देश के कई इंजीनियरिंग और साइंस छात्रों का सपना होता है कि उन्हें इसरो (ISRO) में काम करने का मौका मिले। वहीं एक टेक प्रोफेशनल का ISRO की इंटर्नशिप नीति को लेकर किया पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। पोस्ट के मुताबिक इसरो में काम करने का अनुभव उतना आदर्श नहीं है, जितना लोग मानते हैं। उन्होंने खासतौर पर इसरो की बिना स्टाइपेंड वाली इंटर्नशिप पर सवाल उठाए और कहा कि ऐसी व्यवस्था टैलेंटेड युवाओं को जोड़ने और लंबे समय तक बनाए रखने में चुनौती पैदा कर सकती है। इस पोस्ट पर लोगों ने तरह-तरह के रिएक्शन दिए हैं।
सोशल मीडिया पर प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर cneuralnetwork नाम के एक यूजर ने इसरो की इंटर्नशिप गाइडलाइंस का स्क्रीनशॉट शेयर किया। इसमें एक नियम पर ध्यान दिलाया गया, जिसमें लिखा था कि प्रोजेक्ट ट्रेनी और इंटर्न को किसी भी तरह का स्टाइपेंड/रेमुनरेशन/फाइनेंशियल असिस्टेंस नहीं दी जाएगी। इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर इसरो की इंटर्नशिप नीति को लेकर चर्चा तेज हो गई।
पोस्ट शेयर करने वाले यूजर ने लिखा, "बचपन में मेरा सपना था कि मैं ISRO में काम करूं। लेकिन किसी भी छात्र के लिए ऐसी जगह काम करने का सपना देखना मुश्किल है, जहां काम करने के बदले एक भी रुपया न मिले।" उन्होंने आगे कहा, "आज भी ISRO अपने अंडरग्रेजुएट इंटर्न्स को कोई स्टाइपेंड नहीं देता। इसके अलावा रहने की सुविधा और खाने का भी कोई इंतजाम नहीं किया जाता।" सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।
क्या है इसरो की गाइडलाइंस
ISRO की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, साइंस और टेक्नोलॉजी से जुड़े अंडरग्रेजुएट, पोस्टग्रेजुएट और पीएचडी छात्रों के लिए इंटर्नशिप और प्रोजेक्ट ट्रेनिंग की सुविधा उपलब्ध है। इंटर्नशिप की अवधि अधिकतम 45 दिन तक हो सकती है, जबकि प्रोजेक्ट ट्रेनिंग का समय संबंधित कोर्स और पढ़ाई के स्तर के अनुसार तय किया जाता है। वहीं, इस इंटर्नशिप नीति को लेकर सोशल मीडिया पर बहस भी तेज हो गई है। कई लोगों का कहना है कि प्रतिष्ठित सरकारी संस्थानों में छात्रों को सिर्फ अनुभव ही नहीं, बल्कि कुछ आर्थिक सहायता भी मिलनी चाहिए।
ISRO की गाइडलाइंस के अनुसार, इंटर्न और प्रोजेक्ट ट्रेनी को किसी भी तरह का स्टाइपेंड, मानदेय या आर्थिक सहायता नहीं दी जाती। साथ ही, संस्था की ओर से रहने की सुविधा भी सामान्य तौर पर उपलब्ध नहीं कराई जाती। वहीं, कुछ केंद्रों में जगह उपलब्ध होने पर शुल्क लेकर गेस्ट हाउस या हॉस्टल की सुविधा दी जा सकती है। वहीं, जो छात्र अपना इंटर्नशिप या प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक पूरा करते हैं, उन्हें मूल्यांकन के बाद प्रमाणपत्र (सर्टिफिकेट) प्रदान किया जाता है।
वायरल पोस्ट के बाद कई अन्य यूजर्स ने भी अपने एक्सपीरिएंश और राय शेयर किए हैं। एक X यूजर ने लिखा, "यह बेहद निराशाजनक है। बचपन में मेरा सपना भी ISRO में काम करने का था, लेकिन अगर अंडरग्रेजुएट इंटर्न्स को कोई स्टाइपेंड, खाना या रहने की सुविधा नहीं मिलेगी, तो हर छात्र इसके खर्च नहीं उठा सकता।" एक यूजर ने लिखा, "उन्हें यह समझने की जरूरत है कि वहां काम करना सम्मान की बात जरूर है, लेकिन सिर्फ सम्मान से छात्रों के रहने और दूसरे खर्च पूरे नहीं होते।"
एक अन्य यूजर ने कहा, "हमने ऐसी इंटर्नशिप के बारे में सुना है जहां कंपनियां छात्रों को पैसे देती हैं और बिना स्टाइपेंड वाली इंटर्नशिप भी देखी है, लेकिन यह बिल्कुल अलग मामला है। मेरे कॉलेज के कई दोस्तों ने DRDO और ISRO में इंटर्नशिप के दौरान खुद अपने खर्च उठाए थे।"