डिजिटल पेमेंट और UPI ने लोगों की जिंदगी को पहले से कहीं ज्यादा आसान बना दिया है। बिजली का बिल भरना हो, ऑनलाइन शॉपिंग करनी हो या किसी को तुरंत पैसे भेजने हों, अब ज्यादातर काम कुछ ही सेकंड में पूरे हो जाते हैं। यही वजह है कि हर उम्र के लोग तेजी से डिजिटल पेमेंट अपनाने लगे हैं। हालांकि, जितनी तेजी से तकनीक हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनी है, उतनी ही तेजी से उससे जुड़े नए जोखिम भी सामने आए हैं। कई बार लोग किसी ऐप या ऑनलाइन सेवा का इस्तेमाल करते समय बिना पूरी जानकारी पढ़े अनुमति दे देते हैं। बाद में यही छोटी-सी लापरवाही लंबे समय तक परेशानी का कारण बन सकती है।
हाल ही में मुंबई के एक शख्स ने सोशल मीडिया पर अपनी मां से जुड़ा एक अनुभव साझा किया, जिसने यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि डिजिटल दुनिया में सिर्फ तकनीक का इस्तेमाल करना ही नहीं, बल्कि उसके नियम और शर्तों को समझना भी उतना ही जरूरी है।
फ्री ट्रायल के जाल में फंस रहे हैं लोग
लोकेश ने बताया कि उनकी मां ने कुछ ऐप्स के फ्री ट्रायल लिए थे। ट्रायल शुरू करते समय 0 रुपये भुगतान के साथ AutoPay की अनुमति भी दे दी गई। ट्रायल खत्म होते ही हर महीने अपने-आप पैसे कटने लगे, लेकिन उन्हें इसका एहसास तक नहीं हुआ।
लोकेश के मुताबिक 79 या 99 रुपये जैसी छोटी रकम अक्सर सैकड़ों UPI ट्रांजैक्शन के बीच नजर ही नहीं आती। यही वजह है कि लोग महीनों तक बिना जाने सब्सक्रिप्शन का भुगतान करते रहते हैं।
'असल प्रोडक्ट फ्री ट्रायल नहीं, AutoPay है'
LinkedIn पर अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा कि कई कंपनियों का असली मकसद फ्री ट्रायल देना नहीं, बल्कि AutoPay की मंजूरी हासिल करना होता है। एक बार अनुमति मिल जाए तो हर महीने भुगतान अपने-आप कटता रहता है।
डिजिटल साक्षरता का बदला मतलब
लोकेश ने कहा कि पहले ऑनलाइन गलत चीज खरीदने का डर होता था, लेकिन अब सबसे बड़ा खतरा बिना समझे किसी शर्त से सहमति देना है। AutoPay, ऐप परमिशन, लोकेशन एक्सेस और रिकरिंग सब्सक्रिप्शन जैसे फैसले कुछ सेकंड में होते हैं, लेकिन उनका असर लंबे समय तक रहता है।
सोशल मीडिया पर लोगों ने साझा किए अपने अनुभव
इस पोस्ट पर कई लोगों ने माना कि पेमेंट पेज पर अक्सर One-Time Payment का विकल्प नहीं मिलता और AutoPay अपने-आप चुन लिया जाता है। कुछ यूजर्स ने बताया कि जब तक अगली किस्त नहीं कटती, तब तक उन्हें सब्सक्रिप्शन का पता ही नहीं चलता। इसके बाद वो सोचते हैं कि अब एक महीना और इस्तेमाल कर लेते हैं और फिर इसे रद्द करना भूल जाते हैं।
डिजिटल दुनिया में सिर्फ UPI चलाना सीखना काफी नहीं है। किसी भी फ्री ट्रायल, AutoPay Mandate या ऐप परमिशन को स्वीकार करने से पहले उसकी शर्तों को ध्यान से पढ़ना और समय-समय पर एक्टिव सब्सक्रिप्शन की जांच करना भी उतना ही जरूरी है।