Total Solar Eclipse 2026: सूर्य ग्रहण में सूरज के ढंकते ही धरती पर होंगे ये 5 अजीब बदलाव, जानकर रह जाएंगे हैरान

12 अगस्त 2026 का पूर्ण सूर्य ग्रहण सिर्फ आसमान में दिखने वाला अद्भुत नजारा नहीं होगा। कुछ मिनटों के लिए सूर्य की रोशनी ढकते ही धरती पर भी कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं। तापमान में गिरावट से लेकर पशु-पक्षियों के व्यवहार तक, ग्रहण के दौरान प्रकृति में कई दिलचस्प बदलाव नजर आएंगे

अपडेटेड Aug 12, 2026 पर 4:16 PM
पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान तापमान में अचानक और तेजी से गिरावट दर्ज की जाती है।

12 अगस्त 2026 को लगने वाला पूर्ण सूर्य ग्रहण खगोलीय घटना प्रेमियों के लिए एक बेहद अद्भुत दृश्य लेकर आया है। पाथ ऑफ टोटलिटी यानी पूर्ण ग्रहण जहां असर डालेगा उन इलाकों में दिन के समय अचानक रहस्यमयी धुंधलापन और अंधेरा छा जाएगा। वैसे तो इस पूरे सूर्य ग्रहण की यह अवधि महज कुछ ही मिनटों की होगी, लेकिन सूर्य की रोशनी के अचानक गायब हो जाने से पृथ्वी पर कई अजीब और अप्रत्याशित बदलाव देखने को मिलेंगे।

ज्यादातर लोग इस खगोलीय घटना के दौरान चंद्रमा को सूर्य को ढंकते हुए आसमान की ओर देखने में व्यस्त रहेंगे, लेकिन कुछ सबसे दिलचस्प और हैरान करने वाले असर हमारे आसपास धरती पर ही घटित हो रहे होंगे। आइए आपको इनके बारे में बताते हैं-

1- तापमान में आ सकती है अचानक गिरावट


पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान तापमान में अचानक और तेजी से गिरावट दर्ज की जाती है। जैसे ही चंद्रमा सूर्य की सतह को पूरी तरह से ढंक लेता है, पृथ्वी की सतह तक पहुंचने वाली सूर्य की किरणों और सौर ऊर्जा में भारी कमी आ जाती है। इस सीधी धूप के अचानक बंद हो जाने की वजह से ग्रहण के मुख्य चरण से ठीक पहले ही तापमान में तेजी से गिरावट अनुभव की जाने लगती है।

2- पशु-पक्षियों को होने लगता है रात होने का भ्रम

अचानक छा जाने वाले अंधेरे की वजह से दिन के समय एक्टिव रहने वाले पशु-पक्षी पूरी तरह से भ्रमित हो जाते हैं। अपनी दैनिक गतिविधियों के लिए सूर्य के प्रकाश पर निर्भर रहने वाले पक्षी अचानक चहचहाना बंद कर शांत हो जाते हैं और कई पक्षी वापस अपने घोंसलों की ओर लौटने लगते हैं। इसके साथ ही रात में सक्रिय होने वाले (निशाचर) जीव-जंतु इस अल्पकालिक अंधेरे को रात मानकर अपनी रात की गतिविधियां शुरू कर देते हैं।

3- पेड़ों की छांव में बनने लगती हैं नन्हीं अर्धचंद्राकार परछाइयां

सूर्य ग्रहण के आंशिक चरण के दौरान जमीन पर नजर डालना एक अलग तरह का अनुभव देता है। पेड़ों की पत्तियों के बीच बने छोटे-छोटे छिद्र प्राकृतिक 'पिनहोल कैमरे' की तरह काम करने लगते हैं। इसके असर से जमीन पर सूर्य की रोशनी के सामान्य गोल घेरों के बजाय आंशिक रूप से ढंके हुए सूर्य की नन्हीं अर्धचंद्राकार आकृतियों और परछाइयों की छवियां बनने लगती हैं।

4 - दिखाई देने लगता है सूर्य का बाहरी आभामंडल कोरोना

पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य की मुख्य चमकती सतह की रोशनी को पूरी तरह से छिपा लेता है। इससे सूर्य का बाहरी आभामंडल यानी सोलर कोरोना स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगता है। सोलर कोरोना सूर्य के वायुमंडल की अत्यधिक गर्म बाहरी परत होती है। इस खास समय में चंद्रमा की छाया के आसपास सूर्य की चमकदार सौर लपटें भी आसानी से देखी जा सकती हैं।

5- अचानक बदल सकती है हवा की गति और दिशा

सूर्य ग्रहण का असर लोकल पर्यावरण और हवा के पैटर्न पर भी पड़ता है। सूर्य का प्रकाश रुकने से तेजी से होने वाली ठंडक की प्रक्रिया वायु प्रवाह को सीधे प्रभावित करती है। इसके असर से अचानक हवा की गति में गिरावट आ सकती है और हवा अपनी दिशा भी बदल सकती है।

क्यों होते हैं ये अजीब बदलाव?

पूर्ण सूर्य ग्रहण सिर्फ सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी का एक शानदार अलाइनमेंट ही नहीं है बल्कि यह एक प्राकृतिक प्रयोग भी है। कुछ ही मिनटों के लिए चंद्रमा की छाया एक सीमित क्षेत्र में सूर्य के तीव्र विकिरण को रोक देती है। इस अचानक छाये अंधेरे का असर पृथ्वी के तापमान, वायुमंडल, प्रकाश के पैटर्न और जैविक संकेतों पर सीधे तौर पर पड़ता है। अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा से जुड़ी टीमें 12 अगस्त के इस सूर्य ग्रहण का उपयोग इन बदलावों का अध्ययन करने के लिए कर रही हैं। इसमें यह भी चेक किया जा रहा कि यह अस्थायी अंधेरा पृथ्वी के वायुमंडल को किस तरह से प्रभावित करता है।

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