Monsoon 2025 : देश में इस बार मानसून ने समय से पहले दस्तक दी है। केरल के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून ने महाराष्ट्र में भी समय से पहले पहुंच गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून 25 मई को गोवा, महाराष्ट्र के दक्षिण कोंकण क्षेत्र के देवगढ़ तक और कर्नाटक के कई हिस्सों में पहुंच चुका है। आमतौर पर महाराष्ट्र में मानसून 5 जून के आसपास आता है, लेकिन इस बार यह 10 दिन पहले ही राज्य में प्रवेश कर गया है।
इन इलाकों में मानसून ने दी दस्तक
आईएमडी ने जानकारी दी कि मानसून अब तक पश्चिम-मध्य और पूर्व-मध्य अरब सागर के कुछ और हिस्सों, पूरा गोवा, महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों, कर्नाटक के कुछ और हिस्सों, पश्चिम-मध्य और उत्तर बंगाल की खाड़ी के अतिरिक्त क्षेत्रों और पूर्वोत्तर भारत के मिजोरम, मणिपुर व नागालैंड के कुछ हिस्सों में भी पहुंच चुका है। समय से पहले मानसून की शुरुआत किसानों और मौसम पर नजर रखने वालों के लिए राहत की खबर मानी जा रही है।
मुंबई में जल्द पहुंच सकता है मानसून
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, अगले तीन दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में आगे बढ़ने की संभावना है। मौसम विभाग ने बताया कि मुंबई, बेंगलुरु और मध्य अरब सागर के कुछ और क्षेत्रों में मानसून के प्रवेश के लिए मौसम पूरी तरह अनुकूल बना हुआ है। आईएमडी ने यह भी बताया कि आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु के शेष भाग, पश्चिम-मध्य और उत्तरी बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्से और पूर्वोत्तर भारत के अन्य हिस्सों में भी अगले कुछ दिनों में मानसून के पहुंचने की संभावना है। अगर मानसून 28 मई तक मुंबई पहुंचता है, तो यह अब तक की सबसे जल्दी पहुंचने वाली मानसूनी दस्तक मानी जाएगी, जो एक नया रिकॉर्ड होगा। आमतौर पर मुंबई में मानसून की शुरुआत जून के पहले सप्ताह में होती है, लेकिन इस बार स्थिति काफी उत्साहजनक है।
मुंबई में मानसून की रिकॉर्ड रफ्तार
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, इस वर्ष मुंबई में मानसून सामान्य से काफी पहले दस्तक दे सकता है। इससे पहले, मुंबई में सबसे पहले मानसून 29 मई को पहुंचा था, जो 1956, 1962 और 1971 में हुआ था। इसके अलावा, 1990 और 2006 में भी मानसून ने 31 मई को शहर में दस्तक दी थी। इस बार मानसून की रफ्तार बेहद तेज़ है। IMD ने बताया कि केरल में दस्तक देने के 24 घंटे के भीतर ही मानसून महाराष्ट्र में प्रवेश कर गया, जो अपने आप में असामान्य है। आमतौर पर मानसून को केरल से महाराष्ट्र तक पहुंचने में तीन दिन लगते हैं। इससे पहले सिर्फ दो बार—1971 और 2012 में—ऐसी तेज़ प्रगति दर्ज की गई थी। इस तेज़ रफ्तार से संकेत मिलते हैं कि देश के अन्य हिस्सों में भी मानसून समय से पहले पहुंच सकता है, जो किसानों और आम लोगों के लिए राहत की खबर है।