US-Iran Talks: अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में हुई 21 घंटे की बातचीत विफल होने के बाद मिडिल ईस्ट के अब हालात और भी गंभीर हो गए है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि अगर ईरान उनके 'अंतिम प्रस्ताव' को नहीं मानता है, तो अमेरिका ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी कर सकता है।
शांति वार्ता के बेनतीजा खत्म होने के तुरंत बाद ट्रंप ने अपने 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट शेयर किया, जिसमें लिखा था- 'अगर ईरान नहीं झुका, तो राष्ट्रपति करेंगे नौसैनिक नाकेबंदी।' इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य ईरान के तेल निर्यात को पूरी तरह से रोकना है। रिपोर्ट के अनुसार, अगर तेहरान वाशिंगटन के 'फाइनल ऑफर' को ठुकरा देता है, तो अमेरिका ईरान के जहाजों को समुद्र में ही रोकने के लिए अपनी नौसेना का इस्तेमाल करेगा।
क्या होती है 'नौसैनिक नाकेबंदी'?
रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका पहले भी निकोलस मादुरो के शासन के दौरान वेनेजुएला के खिलाफ ऐसी रणनीति अपना चुका है। लेक्सिंगटन इंस्टीट्यूट की राष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषक रेबेका ग्रांट के अनुसार, अमेरिकी नौसेना के पास होर्मुज जलसंधि में आने-जाने वाले हर जहाज की निगरानी और नियंत्रण करने की पूरी क्षमता है। फिलहाल इस क्षेत्र में अमेरिका के दो विशाल विमानवाहक पोत USS गेराल्ड फोर्ड और USS अब्राहम लिंकन पहले से ही तैनात हैं, जो किसी भी समय कार्रवाई के लिए तैयार हैं।
रिटायर्ड अमेरिकी जनरल जैक कीन ने सुझाव दिया है कि अगर तनाव और बढ़ता है, तो अमेरिका के पास दो बड़े सैन्य विकल्प हैं। पहला ईरान के प्रमुख तेल बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर उसे तबाह करना। या दूसरा समुद्री नाकेबंदी लगाकर उसके निर्यात को आर्थिक रूप से पंगु बना देना। ये दोनों की कदम ईरान की कमर तोड़ सकते है।
21 घंटे की बातचीत और 'फाइनल ऑफर'
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस्लामाबाद में ईरानी अधिकारियों के साथ 21 घंटे तक चर्चा की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। वेंस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'हम यहां से एक बहुत ही आसान प्रस्ताव छोड़कर जा रहे हैं, जो हमारा आखिरी और सबसे बेहतरीन प्रस्ताव है। अब देखना होगा कि ईरानी इसे स्वीकार करते हैं या नहीं।'
दरअसल अमेरिका की मुख्य मांग यह है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की अपनी कोशिशों को पूरी तरह और स्थायी रूप से छोड़ दे, लेकिन ईरान ने इस पर कोई ठोस प्रतिबद्धता नहीं दिखाई है।