Strawberry Moon 2025: कभी 'स्ट्रॉबेरी मून' देखा क्या? आसमान में दिखेगा खास नजारा, जानें भारत में कब होगा इस चांद का दीदार

Strawberry Moon 2025: भारत के आसमान में 11 जून को एक खास 'स्ट्रॉबेरी मून' आसमान में दिखाई देगा। जून की पूर्णिमा को आमतौर पर साल का सबसे नीचे चांद कहा जाता है, लेकिन इस बार यह घटना और भी खास है।इस बार का स्ट्रॉबेरी मून के साथ एक दुर्लभ खगोलीय घटना 'मेजर लूनर स्टैंडस्टिल' भी हो रही है

अपडेटेड Jun 10, 2025 पर 11:16 PM
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Strawberry Moon: जून में भारत के आसमान में दिखेगा अद्भुत नजारा (Photo Credit: Canva)

Strawberry Moon 2025: जून की आखिरी पूर्णिमा पर आसमान में एक अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा। भारत के आसमान में 11 जून को एक खास खगोलीय नजारा देखने को मिलेगा, जिसे 'स्ट्रॉबेरी मून' कहा जाता है। ये घटना एस्ट्रोनॉमी लवर्स के लिए काफी खास है। क्योंकि ये अनोखा मून हर 18 से 20 साल में एक बार नजर आता है। 11 जून 2025 के बाद ये दुर्लभ नाजारा दुबारा 2043 में नजर आएगा। इस बार का स्ट्रॉबेरी मून इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि इसके साथ एक दुर्लभ खगोलीय घटना 'मेजर लूनर स्टैंडस्टिल' भी हो रही है।

इस साल 11 जून बुधवार को यह मून सबसे निचली स्थिति में दिखेगा, जो देखने में बेहद खास होगा। यह नजारा खासकर उत्तरी हिस्सों में रहने वाले लोगों के लिए बेहद सुंदर और देखने लायक होगा। अब हर किसी के मन में ये सवाल होगा की क्या होता है ये स्ट्रॉबेरी मून? आइए जानते हैं

क्या होता है स्ट्रॉबेरी मून


स्ट्रॉबेरी मून नाम सुनकर ऐसा लग सकता है कि चांद गुलाबी रंग का होगा या इसका फल से कोई सीधा रिश्ता है, लेकिन ऐसा नहीं है। इसका नाम अलग-अलग परंपराओं से आया है, जैसे पुराने अमेरिकी, यूरोपीय और मूल आदिवासी परंपराएं से। पुराने समय में लोग पूर्णिमा के चांद को मौसम और फसलों के समय के हिसाब से अलग-अलग नाम देते थे। जून की पूर्णिमा को स्ट्रॉबेरी मून इसलिए कहा गया क्योंकि इस समय स्ट्रॉबेरी जैसे फल पक कर तैयार हो जाते हैं। खासकर अमेरिका के कुछ इलाकों में इसे ‘बेरीज रिपेन मून’ कहा जाता था, जो फसलों और फूलों के पूरी तरह तैयार होने का संकेत होता था।

अगली बार कब दिखेगा

जून की पूर्णिमा को आमतौर पर साल का सबसे नीचे चांद कहा जाता है, लेकिन इस बार यह घटना और भी खास है। इसकी वजह है इस साल की शुरुआत में चांद की एक दुर्लभ स्थिति जिसे "मून मैक्स" या चंद्रमा की चरम स्थिति कहा जाता है। ऐसा हर 18.6 साल में होता है जब चांद अपनी कक्षा में सबसे ऊंचे और सबसे निचले रास्तों से गुजरता है, जिससे यह क्षितिज के बेहद पास उगता और डूबता है। इस वजह से इस बार चांद बहुत नीचे दिखाई देगा। अगली बार ऐसा मौका 2043 में आएगा, इसलिए इस बार का नजारा खास माना जा रहा है।

भारत में कब दिखेगा

भारत में 11 जून की रात बेहद खास होगी, क्योंकि उस दिन स्ट्रॉबेरी मून अपनी पूरी चमक के साथ दिखाई देगा। इसे देखने का सबसे अच्छा समय सूर्यास्त के बाद होगा, जब चांद दक्षिण-पूर्व दिशा में क्षितिज के पास नजर आएगा और एक हल्की गर्म चमक बिखेरेगा। इसे साफ-साफ देखने के लिए ऐसे स्थान का चयन करें जहां रोशनी कम हो और आसमान खुला हो। दूरबीन या टेलीस्कोप से देखने पर यह अनुभव और भी शानदार हो सकता है।

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