Microsoft News: माइक्रोसॉफ्ट अपनी एंप्लॉयी परफॉरमेंस पॉलिसी में बदलाव कर रही है। नई पॉलिसी के तहत उन एंप्लॉयीज को दो साल तक फिर से भर्ती पर प्रतिबंध लगाया गया है जिन्हें खराब परफॉरमेंस के चलते कंपनी से निकाला गया था। कंपनी के इंटर्नल डॉक्यूमेंट्स में गुड एट्रीशन का भी प्रावधान है जो कंपनी के लिए फायदमेंद लेकिन बाहर जाने वाले एंप्लॉयीज को ट्रैक करता है। कंपनी ने यह फैसला ऐसे कदम ऐसे समय में उठाया है, जब माइक्रोसॉफ्ट ने कथित तौर पर करीब 2,000 एंप्लॉयीज को उनके खराब वर्क परफॉर्मेस के चलते निकाल दिया था।
Microsoft की नई परफॉरमेंस पॉलिसी, बाहर निकलें या सुधार करें
माइक्रोसॉफ्ट ने खराब प्रदर्शन करने वाले एंप्लॉयीज को दो विकल्प दिए हैं। या तो खास लक्ष्यों और समयसीमा के साथ परफॉरमेंस इंप्रूवमेंट प्लान (पीआईपी) का हिस्सा बनें, या 16 हफ्ते की सैलरी वाला वालंटरी एक्जिट पैकेज चुन लें यानी कि 16 हफ्ते की सैलरी लेकर कंपनी छोड़ दें। चीफ पीपल ऑफिसर एमी कोलमैन के इंटर्नल मेमो के मुताबिक "शून्य या 60% रिवॉर्ड आउटकम" वाले एंप्लॉयीज या जो अभी पीआईपी पर हैं, उनका इंटर्नल ट्रांसफर नहीं होगा। जो लोग पीआईपी के दौरान या उसके बाद बाहर निकलते हैं या खराब रिवॉर्ड स्कोर के साथ कंपनी छोड़ते हैं, उन्हें दो साल तक फिर कंपनी में एंट्री नहीं मिलेगी।
टेक कंपनियों में सख्त हो रही हैं एचआर पॉलिसीज
माइक्रोसॉफ्ट ने नीतियों में जो बदलाव किया है, वह टेक इंडस्ट्री में एचआर पॉलिसी की सख्ती के बढ़ते रुझान को दिखा रहा है। इसमें कंपनियां परफॉरमेंस के मानकों को सख्त कर रही हैं और खराब प्रदर्शन को सहने की क्षमता घटा रही हैं। माइक्रोसॉफ्ट में तो अब जाकर सख्ती हो रही है। एमेजॉन और मेटा में पहले से ही सख्ती की जा रही है। एमेजॉन 'अनरिग्रेटेड एट्रीशन' मानक का इस्तेमाल कर रही है तो मेटा कुछ एंप्लॉयीज को फिर से हायर नहीं करने की नीति अपना रही हैं।