Sikkim Landslide: सिक्किम में कुदरत का कहर, भारी बारिश और लैंडस्लाइड से 1800 पर्यटक फंसे, 1000 निकाले गए सुरक्षित

Sikkim Landslide: उत्तरी सिक्किम में गुरुवार देर रात लैंडस्लाइड की घटना सामने आई है। भारी बारिश के बाद कुदरत का कहर जारी है। लैंडस्लाइड की घटना से 1800 से ज्यादा पर्यटक फंसे हुए हैं। वहीं 1000 से ज्यादा पर्यटकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। निकाले गए पर्यटकों को गंगटोक लाया जा रहा है

अपडेटेड Apr 26, 2025 पर 12:32 PM
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Sikkim Landslide: लगातार बारिश की वजह से उत्तरी सिक्किम के कई हिस्सों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं।

उत्तरी सिक्किम में भारी बारिश हो रही है। जिससे लैंडस्लाइड की घटनाएं सामने आ रही हैं। राज्य के कई इलाकों में कुदरत का कहर जारी है। उत्तरी सिक्किम में लाचेन चुंगथांग रोड पर मुंशीथांग और लाचुंग चुंगथांग रोड पर लेमा/बॉब में भारी भूस्खलन हुआ है। जिससे सड़क के जरिए में आने-जाने में कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच प्रशासन ने उत्तरी सिक्किम के चुंगथांग शहर में फंसे करीब 1,100 पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। वहीं मंगन जिले के दो अन्य पॉपुलर हिल स्टेशनों में करीब 1800 पर्यटक फंसे हुए हैं।

जिन पर्यटकों को सुरक्षित निकाला गया है, उन्हें प्रशासन की ओर से गंगटोक लाया जा रहा है। चुंगथांग से गंगटोक के बीच की दूरी करीब 100 किमी है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, चुंगथांग गुरुद्वारा और ITBP कैंप में अभी करीब 200 पर्यटक वाहन फंसे हुए हैं।

ट्रैवल परमिट रद्द


अधिकारियों ने आज (26 अप्रैल 2025) ट्रैवल परमिट रद्द कर दिए हैं। वहीं पहले से जारी किए ट्रैवल परमिट भी रद्द किए जा चुके हैं। अधिकारियों ने टूर ऑपरेटरों को सख्त निर्देश दिए है कि सुरक्षा कारणों से आज किसी भी पर्यटक को उत्तरी सिक्किम नहीं भेजा जाए। वहां हो रही लगातार भारी बारिश और भूस्खलन को देखते हुए उत्तरी सिक्किम के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की गई है। मंगन जिले के पुलिस अधीक्षक सोनम देचू भूटिया से मिली जानकारी के मुताबिक, लाचेन-चुंगथांग मार्ग पर मुंशीथांग और लाचुंग-चुंगथांग मार्ग पर लेमा/बॉब में बड़े भूस्खलन की सूचना मिली है। ऐसे में कई सड़कें बंद रहीं।

जानिए क्या है लैंडस्लाइड

लैंडस्लाइड बहुत ही प्राकृतिक प्रक्रिया है। कोई भी लैंडस्केप या पर्वत जब विकसित होता है तो लैंडमास मूव करता है। पर्वत औप पृथ्वी भी ऐसे ही बने हैं। कोई भी स्टेट ऑफ मैटर हाई एनर्जी पर होता है तो लो एनर्जी पर आने की कोशिश करता है। जिसके कारण लैंडस्लाइड होता है। अभी तक हमारे स्लोप्स लगभग स्टेबल थे, लेकिन पिछले 10 सालों से एक्सट्रीम वेदर इवेंट बहुत ज्यादा हो रहे हैं। इस वजह से स्लोप्स अपनी स्टेबिलिटी पाने के लिए मूव हो रहे हैं। हिमालय हो या किसी भी रीजन में यह एक जैसा व्यवहार कर रहे हैं।

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