एक यूट्यूबर की वायरल X पोस्ट ने स्किल्ड प्रोफेशनल्स की कमाई की क्षमता पर चर्चा शुरू कर दी है। उन्होंने एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की कहानी शेयर की, जिसने अपनी साइड प्रैक्टिस को कमाई का एक शानदार जरिया बना लिया। यह चर्चा तब शुरू हुई जब यूट्यूबर पारितोष शर्मा ने पुणे में रहने वाले अपने एक दोस्त की कहानी बताई, जो चार्टर्ड अकाउंटेंट के तौर पर काम करते हैं। शर्मा के अनुसार, जो काम शुरू में अपने पर्सनल नेटवर्क के लोगों की इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग में मदद करने से शुरू हुआ था, वह सिर्फ़ तीन साल में एक कामयाब प्रैक्टिस बन गया।
अपनी पोस्ट में शर्मा ने बताया कि वह CA अब ITR फाइलिंग के सीजन में लगभग 400 क्लाइंट्स को सर्विस देते हैं और हर क्लाइंट से 3,000 रुपये चार्ज करते हैं, जिससे वे कुछ ही दिनों में लगभग 12 लाख रुपये कमा लेते हैं। जैसे-जैसे डिमांड बढ़ी, उन्होंने काम का बोझ संभालने के लिए दो इंटर्न भी रखे।
शर्मा ने आगे कहा कि CA के बढ़ते क्लाइंट बेस ने टैक्स फाइलिंग के अलावा दूसरी सर्विसेज़ के लिए भी रास्ते खोल दिए। क्लाइंट्स बिज़नेस रजिस्ट्रेशन, अकाउंटिंग सपोर्ट और दूसरे कंप्लायंस से जुड़े कामों के लिए उनसे संपर्क करने लगे, जिससे उन्हें पूरे साल प्रोफेशनल काम मिलते रहे।
यूट्यूबर के अनुसार, CA की प्रैक्टिस अब उनकी फुल-टाइम नौकरी से ज़्यादा मुनाफ़े वाली हो गई है। इस कामयाबी पर बात करते हुए शर्मा ने लिखा कि एक ज़रूरी स्किल, मज़बूत रिश्ते और भरोसे का मेल शानदार फाइनेंशियल मौके बना सकता है।
इस पोस्ट ने X पर तेज़ी से लोगों का ध्यान खींचा और यूज़र्स ने अपना-अपना काम (इंडिपेंडेंट प्रैक्टिस) चलाने की असलियत पर अलग-अलग राय दी। एक यूज़र ने बताया कि भले ही कमाई आकर्षक लगती है, लेकिन खुद का काम करने में अक्सर काफ़ी दबाव होता है। उन्होंने कहा कि क्लाइंट्स प्रोफेशनल से सीधे बात करना चाहते हैं, जिससे काम से पूरी तरह अलग हो पाना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि कई लोग इंटर्न के बजाय CA से ही बात करने पर ज़ोर देते हैं। कमेंट करने वाले ने सुझाव दिया कि अगर किसी को अपना काम करने का सच में बहुत ज़्यादा शौक न हो, तो फ्लेक्सिबल फुल-टाइम नौकरी बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस दे सकती है।
एक और यूज़र ने CA की कामयाबी की तारीफ़ करते हुए कहा कि यह सफलता शॉर्टकट से नहीं, बल्कि बरसों की सीख और कड़ी मेहनत से मिली है। उन्होंने आगे कहा कि काबिलियत और हुनर का फ़ायदा आखिरकार मिलता ही है, भले ही उसका नतीजा दिखने में कभी-कभी समय लग जाए।