दिल्ली के किसी इलाके जितना बड़ा, लेकिन ईरान के तेल का केंद्र! कहां है ये खार्ग द्वीप और क्यों वेनेजुएला की तरह इसे भी कब्जाना चाहते हैं ट्रंप?

Kharg Island: यह पहली बार नहीं है जब खार्ग द्वीप पर हमले हुए हों। 1980-88 के ईरान-इराक युद्ध में इराकी सेना ने इस द्वीप पर बार-बार बमबारी की थी। उस वक्त ईरान ने तेल लोडिंग को लावान और सिरी द्वीप की ओर मोड़कर काम जारी रखा था, हालांकि मात्रा काफी कम हो गई थी

अपडेटेड Jun 11, 2026 पर 9:22 PM

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को एक बेहद चौंकाने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा, "अमेरिका आज रात ईरान पर बहुत जोरदार हमला करेगा" और साथ में यह भी धमकी दी कि अमेरिका जल्द ही ईरान के खार्ग द्वीप (Kharg Island) और दूसरे तेल ठिकानों पर "कब्जा" कर लेगा। यह बयान आते ही दुनियाभर के तेल बाजारों में हलचल मच गई।

लेकिन सवाल यह है कि खार्ग द्वीप है क्या? वो ईरान के लिए इतना अहम इलाका क्यों है और अमेरिका उसे अपने कब्जे में लेकर किस तरह से दुनियाभर में तेल बेचेगा और वहां कब्जा करने से दुनिया में क्या बदलेगा?

पहले समझें- यह युद्ध शुरू कैसे हुआ?


28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया। आरोप था कि ईरान परमाणु हथियार बना रहा है। ईरान ने जवाबी हमले किए और मध्य-पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिक अड्डों को निशाना बनाया। तब से यह युद्ध लगातार जारी है। ट्रंप का गुरुवार का हमला इस युद्ध की तीसरी लगातार रात का हमला है।

इस युद्ध में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को भी बंद कर दिया- यह वो समुद्री रास्ता है, जिससे दुनिया का 20% तेल गुजरता है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने इसे "वैश्विक तेल बाजार के इतिहास की सबसे बड़ी सप्लाई रुकावट" करार दिया है।

खार्ग द्वीप क्या है? इसे ईरान का 'तेल का दिल' क्यों कहते हैं?

खार्ग द्वीप ईरान की दक्षिण-पश्चिमी तटरेखा से महज 32 किलोमीटर दूर फारस की खाड़ी में स्थित एक छोटा सा द्वीप है। आकार में यह करीब 8 किलोमीटर लंबा और 4-5 किलोमीटर चौड़ा है- यानी दिल्ली के एक बड़े इलाके जितना।

लेकिन इसकी छोटी सी काया में बड़ी ताकत छुपी है:

  • ईरान के 90 से 96 प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात इसी द्वीप के बंदरगाहों से होता है।
  • इसकी भंडारण क्षमता करीब 3.1 करोड़ बैरल तेल की है।
  • इसके गहरे पानी के बंदरगाह पर एक साथ 10 विशाल तेल टैंकर खड़े होकर लोडिंग कर सकते हैं।
  • फरवरी 2026 में यानी युद्ध शुरू होने से ठीक पहले, ईरान यहां से रोज 20 लाख बैरल से भी ज्यादा तेल लोड कर रहा था।

सीधे शब्दों में कहें तो- खार्ग द्वीप के बिना ईरान का तेल कारोबार ठप हो जाता है।

ईरान कितना तेल पैदा करता है?

ईरान दुनिया के तेल उत्पादक देशों के संगठन OPEC में तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है- सऊदी अरब और इराक के बाद। 2025-26 तक ईरान रोजाना करीब 32 से 33 लाख बैरल कच्चा तेल निकाल रहा था। इसके अलावा गैस क्षेत्रों से 13 लाख बैरल प्रतिदिन और भी मिलता था।

युद्ध शुरू होने के बाद यह उत्पादन घटकर मार्च 2026 में 30.6 लाख बैरल रह गया।

13 अप्रैल 2026 को जब अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) लगाई, तब से खार्ग द्वीप पूरी तरह बंद पड़ा है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के मुताबिक, यह नाकेबंदी ईरान को हर रोज 17 करोड़ डॉलर का नुकसान पहुंचा रही है।

ट्रंप का 'वेनेजुएला मॉडल' क्या है यह?

ट्रंप ने खार्ग द्वीप कब्जे की तुलना वेनेजुएला से की। उन्होंने कहा, "जैसे हमने वेनेजुएला के साथ किया, जो बेहतरीन काम कर रहा है, उसी तर्ज पर हम खार्ग पर भी कब्जा कर लेंगे।"

वेनेजुएला के मामले में हुआ यह था:

  • 3 जनवरी 2026 को अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाया।
  • 29 जनवरी को अमेरिका ने OFAC General Licence 46 जारी किया, जिसके तहत अमेरिकी कंपनियों को वेनेजुएला का तेल खरीदने, बेचने और बाजार में लाने की अनुमति मिली।
  • वेनेजुएला ने 3 से 5 करोड़ बैरल तेल अमेरिका को बाजार भाव पर देने का समझौता किया।

लेकिन ईरान और वेनेजुएला में फर्क बहुत बड़ा है। वेनेजुएला का तेल उत्पादन सालों की बदहाली के कारण घटकर महज 8 से 10 लाख बैरल रोजाना था। ईरान उससे तीन गुना ज्यादा तेल निकाल रहा है। वेनेजुएला के बुनियादी ढांचे को सुधारने में 10 साल और 10,000 करोड़ डॉलर लगने का अनुमान था — ईरान की चुनौती उससे भी बड़ी है।

अब तक खार्ग पर क्या-क्या हुआ?

यह पहली बार नहीं है जब खार्ग द्वीप पर हमले हुए हों। 1980-88 के ईरान-इराक युद्ध में इराकी सेना ने इस द्वीप पर बार-बार बमबारी की थी। उस वक्त ईरान ने तेल लोडिंग को लावान और सिरी द्वीप की ओर मोड़कर काम जारी रखा था, हालांकि मात्रा काफी कम हो गई थी।

इस बार 13 मार्च 2026 को अमेरिका और इजरायल ने खार्ग द्वीप पर 90 से ज्यादा सैन्य ठिकानों को नष्ट किया। ट्रंप ने कहा था, "तेल के बुनियादी ढांचे को हमने शालीनता के कारण नहीं छुआ।"

अब ट्रंप के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि यह "शालीनता" ज्यादा समय तक नहीं रहेगी।

दुनिया पर क्या असर हुआ है?

यह युद्ध और होर्मुज की नाकेबंदी पहले से ही दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला चुकी है:

  • ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत उछलकर 110-120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, शुरुआत में सिर्फ 10-13% की उछाल थी, जो बाद में बहुत ज्यादा बढ़ गई।
  • शिपिंग की लागत 300% तक बढ़ गई- 40 फीट के एक कंटेनर का किराया जनवरी 2026 के मुकाबले तीन गुना महंगा हो गया।
  • IEA ने इसे इतिहास की सबसे बड़ी तेल सप्लाई बाधा बताया।

"आज रात ईरान पर कहर बरपाएगा अमेरिका!" ट्रंप ने खार्ग द्वीप पर कब्जे का किया ऐलान

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।