बेंगलुरु के एक सॉफ्टवेयर डेवलपर की करोड़पति बनने की कहानी इन दिनों चर्चा में है। Reddit के r/personalfinanceindia पर शेयर की गई पोस्ट में उन्होंने बताया कि कैसे 2017 में महज ₹2.6 लाख सालाना सैलरी से शुरू हुआ उनका करियर अब करीब ₹46 लाख LPA तक पहुंच गया। 31 साल की उम्र में उनकी कुल नेट वर्थ लगभग ₹1.16 करोड़ हो गई है। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने अपने लिए 30 साल की उम्र तक ₹1 करोड़ का लक्ष्य तय किया था। समय की रफ्तार और कुछ देरी के कारण वह इसे 31 की उम्र में हासिल कर पाए, लेकिन लक्ष्य पूरा होने की खुशी कम नहीं हुई। अपनी पोस्ट में उन्होंने कमाई बढ़ने के साथ-साथ बचत की आदत, नियमित निवेश और खर्चों पर नियंत्रण को अपनी सफलता का अहम हिस्सा बताया।
उनकी कहानी उन युवाओं के लिए दिलचस्प है, जो नौकरी की शुरुआती सैलरी से लेकर करोड़पति बनने तक का सफर समझना चाहते हैं और जानना चाहते हैं कि लगातार छोटी वित्तीय आदतें लंबे समय में कितना बड़ा असर डाल सकती हैं।
₹1.16 करोड़ की नेट वर्थ कैसे बनी?
उनकी कुल संपत्ति में करीब ₹43 लाख डायरेक्ट इक्विटी, ₹43 लाख म्यूचुअल फंड, ₹15 लाख EPF, ₹7 लाख बॉन्ड और करीब ₹1.3 लाख NPS शामिल हैं। इसके अलावा ट्रेडिंग अकाउंट में लगभग ₹6 लाख कैश भी है।
कमाई बढ़ी, लेकिन खर्च नहीं बढ़ने दिया
उनके मुताबिक, इस सफर में सबसे बड़ा रोल किसी एक शेयर या निवेश ने नहीं, बल्कि लगातार 50-60% की सेविंग रेट ने निभाया। उनकी और उनकी पत्नी की संयुक्त कमाई का बड़ा हिस्सा निवेश में जाता रहा। आय बढ़ने के बावजूद उन्होंने लाइफस्टाइल महंगाई को काबू में रखा।
SIP बना असली आधार, ऑप्शंस ट्रेडिंग रही साइड इनकम
उन्होंने 2018 के आसपास गंभीरता से निवेश शुरू किया और 2018 से इंडेक्स ऑप्शंस में पार्ट-टाइम ट्रेडिंग भी की। उनके मुताबिक, 2020 से यह ट्रेडिंग मुनाफे में रही और करीब छह वर्षों में इससे लगभग ₹15 लाख का संचयी लाभ हुआ। हालांकि, वह इसे अपनी संपत्ति का मुख्य आधार नहीं मानते। उनके अनुसार, नेट वर्थ का बड़ा हिस्सा सैलरी और नियमित SIP निवेश से बना है।
अब 40 की उम्र तक ₹10 करोड़ का लक्ष्य
₹1 करोड़ का लक्ष्य पार करने के बाद अब उनकी नजर 2035 तक ₹10 करोड़ की नेट वर्थ पर है। इसके लिए वह करीब 17-18% के blended CAGR और समय के साथ SIP बढ़ाने का लक्ष्य रख रहे हैं। हालांकि, उनकी रणनीति में एक बड़ा जोखिम भी शामिल है। वह कुछ ट्रेडिंग के लिए अपने निवेश को गिरवी रखकर मिलने वाली रकम का इस्तेमाल करते हैं। उनका मानना है कि इससे तेजी के बाजार में रिटर्न बढ़ सकता है, लेकिन बाजार लंबे समय तक गिरने पर यही रणनीति नुकसान और मार्जिन कॉल का जोखिम भी बढ़ा सकती है।
उनकी कहानी का सबसे बड़ा सबक यही है कि करोड़पति बनने के लिए हमेशा कोई बड़ा जैकपॉट जरूरी नहीं होता। आय बढ़ाना, खर्च नियंत्रित रखना और लंबे समय तक लगातार निवेश करते रहना भी धीरे-धीरे बड़ा अंतर पैदा कर सकता है।
डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।