वेदांता ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन अनिल अग्रवाल देश के जाने-माने बिजनेसमैन हैं। पटना से शुरू हुआ उनका सफर एक बड़ी ग्लोबल नेचुरल रिसोर्स कंपनी के प्रमुख बनने तक पहुंचा। उनका जीवन एक कारोबारी के रूप में मेहनत और मजबूत इरादे की मिसाल माना जाता है। खास बात यह है कि अनिल अग्रवाल ने कॉलेज की पढ़ाई पूरी नहीं की थी।
‘द इकोनॉमिक टाइम्स’ के मुताबिक, अनिल अग्रवाल ने बिहार की राजधानी पटना के मिलर हाई स्कूल से मैट्रिक की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने किसी विश्वविद्यालय में पढ़ाई नहीं की और उनके पास कॉलेज की डिग्री भी नहीं है। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने नौकरी या आगे की पढ़ाई करने के बजाय अपने पिता द्वारका प्रसाद अग्रवाल के कारोबार में शामिल होने का फैसला किया। उनके पिता एल्युमीनियम के कंडक्टर बनाने का काम करते थे। यहीं से अनिल अग्रवाल के कारोबारी सफर की शुरुआत हुई। आगे चलकर उन्होंने अपने कारोबार को बड़ा किया और वेदांता समूह को एक बड़ी कंपनी के रूप में स्थापित किया।
19 साल की उम्र में मुंबई पहुंचे अनिल अग्रवाल
बिजनेस के नए मौके तलाशने के लिए अनिल अग्रवाल ने 19 साल की उम्र में पटना छोड़कर मुंबई जाने का फैसला किया। वेदांता की ओर से उनके सफर के बारे में दी गई जानकारी के मुताबिक, जब वह मुंबई पहुंचे, तब उनके पास साधन सीमित थे। हालांकि, एक सफल कारोबारी बनने का उनका इरादा मजबूत था। मुंबई पहुंचने के बाद शुरुआती दौर में उन्होंने कई तरह के कारोबार में हाथ आजमाया। कई कोशिशों के बाद आखिरकार उन्हें धातु और खनन के क्षेत्र में सफलता मिली।
साल 1976 में अनिल अग्रवाल ने उस कारोबार की नींव रखनी शुरू की, जो आगे चलकर वेदांता समूह बना। समय के साथ उनका कारोबार लगातार बढ़ता गया और एल्युमीनियम, जिंक, कॉपर, लौह अयस्क, तेल और गैस समेत कई नेचुरल रिसोर्स के क्षेत्रों तक फैल गया। इस तरह पटना से शुरू हुआ अनिल अग्रवाल का सफर धीरे-धीरे एक बड़े कारोबारी समूह के निर्माण तक पहुंच गया।
2003 में बदली कारोबार की तस्वीर
अनिल अग्रवाल के कारोबारी सफर में साल 2003 एक बड़ा पड़ाव साबित हुआ। इसी साल वेदांता रिसोर्सेज लंदन स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हुई। यह लंदन स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होने वाली पहली भारतीय कंपनी बनी। इस लिस्टिंग के बाद अनिल अग्रवाल के कारोबार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने में मदद मिली। कॉलेज की डिग्री न होने के बावजूद अनिल अग्रवाल ने अपने व्यावहारिक अनुभव, जोखिम लेने की हिम्मत और कारोबार की समझ के दम पर एक बड़ा कारोबारी समूह खड़ा किया। पटना में स्कूल की पढ़ाई पूरी करने से लेकर वेदांता समूह का नेतृत्व करने तक का उनका सफर बताता है कि किसी कारोबारी की सफलता में सिर्फ डिग्री ही नहीं, बल्कि अनुभव, मेहनत और मजबूत इरादा भी अहम भूमिका निभा सकते हैं। उनकी कहानी यह भी दिखाती है कि सीमित साधनों के बावजूद सही मौके पहचानकर और लगातार कोशिश करते हुए एक बड़ा कारोबार खड़ा किया जा सकता है।