रोबोट पहनाएगा आपकी ड्रेस! जानिए कैसे बिना हाथ लगाए काम करती है ये स्मार्ट टेक्नोलॉजी

रोबोटिक्स की दुनिया में एक नई तकनीक ने लोगों का ध्यान खींचा है। KAIST और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने ऐसा रोबोटिक कपड़ा सिस्टम बनाया है, जो बिना हाथों की मदद के करीब 10 सेकंड में कपड़े पहनाने में सक्षम है। यह तकनीक बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है

अपडेटेड Jul 19, 2026 पर 12:10 PM
आमतौर पर रोबोटिक सिस्टम के लिए जटिल सॉफ्टवेयर और कंट्रोल एल्गोरिदम की जरूरत होती है

तकनीक लगातार इंसानी जिंदगी को आसान बनाने के लिए नए रास्ते खोल रही है। इसी कड़ी में एक ऐसा रोबोटिक आविष्कार सामने आया है, जो भविष्य में कपड़े पहनने की पूरी प्रक्रिया को बदल सकता है। दक्षिण कोरिया के KAIST और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा स्मार्ट रोबोटिक कपड़ा सिस्टम विकसित किया है, जो बिना हाथों का इस्तेमाल किए कुछ ही सेकंड में व्यक्ति को कपड़े पहनाने में मदद कर सकता है। यह तकनीक खासतौर पर बुजुर्गों, दिव्यांगों और उन लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है, जिन्हें शारीरिक सीमाओं के कारण रोजमर्रा के कामों में परेशानी होती है।

शोधकर्ताओं ने इसमें खास लचीली रोबोटिक ट्यूब का इस्तेमाल किया है, जो कपड़े को धीरे-धीरे शरीर पर चढ़ाने का काम करती हैं। यह खोज न सिर्फ सुविधा बढ़ाने वाली है, बल्कि भविष्य के सहायक रोबोटिक्स की नई दिशा भी दिखाती है।

कपड़े के अंदर लगे हैं खास वाइन रोबोट


इस रोबोटिक सिस्टम की सबसे खास बात इसमें इस्तेमाल किए गए सॉफ्ट एयर-पावर्ड रोबोट हैं। इन्हें कपड़ों के अंदर सिल दिया जाता है। ये लचीली ट्यूब जैसी संरचनाएं हवा भरने पर फैलती हैं और धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए कपड़े को शरीर के चारों ओर खींच लेती हैं। यह प्रक्रिया कुछ ऐसी होती है जैसे कपड़ा अंदर से बाहर की ओर पलटते हुए शरीर पर चढ़ता जाता है। खास बात यह है कि इस दौरान व्यक्ति को बिल्कुल स्थिर रहने की जरूरत नहीं पड़ती।

आइडिया आया बारिश में फंसे अनुभव से

इस अनोखी तकनीक के पीछे एक दिलचस्प कहानी भी है। शोधकर्ता किम नाम ग्यून ने बताया कि उन्हें यह विचार तब आया, जब वे साइकिल चलाते समय बारिश में फंस गए थे। उस समय उनके मन में आया कि अगर रेनकोट खुद ही शरीर पर चढ़ जाए तो कितना आसान हो जाएगा। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए टीम ने ऐसा पहनने योग्य रोबोटिक सिस्टम तैयार किया।

बेल की तरह काम करता है यह रोबोट

शोधकर्ताओं ने इस तकनीक को पौधों की बेल, खासकर चढ़ने वाली आइवी से प्रेरित होकर बनाया है। जैसे बेल अपनी नोक से बढ़ते हुए सतह के करीब रहती है, वैसे ही ये रोबोटिक ट्यूब कपड़े के अंदर आगे बढ़ती हैं। यह सिस्टम संकरी जगहों से गुजर सकता है, मुड़ी हुई सतहों के हिसाब से खुद को ढाल सकता है और फिसलन या ढलान वाली सतहों पर भी काम करने की क्षमता रखता है।

AI नहीं, मैकेनिकल डिजाइन है इसकी ताकत

आमतौर पर रोबोटिक सिस्टम के लिए जटिल सॉफ्टवेयर और कंट्रोल एल्गोरिदम की जरूरत होती है, लेकिन इस तकनीक की खासियत इसका सरल डिजाइन है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह सिस्टम अपने खास भौतिक ढांचे के कारण काम करता है, जिससे इसे ज्यादा आसान, लचीला और उपयोगी बनाया जा सकता है।

दिव्यांगों और बुजुर्गों के लिए बन सकता है सहारा

यह आविष्कार उन लोगों के लिए बड़ी मदद साबित हो सकता है, जिन्हें रोजमर्रा के कामों में दूसरों की सहायता लेनी पड़ती है। बुजुर्गों और शारीरिक रूप से कमजोर लोगों को इससे कपड़े पहनने में अधिक स्वतंत्रता मिल सकती है। इसके अलावा यह तकनीक अस्पतालों, आपातकालीन सेवाओं और सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में भी उपयोगी हो सकती है।

फायरफाइटर्स और मेडिकल स्टाफ को भी मिलेगा फायदा

शोधकर्ताओं का मानना है कि यह सिस्टम उन जगहों पर भी काम आ सकता है, जहां लोगों को जल्दी से सुरक्षात्मक कपड़े पहनने पड़ते हैं।

सेमीकंडक्टर क्लीनरूम, फायर ब्रिगेड, हेल्थकेयर और इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमों के लिए यह तकनीक समय बचाने वाला समाधान बन सकती है।

अभी शुरुआती चरण में है तकनीक

हालांकि यह आविष्कार काफी प्रभावशाली है, लेकिन अभी इसे आम लोगों के इस्तेमाल के लिए तैयार नहीं किया गया है। शोधकर्ता इस तकनीक को और बेहतर बनाने पर काम कर रहे हैं। यह खोज दिखाती है कि जहां एक ओर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं रोबोटिक्स और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में नए प्रयोग भी लोगों की जिंदगी आसान बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

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