्जन मून, सितंबर कॉर्न मून, अक्तूबर हंटर मून, नवंबर बीवर मून, दिसंबर कोल्ड मून (इसके अलावा 13 पूर्णिमा वाले वर्ष में एक ब्लू मून भी दिखाई देगा जोकि आगामी 31 मई को दिखेगा)।

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