अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को ईरान को लेकर बड़ा और सख्त बयान दिया। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका आज रात ईरान पर "बहुत जोरदार हमला" करेगा। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी दावा किया कि भविष्य में अमेरिका ईरान के सबसे अहम तेल केंद्र खार्ग द्वीप (Kharg Island) समेत कई तेल ठिकानों पर नियंत्रण हासिल करेगा।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि ईरान की नौसेना, वायुसेना, रडार और एयर डिफेंस सिस्टम काफी हद तक खत्म हो चुकी है और अमेरिका आगे भी कड़ी कार्रवाई करेगा।
उन्होंने आगे कहा, "आने वाले समय में हम खार्ग आइलैंड और तेल से जुड़े दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर ठिकानों पर कब्जा कर लेंगे और उनके तेल और गैस बाज़ार पर पूरी तरह से कंट्रोल कर लेंगे, ठीक वैसे ही जैसे हमने वेनेज़ुएला के मामले में किया है; यह वेनेज़ुएला और अमेरिका, दोनों के लिए बहुत फ़ायदेमंद साबित हो रहा है।"
क्यों इतना महत्वपूर्ण है खार्ग द्वीप?
खार्ग द्वीप ईरान के लिए किसी "तेल की राजधानी" से कम नहीं है। यह छोटा सा द्वीप ईरान के ज्यादातर कच्चे तेल के निर्यात का मुख्य केंद्र है। देश से बाहर जाने वाले तेल का बड़ा हिस्सा यहीं से दुनिया के बाजारों तक पहुंचता है।
यह द्वीप ईरान के तट से करीब 26 किलोमीटर दूर फारस की खाड़ी में स्थित है। यहां का समुद्री इलाका काफी गहरा है, जिससे बड़े-बड़े तेल टैंकर आसानी से लोडिंग कर सकते हैं। यही वजह है कि ईरान की तेल अर्थव्यवस्था के लिए इसका महत्व बेहद ज्यादा है।
खार्ग द्वीप पर हमला क्यों बड़ा झटका होगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर खार्ग द्वीप की तेल सुविधाओं को नुकसान पहुंचता है, तो ईरान की अर्थव्यवस्था को भारी झटका लग सकता है। तेल निर्यात ईरान की आय का सबसे बड़ा स्रोत है और इस द्वीप में किसी भी तरह की बाधा से देश की कमाई पर सीधा असर पड़ेगा।
पहले भी बन चुका है निशाना
मार्च में अमेरिकी सेना ने खार्ग द्वीप पर मौजूद कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। उस समय अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया था कि सैन्य ठिकानों पर हमला किया गया, जबकि तेल सुविधाओं को जानबूझकर नुकसान नहीं पहुंचाया गया।
अब ट्रंप के ताजा बयान ने संकेत दिया है कि अमेरिका भविष्य में इस रणनीतिक द्वीप को लेकर और आक्रामक कदम उठा सकता है।
बढ़ सकती है क्षेत्रीय तनाव
ट्रंप के इस बयान के बाद मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। ईरान पहले ही अमेरिकी हमलों के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दे चुका है। ऐसे में खार्ग द्वीप को लेकर बढ़ती बयानबाजी वैश्विक तेल बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा दोनों के लिए चिंता का विषय बन गई है।