Elon Musk: AI डाटा सेंटर चांद पर! एलन मस्क अब धरती को बचाने के लिए नया आइडिया लेकर आए, क्या है उनकी मंशा?
Elon Musk: दुनिया के सबसे अमीर कारोबारियों में शुमार टेक दिग्गज और स्पेसएक्स (SpaceX) के चीफ एलन मस्क अपने यूनीक और ब्रिलियंट आइडियाज को लेकर अक्सर सुर्खियां बंटोरते रहते हैं। अब मस्क एक नए आइडिया के साथ सामने आए हैं।
धरती नहीं, चांद पर बनेगा दुनिया का सबसे बड़ा AI डेटा सेंटर! एलन मस्क का बड़ा प्लान
Elon Musk: दुनिया के सबसे अमीर कारोबारियों में शुमार टेक दिग्गज और स्पेसएक्स (SpaceX) के चीफ एलन मस्क अपने यूनीक और ब्रिलियंट आइडियाज को लेकर अक्सर सुर्खियां बंटोरते रहते हैं। अब मस्क एक नए आइडिया के साथ सामने आए हैं। आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में जब इसकी एनर्जी जरूरतों को लेकर तीखी बहस छिड़ी है तो मस्क का ये नया आइडिया अनोखा माना जा रहा है। मस्क का मानना है कि भविष्य में एआई सिस्टम को जितने बड़े पैमाने पर कंप्यूटिंग पावर (कंप्यूटेशनल क्षमता) की जरूरत होगी, उसे धरती पर फिजिकली संभालना नामुमकिन हो सकता है। जेपीमॉर्गन चेस (JPMorgan Chase) के सीईओ जेमी डिमन के साथ बातचीत के दौरान मस्क ने इस समस्या का समाधान बताया और कहा कि एआई के लिए अगला बड़ा डेटा सेंटर किसी देश या राज्य में नहीं, बल्कि चांद पर बनाया जाना चाहिए।
धरती के मुकाबले चांद पर एआई को मिलेगा हजार गुना ज्यादा स्पेस
हमारी सहयोगी वेबसाइट मनी कंट्रोल इंग्लिश की रिपोर्ट के मुताबिक मस्क ने एआई के विस्तार के लिए धरती और चांद की क्षमताओं का अंतर समझाते हुए कहा कि मुझे लगता है कि हम धरती से हर साल करीब एक टेरावॉट के आसपास ही एआई स्पेस कंप्यूट (अंतरिक्ष कंप्यूटिंग क्षमता) तैयार कर सकते हैं। अगर हम यही काम चांद से करें तो हम हर साल 1000 टेरावॉट या उससे भी अधिक की क्षमता हासिल कर सकते हैं। मस्क के इस नजरिए के मुताबिक चांद अब सिर्फ अंतरिक्ष यात्रियों के जाने, झंडा फहराने या पर्यटन (टूरिज्म) तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का एक बड़ा औद्योगिक आधार बन सकता है।
Elon Musk just explained why artificial intelligence cannot physically survive on Earth. In a conversation with Jamie Dimon, Musk bypassed the romance of space exploration entirely. He answered with physics. Musk: “I think we can do probably somewhere around 1 terawatt per… pic.twitter.com/QSqtTvWbAK
रॉकेट की जरूरत नहीं, 'रेल गन' से गहरे अंतरिक्ष में दागे जाएंगे डेटा सेंटर
एलन मस्क के इस पूरे गणित के पीछे चांद की भौतिक परिस्थितियां जिम्मेदार हैं। मस्क ने इसके दो मेन रीजन बताए हैं-
वायुमंडल और गुरुत्वाकर्षण: चांद पर लगभग कोई वायुमंडल नहीं है और वहां का गुरुत्वाकर्षण धरती के मुकाबले करीब छह गुना (1/6) कम है।
बिना रॉकेट के लॉन्चिंग: इस कम गुरुत्वाकर्षण और वायुमंडल की गैर-मौजूदगी के कारण गहरे अंतरिक्ष (Deep Space) में डेटा सेंटर भेजने के लिए किसी रॉकेट की जरूरत नहीं होगी। इसके बजाय एक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एक्सीलेटर (विद्युत चुंबकीय त्वरक) यानी 'रेल गन' या 'मास ड्राइवर' का इस्तेमाल किया जा सकता है। ये पेलोड को सीधे अंतरिक्ष में दाग (शूट कर) देगा।
