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पाकिस्तानी अदालत का विवादित फैसला, नाबालिग क्रिश्चियन लड़की की जबरन शादी को दी मंजूरी

पाकिस्तान की अदालत ने 13 वर्षीय ईसाई लड़की मारिया शाहबाज को उसके अपहरण और जबरन धर्मांतरण करने वाले व्यक्ति के हवाले कर दिया। माता-पिता का जन्म प्रमाण पत्र अदालत ने मान्यता नहीं दी, जिससे परिवार दुखी है। यह फैसला अल्पसंख्यक नाबालिग लड़कियों पर हो रहे लगातार अत्याचारों को उजागर करता है

Edited By: Anchal Jhaअपडेटेड Apr 07, 2026 पर 3:53 PM
पाकिस्तानी अदालत का विवादित फैसला, नाबालिग क्रिश्चियन लड़की की जबरन शादी को दी मंजूरी
लाहौर के कैथोलिक चर्च ने इस फैसले को “गंभीर न्याय विफलता” बताया।

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति बेहद नाजुक है, खासकर नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा को लेकर। अक्सर देखा गया है कि गैर-मुस्लिम नाबालिग लड़कियों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर कार्रवाई नहीं होती, और जब वे न्याय की उम्मीद में अदालतों तक जाती हैं, तो उन्हें भी न्याय नहीं मिलता। इसका ताजा उदाहरण 13 वर्षीय ईसाई लड़की मारिया शाहबाज़ का मामला है। मारिया को अपहरण कर जबरन इस्लाम में धर्मांतरण कराया गया और फिर उससे शादी कर दी गई।

25 मार्च 2026 को पाकिस्तान की एक संघीय अदालत ने इस शादी को वैध ठहराया, जिससे पूरे देश में विरोध और खलबली मच गई। मारिया की उम्र सिर्फ 13 साल थी, इसलिए यह फैसला कानूनी और नैतिक रूप से विवादास्पद माना जा रहा है। लाहौर स्थित कैथोलिक चर्च ने इसे “गंभीर न्याय विफलता” बताया और कहा कि इससे नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा पैदा हुआ है।

चर्च ने फैसले की कड़ी निंदा की

लाहौर के कैथोलिक चर्च ने इस फैसले को “गंभीर न्याय विफलता” बताया। आर्चबिशप खालिद रहमत ने कहा कि ये निर्णय नाबालिग की शादी को वैध ठहराने जैसा प्रतीत होता है, खासकर जब मामला अपहरण और जबरन धर्मांतरण से जुड़ा हो। उन्होंने कहा कि इस फैसले ने समुदाय में गहरा दुख पैदा किया है।

नाबालिग और जबरन धर्मांतरण का मामला

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