नाक बंद होना आम बात लगती है, लेकिन अर्जेंटीना की कंदेला रेयबाउड की कहानी इसे पूरी तरह बदल देती है। बचपन से ही उनकी दाहिनी नथुने से हवा मुश्किल से निकलती थी। छोटी-छोटी बातों में भी उन्हें सांस लेने में परेशानी होती, दौड़-भाग या खेल-कूद में तो जैसे महाभारत। सोते समय भी उन्हें मुंह से ही सांस लेनी पड़ती थी। कंदेला सोचती रही कि यह बस उसकी आदत है, पर असली चौंकाने वाली बात तो तब हुई जब उन्होंने डॉक्टर से चेकअप कराया। डॉक्टरों ने उनकी नाक से जो निकाला, वह सुनते ही आप हैरान रह जाएंगे।
एक चिपकने वाला टेप, जो 35 सालों से उनकी नाक में फंसा हुआ था। सोचिए, इतने सालों तक एक छोटा सा टुकड़ा उनकी नाक में रहकर सांस लेने की राह रोकता रहा और कंदेला इसे सामान्य समझती रही।
कैसे नाक में चला गया ये टेप?
कंदेला को इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि ये टेप उनकी नाक में कैसे चला गया। उनका शक है कि ये नवजात अवस्था में अस्पताल में लगाए गए नेजल ट्यूब के साथ गलती से उनकी नाक में रह गया होगा।
बचपन से चल रही थी परेशानी
कंदेला ने बताया कि उनके दाहिनी नाक से हवा मुश्किल से ही निकलती थी। छोटी-छोटी गतिविधियों में भी उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती थी। उन्होंने कहा, “जब से मुझे याद है, मेरी दाहिनी नाक से हवा ठीक से नहीं निकलती थी। दौड़ने-भागने में परेशानी होती थी क्योंकि मुझे मुंह से ही सांस लेनी पड़ती थी। सोते समय भी यही समस्या रहती थी। मैं इसे सामान्य मानकर जीती रही।”
मुंह से सांस लेने के दीर्घकालिक असर
कंदेला को उस समय पता नहीं था कि मुंह से लगातार सांस लेने की आदत के दीर्घकालिक दुष्प्रभाव हो सकते हैं। ये न सिर्फ उनके रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित करता रहा, बल्कि स्वास्थ्य पर भी असर डालता रहा।