धरती पर ऐसा करने में घने वायुमंडल, मौसम, घर्षण, गर्मी और अत्यधिक ऊर्जा की जरूरत जैसी पाबंदियां सामने आती हैं, लेकिन चांद पर ये बाधाएं बहुत कम हैं।
चांद की मिट्टी से ही तैयार होगा पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर
मस्क ने अपने तर्कों में चांद को किसी अस्थायी रिसर्च सेंटर के रूप में नहीं बल्कि एक मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर पेश किया है। उन्होंने बताया है कि चांद की सतह पर मिलने वाली सामग्रियों (लूनर मैटेरियल्स) का इस्तेमाल करके ही वहां सोलर पैनल (सौर पैनल) और थर्मल रेडिएटर्स का निर्माण किया जा सकता है। इसके बाद इन प्रणालियों की मदद से उन एआई डेटा सेंटरों को चलाया जा सकता है जिन्हें गहरे अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। अंतरिक्ष में इन्हें प्रचुर मात्रा में सौर ऊर्जा मिलेगी और धरती पर डेटा सेंटरों को मिलने वाली जमीन की कमी, बिजली ग्रिड की किल्लत और मंजूरी (परमिशन) मिलने में होने वाली देरी जैसी समस्याओं से पूरी तरह छुटकारा मिल जाएगा।
क्या AI की वजह से धरती पर खड़ा हो रहा है ऊर्जा और बिजली का संकट?
दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियां इस समय चिप्स, सर्वर्स, कूलिंग सिस्टम और डेटा सेंटर बनाने के लिए अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं। अब मुकाबला इस बात का नहीं है कि किसका मॉडल सबसे अच्छा है बल्कि इस बात का है कि मॉडल को बड़ा करने के लिए बिजली, जमीन और चिप्स कौन जुटा पाता है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुमान के मुताबिक साल 2030 तक डेटा सेंटरों की बिजली खपत दोगुनी से अधिक बढ़कर करीब 945 टेरावॉट-घंटे तक पहुंच सकती है। इसमें एआई सबसे बड़ी वजह होगा। कई बाजारों में बिजली ग्रिड की कमी, पानी की चिंता और स्थानीय मंजूरियों की वजह से डेटा सेंटरों के काम में देरी हो रही है। मस्क का तर्क है कि जब एआई कंप्यूटिंग टेरावॉट के पैमाने पर पहुंचेगी तब खुद धरती ही इसके लिए सबसे बड़ी रुकावट (अवरोध) बन जाएगी।
मंगल से पहले चांद पर बसेगा शहर?
मस्क ने बातचीत में यह भी स्वीकार किया कि मंगल ग्रह पर शहर बसाने से पहले चांद पर एक आत्मनिर्भर और खुद से बढ़ने वाला शहर बनाना ज्यादा आसान और तेज हो सकता है। मस्क के लिए चांद दो उद्देश्यों को पूरा करता है। पहला यह कि यह धरती के करीब होने के कारण एक व्यावहारिक औद्योगिक आधार बन सकता है। दूसरा यह कि स्पेसएक्स मंगल पर जाने से पहले चांद के जरिए यह सीख सकती है कि पृथ्वी के बाहर आत्मनिर्भर प्रणालियां कैसे काम करती हैं।
हालांकि, मस्क के दीर्घकालिक विजन में अभी भी मंगल ग्रह सबसे बड़ा लक्ष्य बना हुआ है। उन्होंने मंगल को एक ऐसा ग्रह बताया जहां गुरुत्वाकर्षण धरती के करीब है और वहां एक थिन वायुमंडल भी मौजूद है। मस्क ने अपना पुराना विचार दोहराते हुए कहा कि भविष्य में मंगल ग्रह को इतना गर्म किया जा सकता है कि वहां महासागर और जीवन संभव हो सके। उन्होंने कहा कि मैं मंगल को एक फिक्सर-अपर ग्रह कहता हूं, लेकिन इसमें अपार संभावनाएं हैं।