आपने हाल के वर्षों में ट्रेन (train) से सफर किया है, तो आपने देखा होगा कि कई ट्रेनों के पुराने नीले डिब्बों की जगह अब लाल रंग के कोच दिखाई देते हैं। यह बदलाव सिर्फ रंग का नहीं, बल्कि भारतीय रेलवे (Indian Railway) की मॉडर्न टेक्निक, बेहतर सुरक्षा और तेज रफ्तार की दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है। आखिर इन दोनों कोचों में क्या अंतर है और रेलवे ने लाल कोच (red coach) को नया स्टैंडर्ड क्यों बनाया? आइए जानते हैं इसके पीछे की पूरी वजह:
Technology (नीले और लाल कोच की अलग टेक्निक)
नीले रंग के ICF (Integral Coach Factory) कोच 1950 के दशक की स्टील डिजाइन पर बेस्ड हैं। वहीं लाल रंग के LHB (Linke Hofmann Busch) कोच जर्मन टेक्निक से तैयार किए गए हैं और हल्के स्टेनलेस स्टील से बने होते हैं, जिससे उनकी मजबूती और परफॉरमेंस बेहतर होता है।
Passenger safety (पैसेंजर की सुरक्षा में सुधार)
लाल LHB कोच में एडवांस्ड इंटरलॉकिंग कपलर लगाए जाते हैं। दुर्घटना या पटरी से उतरने की स्थिति में ये कोच एक-दूसरे के ऊपर नहीं चढ़ते, जिससे जान-माल का नुकसान काफी कम हो जाता है। पुराने नीले ICF कोच में यह सेफ्टी टेक्निक मौजूद नहीं थी।
Speed and braking system (ज्यादा रफ्तार और बेहतर ब्रेकिंग सिस्टम)
LHB कोच 160 किमी/घंटा तक की स्पीड से सेफ तरीके से चल सकते हैं, जबकि ICF कोच की सुरक्षित गति (safe speed limit) लगभग 110–120 किमी/घंटा तक सीमित थी। इसके अलावा लाल कोच में हाई-एफिशिएंसी डिस्क ब्रेक लगे होते हैं, जो तेज और सेफ ब्रेकिंग सुनिश्चित करते हैं।
Travel Experience (आरामदायक सफर का अनुभव)
लाल LHB कोच में मॉडर्न हाइड्रोलिक सस्पेंशन (hydraulic suspension system) सिस्टम लगाया गया है, जो ट्रैक के झटकों को बेहतर तरीके से अब्सॉर्ब्स करता है। इससे पैसेंजर को कम कंपन महसूस होता है और लंबी दूरी का सफर ज्यादा आरामदायक बनता है।
Red LHB Coaches (अब लाल LHB कोच ही नया स्टैंडर्ड)
भारतीय रेलवे ने वर्ष 2018 में नीले ICF कोच का प्रोडक्शन बंद कर दिया। इसके बाद से नई ट्रेनों में मुख्य रूप से लाल LHB कोच लगाए जा रहे हैं, ताकि पूरे रेलवे नेटवर्क में सेफ्टी, स्पीड और पैसेंजर सुविधाओं का एक समान मॉडर्न स्टैंडर्ड (modern standard) तय किया जा सके।