आजकल AI रोजाना की जिंदगी का हिस्सा बन गया है, जो लोगों को ऑफिस के काम से लेकर नई स्किल्स सीखने तक में मदद करता है। लेकिन कभी-कभी AI का इस्तेमाल ऐसे मौकों पर भी देखने को मिलता है, जिसकी हम उम्मीद नहीं करते।
आजकल AI रोजाना की जिंदगी का हिस्सा बन गया है, जो लोगों को ऑफिस के काम से लेकर नई स्किल्स सीखने तक में मदद करता है। लेकिन कभी-कभी AI का इस्तेमाल ऐसे मौकों पर भी देखने को मिलता है, जिसकी हम उम्मीद नहीं करते।
ऐसा ही कुछ दिल्ली में सुबह के समय कैब से सफर कर रहे मैनेजमेंट कंसल्टेंट तुषार जेजानी के साथ हुआ। उन्होंने देखा कि उनका कैब ड्राइवर फोन पर अंग्रेजी में बात कर रहा था। शुरुआत में यह देखकर उन्हें लगा कि आखिर फोन पर क्या हो रहा है।
लेकिन जब जेजानी ने ड्राइवर से एक साधारण सा सवाल पूछा, तो उन्हें ऐसी बात पता चली जिसकी उन्होंने उम्मीद नहीं की थी। जिसके बाद एक आम कैब यात्रा सीखने, टेक्नोलॉजी और मेहनत से जुड़ी ऐसी कहानी बन गई, जिसने सफर खत्म होने के बाद भी उन्हें काफी समय तक प्रेरित किया।
जेजानी ने लिंक्डइन पोस्ट में इस घटना का जिक्र करते हुए लिखा, "सुबह 4:13 बजे, नई दिल्ली। एक ऐसी कैब यात्रा जिसे मैं कभी नहीं भूलूंगा।"
उन्होंने आगे बताया, "मेरा ड्राइवर अपने फोन पर अंग्रेजी में बात कर रहा था, अपनी सुबह की दिनचर्या और यात्रा की लोकेशन बता रहा था। मैं थोड़ा घबरा गया और ध्यान से सुनने लगा क्योंकि एक पल के लिए मुझे लगा कि वह हमारी लोकेशन और जानकारी किसी और के साथ साझा कर रहा है। तभी उसने देखा कि मैं असहज महसूस कर रहा हूं। उसने बातचीत शुरू कर दी।"
ड्राइवर ने फिर पूछा, "सर, आप कहां जा रहे हैं?"
जेजानी ने जवाब दिया, "मैं बैंगलोर जा रहा हूं।"
इसके बाद ड्राइवर ने पूछा कि वह वहां काम के सिलसिले में जा रहे हैं या निजी काम से?
जेजानी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “हमेशा काम के लिए।”
दोनों के बीच करीब 10 मिनट तक बातचीत हुई। ड्राइवर अंग्रेजी में बात कर रहा था, जबकि जेजानी उसे हिंदी में जवाब दे रहे थे। हालांकि, जेजानी के मन में अभी भी यह सवाल था कि ड्राइवर फोन पर आखिर किससे बात कर रहा था। आखिरकार उन्होंने सीधे उससे पूछ ही लिया।
तभी ड्राइवर ने जेजानी को बताया कि वह फोन पर किसी और से बात नहीं कर रहा था। बल्कि वह ChatGPT का इस्तेमाल करके अंग्रेजी बोलने की प्रैक्टिस कर रहा था।
ड्राइवर ने कहा, "नहीं भैया, फोन पर नहीं। मैं ChatGPT पर अंग्रेजी बोलने की प्रैक्टिस कर रहा था। अभी मैं फर्राटे से अंग्रेजी नहीं बोल पाता। मेरी अभी बेटी हुई है। उसके लिए सीख रहा हूं। जब बड़ी होगी, तो उसे भी सिखाऊंगा।"
इस पल को याद करते हुए जेजानी ने लिखा, "सुबह 5 बजे उस लगभग खाली सड़क पर मुझे एक बात समझ आई। वह सिर्फ अंग्रेजी नहीं सीख रहा था। वह चुपचाप अपनी बेटी के लिए जिंदगी में एक नई शुरुआत की तैयारी कर रहा था। मुझे नहीं पता कि AI किन-किन नौकरियों की जगह लेगा। लेकिन यह जरूर है कि AI ने भारतीय समाज के हर वर्ग के लोगों तक टेक्नोलॉजी की पहुंच आसान कर दी है।"
इस घटना ने जेजानी को यह सोचने पर भी मजबूर किया कि कैसे टेक्नोलॉजी ने सीखने की राह में आने वाली कुछ रुकावटों को कम किया है। उन्होंने लिखा, "कोई कोचिंग क्लास नहीं। कोई गेटकीपर नहीं। बस सीखने की इच्छा और AI वाला एक स्मार्टफोन। पिछले साल की इस कैब यात्रा को याद करते हुए जेजानी ने AI में आए बदलावों का भी जिक्र किया। उन्होंने अंत में लिखा, "क्या सफर था और क्या जबरदस्त सीख मिली। सीखते रहो, सीखते रहो और सीखते रहो।"
सोशल मीडिया पर लोगों के रिएक्शन
इस पोस्ट के बाद LinkedIn पर AI, सीखने और टेक्नोलॉजी तक पहुंच के बारे में बड़ी चर्चा शुरू हो गई।
एक यूजर ने कमेंट किया, "ड्राइवर की कहानी दिखाती है कि जिज्ञासा, इरादा और टेक्नोलॉजी तक पहुंच नए रास्ते खोल सकती है, चाहे कोई कहीं से भी शुरुआत करे। सीखने के लिए क्लासरूम की जरूरत नहीं होती; कभी-कभी, बस एक स्मार्टफोन और खुद को बेहतर बनाते रहने की इच्छा ही काफी होती है।"
एक और यूजर ने कहा, "कभी-कभी AI का सबसे असरदार इस्तेमाल ऑफिस या स्टार्टअप में नहीं, बल्कि ऐसी रोजमर्रा की जिंदगी में देखने को मिलता है।"
एक यूजर ने लिखा, "AI का सबसे बड़ा असर शायद ऑटोमेशन नहीं, बल्कि आम लोगों को उन टूल्स तक पहुंच देना हो सकता है, जो पहले मुश्किल से ही मिल पाते थे।"
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