स्विमिंग पूल, क्लब हाउस और स्पोर्ट्स कोर्ट वाला नोएडा का ये करोड़ों का फ्लैट भी इस शख्स को लगता है जहन्नुम! वजह भी बताई

नोएडा की एक लग्जरी सोसाइटी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें पुनीत जिंदल ने अपनी अपार्टमेंट लाइफ के अनुभव साझा किए हैं। उनका कहना है कि बाहर से दिखने वाली चमकदार और “परफेक्ट” जिंदगी अंदर से उतनी सुकूनभरी नहीं होती, बल्कि कई बार यह तनाव और असुविधा से भरी हो जाती है

अपडेटेड May 20, 2026 पर 4:45 PM
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शहर की चमकदार जिंदगी या छुपा हुआ स्ट्रेस? देखें वायरल वीडियो का सच

नोएडा की एक हाई-राइज लग्जरी सोसाइटी का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने शहर की चमकदार अपार्टमेंट लाइफ पर नई बहस छेड़ दी है। इस वीडियो में रहने वाले शख्स पुनीत जिंदल ने अपनी रोजमर्रा की जिंदगी के ऐसे अनुभव साझा किए हैं, जो बाहर से दिखने वाली “परफेक्ट और लग्जरी लाइफ” की तस्वीर को एक अलग ही नजरिए से पेश करते हैं। करोड़ों की कीमत वाले फ्लैट, शानदार सुविधाएं और हाई-टेक लाइफस्टाइल होने के बावजूद उनका कहना है कि असली जिंदगी उतनी आसान और सुकूनभरी नहीं होती, जितनी दिखाई देती है।

उनके अनुसार, इन दीवारों के अंदर कई बार हवा, सुकून और मानसिक शांति की कमी महसूस होती है। यही वजह है कि ये वीडियो लोगों को सोचने पर मजबूर कर रहा है कि क्या सच में लग्जरी जिंदगी हमेशा खुशहाल होती है या इसके पीछे कोई और सच्चाई छिपी होती है।

स्विमिंग पूल से क्लब हाउस तक सब कुछ शानदार


वीडियो की शुरुआत में वो अपनी सोसाइटी की झलक दिखाते हैं, जहां हर सुविधा किसी 5-स्टार लाइफस्टाइल जैसी लगती है।

स्विमिंग पूल, क्लब हाउस, जिम, योगा स्पेस, क्रिकेट और बास्केटबॉल कोर्ट से लेकर स्टीम और सॉना तक सब कुछ मौजूद है।

लेकिन इतने सारे सुविधाओं के बावजूद वो कहते हैं कि “इतनी महंगी फ्लैट लाइफ भी मेरे लिए सुकून नहीं दे रही।”

फ्लैट के अंदर की असल परेशानी

जहां बाहर सब कुछ शानदार दिखता है, वहीं अंदर की कहानी थोड़ी अलग है।

उनके मुताबिक ओपन किचन से खाना पकाने की गंध पूरे घर में फैल जाती है, जिससे परेशानी बढ़ जाती है।

इसके अलावा खराब वेंटिलेशन के कारण घर में ताजी हवा की कमी महसूस होती है।

वो ये भी बताते हैं कि आसपास के फ्लैट्स से आने वाली गर्मी, AC की आवाज और वॉशरूम की बदबू मिलकर माहौल को असहज बना देती है।

उनका कहना है, “कभी-कभी ये जगह आराम नहीं, बल्कि थकान देती है।”

EMI और काम का बोझ

पुनीत ने सिर्फ घर की नहीं, बल्कि शहर की पूरी लाइफस्टाइल पर सवाल उठाए।

उनका कहना है कि बड़े शहरों में लोग 15–20 साल के भारी-भरकम लोन में फंस जाते हैं।

कमाई का बड़ा हिस्सा EMI में चला जाता है और इंसान लगातार काम करने के दबाव में रहता है।

उनके अनुसार ये दौड़-भाग वाली जिंदगी धीरे-धीरे मानसिक तनाव बढ़ा देती है।

कौन देता है असली सुकून?

उन्होंने शहर और गांव की जिंदगी की तुलना करते हुए कहा कि गांव में कम आय के बावजूद जीवन ज्यादा शांत और सरल होता है।

उनका मानना है कि साफ हवा, कम खर्च और बिना भागदौड़ की जिंदगी गांव को ज्यादा सुकूनभरा बनाती है।

वो ये भी कहते हैं कि शहर में 1 लाख कमाने वाला व्यक्ति भी उतना ही तनाव झेलता है, जितना गांव में 25,000 कमाने वाला।

सोशल मीडिया पर बंटी राय

वीडियो वायरल होने के बाद लोगों की राय दो हिस्सों में बंट गई है।

कुछ यूजर्स ने कहा कि बड़ी सोसाइटी और शहर की चमक-दमक के पीछे असली जिंदगी अक्सर कठिन होती है।

वहीं कई लोगों का कहना है कि शहर अवसरों की दुनिया है, जिसे छोड़ा नहीं जा सकता।

कुछ ने तो यहां तक लिखा कि आज के समय में “ताजी हवा और मानसिक शांति ही सबसे बड़ी लग्जरी बन गई है।”

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