खान सर के साथ भिड़ने वाले कोचिंग टीचर रौशन आनंद की असली कहानी तो अब आई सामने, कैसे शुरू की ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी?

Raushan Anand : रौशन आनंद का जन्म बिहार के सहरसा जिले के धमसेना गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। बताया जाता है कि सिर्फ 15 साल की उम्र में रौशन ने एक ऐसा फैसला लिया, जिसने उनके जीवन का रास्ता ही बदल दिया। उन्होंने अपना गांव और परिवार पीछे छोड़ा और पटना आ गए

अपडेटेड Jun 06, 2026 पर 12:15 PM
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Raushan Anand: 'ज्ञान बिंदु कोचिंग' के डायरेक्टर बनने से पहले, रौशन आनंद की जिंदगी गरीबी और दिक्कतों से भरी थी।

बिहार की राजधानी पटना के 'कोचिंग वर्ल्ड' में वर्चस्व की लड़ाई ने माहौल गर्मा दिया है। अपने पढ़ाई के अनोखे अंदाज को लेकर चर्चा में रहने वाले खान सर एक बार फिर चर्चा में हैं लेकिन इस बार वजह कुछ और है। खान सर और टीचर रौशन आनंद की कोचिंग संस्थानों की आपसी होड़ खुलकर सड़कों पर आ गई है। सोशल मीडिया पर काफी मशहूर खान सर की कोचिंग के बाहर फायरिंग हुई। इस मामले में पड़ोसी कोचिंग सेंटर 'ज्ञान बिंदु' के रोशन आनंद को गिरफ्तार किया गया। वही इसके बाद रौशन आनंद एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं।

रौशन आनंद की कहानी

रौशन आनंद का जन्म बिहार के सहरसा जिले के धमसेना गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। बताया जाता है कि सिर्फ 15 साल की उम्र में रौशन ने एक ऐसा फैसला लिया, जिसने उनके जीवन का रास्ता ही बदल दिया। उन्होंने अपना गांव और परिवार पीछे छोड़ा और पटना आ गए। उनके मन में एक बड़ा लक्ष्य था—इंजीनियर बनना। आगे की तैयारी के लिए उन्होंने राजस्थान के मशहूर कोचिंग शहर कोटा का रुख किया। उन्होंने दिन-रात कड़ी मेहनत की और इंजीनियरिंग की बड़ी परीक्षा (AIEEE) पास कर ली। उन्हें देश के एक बेहद नामी कॉलेज—बी.आई.टी. मेसरा (BIT Mesra) में दाखिला मिल गया। सहरसा जैसे छोटे इलाके के लड़के के लिए यह बहुत बड़ी कामयाबी और खुशी का पल था।


छोड़नी पड़ी थी इंजीनियरिंग की पढ़ाई

इंजीनियरिंग कॉलेज की महंगी फीस, हॉस्टल का खर्च और पढ़ाई के बाकी खर्चे उठाना उनके परिवार के बस की बात नहीं थी। रौशन आनंद को मजबूरी में अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। इंजीनियरिंग की पढ़ाई छूटने के बाद उन्होंने बिहार पुलिस, बी.पी.एस.सी. (BPSC - बिहार लोक सेवा आयोग) और यहां तक कि यू.पी.एस.सी. (UPSC) की तैयारी भी शुरू कर दी। उनका यह नया सफर भी आसान नहीं था और इसमें कई उतार-चढ़ाव आए। उन्होंने बिहार पुलिस की रिटेन एग्जाम तो पास कर ली, लेकिन फिजिकल टेस्ट में वे बाहर हो गए। इसके बाद, उन्होंने और मेहनत की और बी.पी.एस.सी. के इंटरव्यू राउंड तक पहुंच गए। वे एक पक्की और अच्छी नौकरी के बेहद करीब थे, लेकिन जब फाइनल सिलेक्शन लिस्ट आया, तो उसमें उनका नाम नहीं था।

फिर इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ने के बाद रौशन आनंद ने सरकारी नौकरी की तैयारी शुरू की। इसके बाद उन्होंने बिहार पुलिस भर्ती परीक्षा की तैयारी की और वर्ष 2014 में लिखित परीक्षा भी पास कर ली. लेकिन फिजिकल टेस्ट में सफल नहीं हो सके। उन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा की तैयारी की. वे इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन सूची में जगह नहीं बना पाए। लगातार असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और शिक्षा के क्षेत्र में अपना करियर बनाने का फैसला किया।

रौशन आनंद ने 1 सितंबर 2017 को पटना में 'ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी' की स्थापना की। शुरुआत में उनके पास केवल चार से छह छात्र थे। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बीच उन्होंने अपनी कोचिंग को आगे बढ़ाया। धीरे-धीरे बिहार पुलिस और सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षाओं की तैयारी कराने में उनकी पहचान बनने लगी। उनके संस्थान से बड़ी संख्या में छात्रों के चयन होने लगे. इसी वजह से छात्रों के बीच उन्हें 'दारोगा गुरु' के नाम से पहचान मिली।

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