आधुनिकता की दौड़ में आज हर कोई आसमान छूती इमारतों में अपना घर बसाने का सपना देखता है। इन ऊंची सोसायटियों को 'लग्जरी' और 'प्रीमियम' जैसे बड़े शब्दों के साथ बेचा जाता है। लेकिन क्या हकीकत भी उतनी ही चमकदार है? हाल ही में नोएडा के एक निवासी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने इन आलीशान सोसायटियों की चकाचौंध के पीछे छिपे संघर्ष को उजागर कर दिया है।
'लग्जरी' के नाम पर 'वर्टिकल चॉल'
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर @pariwarikmahaulblogs द्वारा साझा किए गए इस वीडियो में शख्स ने अपनी सोसायटी की तुलना मुंबई के 'चॉल' से कर दी है। उसने इसे "प्रीमियम मेंटेनेंस वाला वर्टिकल चॉल" करार दिया। शख्स का कहना है कि जहां पुराने चॉलों में पानी की लाइनों के लिए कतारें लगती थीं, वहीं इन आधुनिक इमारतों में लोगों को लिफ्ट के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ता है।
वीडियो में नोएडा के हाई-राइज अपार्टमेंट्स की बुनियादी समस्याओं को विस्तार से उजागर किया गया है। शख्स का कहना है कि एक ही टावर में लगभग 175 फ्लैट्स हैं, जिनमें करीब 350 से 400 लोग रहते हैं, लेकिन इतनी बड़ी आबादी के बोझ को संभालने के लिए वहां का इंफ्रास्ट्रक्चर बेहद कमजोर है। सबसे बड़ी समस्या लिफ्ट की है; इतने निवासियों के लिए केवल दो लिफ्ट उपलब्ध हैं, जिनमें से भी एक समय पर केवल एक ही लिफ्ट चलती है और दूसरी को 'शिफ्ट' के आधार पर 12 घंटे बाद चलाया जाता है। इसके अलावा, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण हाल ही में एक मासूम बच्चा लिफ्ट में फंस गया था, जिसे करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाला जा सका, जो इन 'लग्जरी' सोसायटियों की गंभीर खामियों को दर्शाता है।
इस वीडियो के सामने आने के बाद इंटरनेट पर एक नई बहस शुरू हो गई है। कई लोगों ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि फ्लैट लाइफ अक्सर लागत कम करने का एक तरीका होती है, न कि वास्तव में लग्जरी जीने का। एक यूजर ने कमेंट किया, "फ्लैट्स दरअसल चॉल का ही एक सुधरा हुआ रूप हैं।" वहीं, कुछ अन्य लोगों ने बचाव में कहा कि सभी सोसायटियों की हालत ऐसी नहीं है और नोएडा में कुछ बहुत अच्छी तरह से प्रबंधित सोसायटियां भी मौजूद हैं।