नौकरी की तलाश में बार-बार मिलने वाला रिजेक्शन कई लोगों का आत्मविश्वास तोड़ देता है, लेकिन एक 27 साल की सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने असफलताओं को अपनी राह की रुकावट नहीं बनने दिया। लगातार कोशिशों और धैर्य के दम पर उन्होंने दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियों में जगह बनाने का सपना पूरा किया। उनकी कहानी इसलिए खास है क्योंकि सफलता से पहले उन्हें कई बार निराशा का सामना करना पड़ा। Google जैसी कंपनी से 12 बार रिजेक्ट होने के बाद भी उन्होंने आवेदन करना नहीं छोड़ा और 13वीं कोशिश में सफलता हासिल की। Amazon में काम कर रहे इस इंजीनियर का अनुभव अब उन युवाओं के बीच चर्चा का विषय बन गया है, जो बड़ी टेक कंपनियों में करियर बनाने का सपना देखते हैं। उनकी कहानी यह भी बताती है कि सही रणनीति, लगातार सीखने और प्रयास जारी रखने से मुश्किल लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।
Google ने 12 बार ठुकराया, 13वीं कोशिश में मिली कामयाबी
Amazon में काम करने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर सौम्यदीप पॉल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी जॉब जर्नी साझा की। उन्होंने बताया कि Google में नौकरी पाने के लिए उन्हें 12 बार रिजेक्शन झेलना पड़ा, लेकिन 13वें आवेदन में उनकी मेहनत रंग लाई। उन्होंने लिखा कि Google में उनकी एंट्री 13वें प्रयास में हुई और यही कोशिश उनके करियर का बड़ा मोड़ साबित हुई।
Microsoft के लिए 16 बार मिली निराशा, फिर आया ऑफर
सौम्यदीप ने बताया कि सिर्फ Google ही नहीं, बल्कि दूसरी बड़ी टेक कंपनियों में भी उन्हें कई बार असफलता का सामना करना पड़ा। Amazon से ऑफर मिलने से पहले उन्हें तीन बार रिजेक्ट किया गया था, जबकि Microsoft से सफलता हासिल करने के लिए उन्हें 16 असफल प्रयासों के बाद मौका मिला।
वहीं, Apple और Oracle जैसी कंपनियों से उन्हें कभी इंटरव्यू कॉल तक नहीं मिला।
'टॉप कंपनियों में अप्लाई करना नंबर गेम जैसा है'
अपने अनुभव के आधार पर सौम्यदीप का कहना है कि बड़ी टेक कंपनियों में आवेदन करना काफी हद तक लगातार कोशिश करने का खेल है। उन्होंने उम्मीदवारों को सलाह दी कि रिजेक्शन से निराश होने के बजाय बार-बार आवेदन करते रहें और अपनी स्किल्स को लगातार बेहतर बनाते रहें। उनका मानना है कि सही समय पर सही अवसर पाने के लिए धैर्य और तैयारी दोनों जरूरी हैं।
सिर्फ आवेदन नहीं, स्मार्ट तरीके से करें अप्लाई
इंजीनियर ने ये भी कहा कि बिना सोचे-समझे हर जगह आवेदन भेजना सही तरीका नहीं है। उम्मीदवारों को नौकरी की जरूरतों के अनुसार अपना रिज्यूमे तैयार करना चाहिए और पद की जिम्मेदारियों से मेल बैठाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर कंपनी में कोई जान-पहचान वाला है, तो रेफरल लेना और रिक्रूटर तक सीधे पहुंचना नौकरी पाने की संभावना बढ़ा सकता है।
LinkedIn और रेफरल का भी बताया महत्व
सौम्यदीप ने उम्मीदवारों को हायरिंग मैनेजर्स से LinkedIn पर संपर्क करने की सलाह भी दी। हालांकि उन्होंने बताया कि उन्होंने खुद इस तरीके का इस्तेमाल नहीं किया, लेकिन कई लोगों को इससे फायदा मिला है।
उनकी पोस्ट वायरल होने के बाद इंटरनेट पर सफलता और रिजेक्शन को लेकर बहस शुरू हो गई। कई यूजर्स ने उनकी मेहनत और धैर्य की तारीफ की, वहीं कुछ लोगों का कहना था कि बड़ी टेक कंपनियों में सिर्फ लगातार आवेदन करना ही काफी नहीं होता एक यूजर ने कहा कि टॉप कंपनियां अक्सर उम्मीदवारों के बैकग्राउंड, कॉलेज और पहले के ब्रांडेड अनुभव को भी महत्व देती हैं। फ्रेशर्स के लिए बड़े प्रोजेक्ट या उपलब्धियां अहम हो सकती हैं, जबकि अनुभवी उम्मीदवारों के लिए बड़ी कंपनियों का अनुभव फायदा पहुंचाता है।
रिजेक्शन के पीछे छिपा हो सकता है अगला मौका
सौम्यदीप की कहानी बताती है कि कई बार असफलताएं सफलता से पहले की सीढ़ियां होती हैं। सही रणनीति, लगातार सीखने और कोशिश जारी रखने से मुश्किल दिखने वाले मौके भी हासिल किए जा सकते हैं।