दिखने में परफेक्ट, अंदर से पूरा झोल! एआई के इस नए ट्रेंड ने ऑफिस में बढ़ाई कर्मचारियों की परेशानी

सोमवार की व्यस्त सुबह इनबॉक्स में आया एक चमकदार प्रोजेक्ट मेल आपको पहली नजर में प्रभावित करता है। लेकिन पढ़ते ही उसकी कमियां सामने आने लगती हैं। गलत जानकारी, अधूरे तथ्य और एआई जैसी भाषा आपको दोबारा काम करने पर मजबूर कर देती है। एआई से बचाया गया समय आखिर आपके हिस्से आ जाता है

अपडेटेड Aug 25, 2026 पर 10:01 AM
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एआई का मकसद काम को आसान और तेज बनाना है।

सोमवार की भागदौड़ के बीच आपके इनबॉक्स में सहकर्मी का एक नया प्रोजेक्ट मेल आता है। पहली नजर में सब कुछ बिल्कुल सही लगता है भाषा शानदार, जानकारी करीने से सजाई गई और पूरा दस्तावेज किसी पेशेवर रिपोर्ट जैसा दिखाई देता है। लेकिन जैसे-जैसे आप उसे पढ़ना शुरू करते हैं, तस्वीर बदलने लगती है। कुछ आंकड़े संदिग्ध नजर आते हैं, कई बातें संदर्भ से बाहर होती हैं और जरूरी हिस्सों में गहराई गायब रहती है। तब आपको समझ आता है कि यह काम शायद एआई की मदद से तैयार किया गया है, लेकिन इसे भेजने से पहले ठीक से जांचा नहीं गया।

नतीजा यह कि जिस व्यक्ति ने समय बचाने के लिए एआई का सहारा लिया, उसका बचाया हुआ समय अब आपके हिस्से आ गया। आपको तथ्य जांचने, गलतियां सुधारने और कई हिस्सों को दोबारा तैयार करने में अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। इसी नए ऑफिस सिरदर्द को ‘वर्कस्लॉप’ कहा जा रहा है।

एआई ने काम बचाया या आपके हिस्से डाल दिया?


‘वर्कस्लॉप’ शब्द को हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू के लेखकों ने ऐसे कम मेहनत वाले एआई-निर्मित काम के लिए इस्तेमाल किया है, जो देखने में काफी पेशेवर लगता है, लेकिन असल में उसे उपयोगी बनाने का मानसिक श्रम किसी दूसरे व्यक्ति पर डाल देता है। यानी सहकर्मी ने सोचा कि एआई की मदद लेकर उसका समय बच गया। लेकिन उसने जो अधपका काम आपको भेजा, उसे सही करने में आपका समय और ऊर्जा खर्च हो गई।

मामला सिर्फ खराब काम तक सीमित नहीं

इस समस्या की गंभीरता का अंदाजा एक सर्वे से लगाया जा सकता है। अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले 1,150 अमेरिकी कर्मचारियों में से 41 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें ऐसा एआई-निर्मित काम मिला, जिसने उनके काम को प्रभावित किया। वहीं आधे से ज्यादा कर्मचारियों ने माना कि उन्होंने खुद भी कभी न कभी ऐसा काम अपने सहकर्मियों को भेजा है। करीब 10 प्रतिशत लोगों ने यह भी स्वीकार किया कि सहकर्मियों को भेजे गए उनके एआई-निर्मित काम का कम से कम आधा हिस्सा वास्तव में अनुपयोगी, कम मेहनत वाला या खराब गुणवत्ता का था।

चमकदार दिखने वाला अधूरा काम सबसे बड़ी परेशानी

वर्कस्लॉप की असली समस्या यह नहीं है कि एआई से बना काम औसत है। परेशानी तब पैदा होती है, जब वह काम इतना बेहतर दिखाई देता है कि उसे बिना जांचे आगे भेज दिया जाता है, जबकि उसकी कमियां पकड़ने और सुधारने का काम सामने वाले को करना पड़ता है। यहीं से ऑफिस में झुंझलाहट शुरू होती है। किसी को लगता है कि उस पर बेवजह अतिरिक्त काम डाल दिया गया, जबकि भेजने वाला व्यक्ति समझ रहा होता है कि उसने काम तेजी से पूरा कर दिया।

भरोसे पर भी पड़ रहा असर

वर्कस्लॉप का नुकसान केवल समय बर्बाद होने तक नहीं रुकता। लगातार ऐसे अनुभव होने पर कर्मचारियों को अपने सहकर्मियों पर भरोसा कम होने लगता है। उन्हें लग सकता है कि सामने वाला व्यक्ति जिम्मेदारी से काम करने के बजाय एआई के भरोसे अधूरा काम आगे बढ़ा रहा है। इससे किसी कर्मचारी की क्षमता और भरोसेमंद होने की छवि भी प्रभावित हो सकती है।

एआई की एक गलती ने बिगाड़ दिया टीम का माहौल

हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू के शोध में ऐसे उदाहरण भी सामने आए हैं, जहां एआई के इस्तेमाल ने टीम के अंदर नाराजगी पैदा कर दी। एक मामले में एआई की मदद से तैयार किए गए सॉफ्टवेयर में बड़ी संख्या में गंभीर तकनीकी खामियां रह गईं। नतीजा यह हुआ कि टीम के एक इंजीनियर में इतना असंतोष पैदा हुआ कि उसने महज दो दिन का नोटिस देकर नौकरी छोड़ दी।

एक अन्य मामले में एक शोधकर्ता ने शिकायत की कि उनके प्रबंधक ने उनकी शोध सामग्री को चैटजीपीटी के जरिए तालिकाओं और चर्चा वाले हिस्से में बदल दिया। समस्या यह थी कि तैयार सामग्री में गलतियां थीं और भाषा इतनी उलझी हुई थी कि वह बेवजह के तकनीकी शब्दों से भरी लग रही थी। शोधकर्ता को सबसे ज्यादा आपत्ति इस बात से थी कि उनकी सामग्री एआई में उनकी अनुमति के बिना डाली गई।

‘वर्कस्लॉप’ आखिर क्यों बन सकता है बड़ी समस्या?

एआई का मकसद काम को आसान और तेज बनाना है। लेकिन जब इंसान एआई से मिला पहला ड्राफ्ट बिना जांचे किसी और को भेज देता है, तो काम खत्म नहीं होता बस उसकी जिम्मेदारी बदल जाती है। यही ‘वर्कस्लॉप’ का असली खतरा है। एक तरफ भेजने वाले को लगता है कि उसने समय बचा लिया, दूसरी तरफ पाने वाला व्यक्ति उसी काम को जांचने, तथ्य सही करने और दोबारा लिखने में अपना समय लगा देता है। धीरे-धीरे यह आदत सिर्फ उत्पादकता को नहीं, बल्कि ऑफिस के रिश्तों, भरोसे और टीम के माहौल को भी नुकसान पहुंचा सकती है।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

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