आज के मॉर्डन जमाने में लोग शिक्षा के महत्व को समझते हैं और अपनों को बेहतरीन शिक्षा देने की चाहत रखते है। साथ ही महंगी होती शिक्षा ने एजुकेशन लोन लेने वालों की संख्या में इजाफा किया है। छात्रों को लोन की राशि पढ़ाई पूरी होने के बाद चुकानी होती है। एक बड़ा एजुकेशन लोन चुकाना आमतौर पर लंबे समय की आर्थिक जिम्मेदारी माना जाता है, जिसे लोग कई सालों तक धीरे-धीरे चुकाते हैं। लेकिन एक मैनेजमेंट ग्रेजुएट का अनुभव इन दिनों लोगों का ध्यान खींच रहा है, क्योंकि उन्होंने दिखाया कि सही प्लानिंग और लगातार मेहनत से इस समय को काफी कम किया जा सकता है।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट कलकत्ता की ग्रेजुएट अवनी राठौर ने बताया कि उन्होंने अपना 30 लाख रुपये का एमबीए लोन सिर्फ दो साल में चुका दिया। इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो में उन्होंने अपनी पूरी रणनीति समझाई। उन्होंने बताया कि यह कोई एक बड़ा कदम या चमत्कार नहीं था, बल्कि छोटे-छोटे लेकिन लगातार उठाए गए कदमों का नतीजा था, जिसकी वजह से वह इतनी जल्दी अपना लोन खत्म कर पाईं।
दो साल ऐसे चुकाया 30 लाख का लोन
उन्होंने बताया, “मैंने भारतीय प्रबंधन संस्थान कलकत्ता का अपना एमबीए लोन सिर्फ 2 साल में चुका दिया। इसके लिए मैंने कमाई के 4 अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल किया। पहला तरीका था एमबीए से पहले की बचत। पढ़ाई शुरू करने से पहले मैंने दो साल तक नौकरी की थी। उस दौरान जो पैसे बचाए थे, उनमें से मैंने अपने निवेश जैसे म्यूचुअल फंड और पीपीएफ को नहीं छेड़ा। इन निवेशों को सुरक्षित रखा और फीस से जुड़े खर्चों के लिए सिर्फ अपनी तुरंत इस्तेमाल होने वाली बचत (लिक्विड सेविंग्स) का ही उपयोग किया।”
इस शुरुआती कदम से उन्हें कर्ज पर निर्भरता कम करने में काफी मदद मिली। उन्होंने अपने म्यूचुअल फंड और पीपीएफ जैसे लंबे समय के निवेश को सुरक्षित रखा, जिससे उनका आर्थिक आधार लगातार मजबूत होता रहा। साथ ही, उन्होंने रोजमर्रा के खर्चों को अलग से संभालते हुए संतुलन बनाए रखा। उनकी कमाई का दूसरा बड़ा जरिया उस समय बना, जब वह अपनी पढ़ाई पूरी कर रही थीं। उन्होंने बताया, “इंटर्नशिप से मिलने वाला स्टाइपेंड: एमबीए के दौरान मैंने एक समर इंटर्नशिप की, जिसमें मुझे अच्छी सैलरी मिली।” आम तौर पर इंटर्नशिप को छोटे समय का मौका माना जाता है, लेकिन उनके लिए यह कमाई सीधे उनके बड़े आर्थिक लक्ष्य, यानी लोन चुकाने में काम आई।
इसके बाद उन्होंने अपने आखिरी साल में एक और समझदारी भरा कदम उठाया। उन्होंने बताया, “पार्ट-टाइम नौकरी: क्योंकि मुझे पहले ही प्री-प्लेसमेंट ऑफर (पीपीओ) मिल चुका था, इसलिए मैंने दूसरे साल में ही पार्ट-टाइम काम शुरू कर दिया। इससे मुझे फीस भरने के लिए अतिरिक्त कमाई होने लगी।” चूंकि उनका पीपीओ पहले से तय था, इसलिए वे दूसरों के मुकाबले जल्दी कमाई शुरू कर पाईं। इसका फायदा यह हुआ कि उनकी आय बढ़ी और पढ़ाई पूरी होने के बाद उन पर आर्थिक दबाव भी काफी कम हो गया।
जैसे ही उन्होंने अपना एमबीए पूरा किया, उनका लक्ष्य बिल्कुल साफ था—लोन को जितनी जल्दी हो सके खत्म करना। उन्होंने बताया, “एमबीए के बाद की सैलरी: खुशकिस्मती से मुझ पर कोई पारिवारिक जिम्मेदारी नहीं थी, इसलिए मैं अपनी सैलरी का बड़ा हिस्सा सीधे लोन चुकाने में लगा पाई।” हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि उनका तरीका हर किसी के लिए सही नहीं हो सकता। आमतौर पर वित्तीय सलाह यह कहती है कि अगर लोन कम ब्याज दर पर है, तो लोग उसे धीरे-धीरे चुकाते रहें और बाकी पैसे को निवेश करके ज्यादा मुनाफा कमाएं। लेकिन उनके लिए स्थिति अलग थी।
उन्होंने कहा, “मैं लोन के बोझ के साथ नहीं रहना चाहती थी, क्योंकि मैं अपनी नौकरी छोड़कर कुछ नया शुरू करने की सोच रही थी। इसलिए मैं खुद को ऐसी स्थिति में लाना चाहती थी, जहां मैं बिना डर के आगे बढ़ सकूं और जिंदगी में नए जोखिम ले सकूं।” उन्होंने समझाया, “अगर आप लोन चुकाने की कोशिश कर रहे हैं, तो एक बात हमेशा याद रखें—यह कोई तेज़ दौड़ नहीं, बल्कि लंबी दूरी की यात्रा है। आपकी हर छोटी और बड़ी कोशिश मायने रखती है। उनकी इस पोस्ट पर लोगों ने खूब प्रतिक्रिया दी और कई यूज़र्स ने उनके तरीके की तारीफ भी की। एक यूज़र ने लिखा, “बिल्कुल सही बात है, इसे शेयर करने के लिए धन्यवाद।” वहीं, एक दूसरे यूज़र ने कहा, “मेरे हिसाब से यह बहुत अच्छा फैसला है, क्योंकि जितनी जल्दी आप लोन खत्म कर देंगे, उतना ही बेहतर रहेगा।”