कई बार छोटी-सी गलती किसी इंसान की पूरी जिंदगी बदल सकती है। कनाडा के एक व्यक्ति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ, जहां एक मामूली डिजिटल अंतर ने उसे गंभीर कानूनी मुसीबत में डाल दिया। पुलिस ने एक ऑनलाइन यूजरनेम की गलत पहचान के आधार पर उसे आरोपी मान लिया और उसे लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा। मामला तब सामने आया जब अपील की प्रक्रिया के दौरान जांच में पता चला कि जिस अकाउंट को पुलिस आरोपी से जोड़ रही थी, वह वास्तव में किसी और का था।
एक अतिरिक्त अंडरस्कोर की वजह से हुई यह गलती इतनी बड़ी बन गई कि एक निर्दोष व्यक्ति को सजा भुगतनी पड़ी। बाद में अदालत ने पूरे मामले की समीक्षा करते हुए उसे बेगुनाह माना। यह घटना डिजिटल जांच में छोटी-सी चूक के गंभीर परिणामों को दिखाती है।
एक छोटे से अंतर ने बना दिया आरोपी
कनाडा के हैलिफैक्स निवासी ब्रैंडन क्लेम को साल 2020 में गिरफ्तार किया गया था। मामला 2018 में अमेरिका के विस्कॉन्सिन से शुरू हुई एक जांच से जुड़ा था। पुलिस ने ऑनलाइन गतिविधियों के आधार पर जिस व्यक्ति की पहचान की थी, उसका यूजरनेम “fus__ro_dah” था। वहीं, क्लेम का यूजरनेम “fus_ro_dah” था। दोनों में अंतर सिर्फ इतना था कि असली आरोपी के नाम में एक अतिरिक्त अंडरस्कोर (_) था। लेकिन यही छोटी-सी गलती क्लेम के लिए बड़ी परेशानी बन गई।
गलत पहचान के आधार पर हुई सजा
पुलिस ने इसी यूजरनेम को आधार बनाकर क्लेम को आरोपी मान लिया। साल 2023 में डार्टमाउथ प्रांतीय अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया और 18 महीने की जेल की सजा सुनाई। उन पर नाबालिग को बहलाने, आपत्तिजनक सामग्री साझा करने और चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़े आरोप लगाए गए थे।
अपील के दौरान सामने आई बड़ी गलती
क्लेम की कानूनी टीम जब अपील की तैयारी कर रही थी, तब उन्हें इस गलती का पता चला। वकीलों ने पाया कि पुलिस की ओर से भेजे गए सबपोना में गलत यूजरनेम दर्ज था। वकील जेब ब्राउन ने बताया कि अपील की दलील तैयार करते समय यह सवाल उठा कि डिजिटल सबूत क्लेम से कैसे जुड़े, जबकि वह लगातार अपनी बेगुनाही की बात कह रहे थे।
कोर्ट ने माना- व्यक्ति था पूरी तरह निर्दोष
अपील कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पुलिस ने गलत यूजरनेम के आधार पर क्लेम को आरोपी बनाया था। कोर्ट ने साफ कहा कि उन्हें कभी आरोपी बनाया ही नहीं जाना चाहिए था। फैसले में यह भी कहा गया कि क्लेम के खिलाफ ऐसा कोई सबूत नहीं था जो उन्हें उस लड़की से जोड़ता हो।
18 महीने जेल में बिताने पड़े बेगुनाह शख्स को
क्लेम ने बताया कि पुलिस के एक छोटे से टाइपिंग अंतर ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी। उन्होंने कहा कि सबपोना में असली यूजरनेम “fus__ro_dah” की जगह “fus_ro_dah” लिखा गया था, जिससे जांच गलत दिशा में चली गई। यह गलती ट्रायल के दौरान भी सामने नहीं आ सकी।
कोर्ट ने क्लेम को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया और उनके खिलाफ लगाए गए अतिरिक्त कानूनी आदेश भी रद्द कर दिए। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि वह जेल में बिताए गए 18 महीनों के लिए मुआवजे की मांग करेंगे या नहीं।