दुनिया में नए 'कोल्ड वॉर' की आहट! AI कंपनी एंथ्रोपिक के प्रस्ताव पर मचा बवाल, भड़के चीन ने किया ये ऐलान

China Global Times AI Cold War: क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की रेस इंसानों को तबाही की तरफ ले जा रही है? एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने एआई की रफ्तार धीमी करने और चीन पर पाबंदियां बढ़ाने का प्रस्ताव दिया, तो भड़के चीन ने इसे अमेरिका की 'तकनीकी तानाशाही' करार दे दिया। उधर ट्रंप ने साफ कह दिया है कि रेस धीमी नहीं होगी। जानिए 24 सितंबर को होने वाली ट्रंप-जिनपिंग मुलाकात से पहले क्यों छिड़ी है यह AI जंग

अपडेटेड Sep 14, 2026 पर 12:26 PM
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समझिए एआई सेफ्टी के नाम पर अमेरिका और चीन के बीच यह नया 'कोल्ड वॉर' आखिर क्या है

US China AI Cold War Clash: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में महाशक्तियों के बीच खींचतान अब खुल कर सामने आ गई है। दिग्गज एआई कंपनी एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई के एक हालिया प्रस्ताव ने वॉशिंगटन से लेकर बीजिंग तक खलबली मचा दी है।

अमोदेई ने दुनिया को एआई के खतरों से बचाने के लिए इसकी विकास की रफ्तार धीमी करने और चीन पर सख्त पाबंदियां लगाने की वकालत की। लेकिन चीन ने इसे सुरक्षा की चिंता मानने से इनकार करते हुए अमेरिका की टेक्निकल हेजेमनी यानी 'तकनीकी तानाशाही' करार दिया है।

आइए समझते हैं कि एआई सुरक्षा के नाम पर अमेरिका और चीन के बीच यह नया 'कोल्ड वॉर' आखिर क्या है।


अमोदेई का 'सुरक्षा चक्र' या चीन की नकेल का प्लान?

एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने एक निबंध पब्लिश किया, जिसका ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन और एलन मस्क ने भी समर्थन किया। अमोदेई ने दो मुख्य प्रस्ताव रखे:

एआई विकास की रफ्तार धीमी हो: एआई के एडवांस मॉडलों से मानव जाति के अस्तित्व को होने वाले खतरों और सुरक्षा चिंताओं को सुलझाने के लिए दुनिया को थोड़ा समय चाहिए।

चीन पर कसें नकेल: अमेरिका को चीन पर उन्नत चिप्स के निर्यात पर प्रतिबंध और कड़े करने चाहिए। साथ ही, चीनी लैब्स द्वारा अमरीकी मॉडल की नकल को रोकना चाहिए।

अमोदेई ने खुलकर स्वीकार किया कि उनके इस प्रस्ताव में सबसे बड़ी चुनौती यही है कि अगर अमेरिका धीमा होता है, तो चीन और अन्य प्रतिद्वंद्वी देश इस रफ्तार को रोकेंगे या नहीं।

चीन का तीखा हमला: 'यह कोल्ड वॉर का पुराना पैंतरा है'

चीन के सरकारी अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' ने इस प्रस्ताव पर तीखा पलटवार करते हुए संपादकीय में लिखा, 'सुरक्षा का बहाना बनाकर चीन को निशाना बनाना वॉशिंगटन का पुराना 'कोल्ड वॉर प्लेबुक' है। इसका असली मकसद तकनीकी बाधाएं खड़ी करना, अमेरिकी एकाधिकार को बनाए रखना और ग्लोबल एआई गवर्नेंस से चीन को बाहर करना है।'

चीन का तर्क है कि एआई के वैश्विक विकास से चीन को अलग रखने से दुनिया में एआई नियंत्रण बिगड़ने के जोखिम और 'ट्रायल एंड एरर' की लागत और ज्यादा बढ़ जाएगी।

'रफ्तार धीमी नहीं होगी, हमें जीतना है'

एक तरफ जहां एंथ्रोपिक के रिसर्चर्स चेतावनी दे रहे हैं कि अनियंत्रित एआई आने वाले समय में इंसानों के वजूद को खतरे में डाल सकता है, वहीं पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एआई की रफ्तार धीमी करने की मांग को खारिज कर दिया है।

ट्रंप ने कहा कि एआई को लेकर बहुत ज्यादा नकारात्मक और बढ़ा-चढ़ाकर खौफ फैलाया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'हम एआई में चीन से आगे हैं। अमेरिका दुनिया का सबसे अत्याधुनिक देश है और मैं इसे ऐसे ही रखना चाहता हूं, क्योंकि जो एआई जीतेगा, वही दुनिया पर राज करेगा।'

24 सितंबर को ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात पर नजरें

इस जुबानी जंग के बीच दोनों देशों के बीच औपचारिक बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। सूत्रों के मुताबिक, सितंबर के मध्य में अमेरिका और चीन के प्रतिनिधि फ्रंटियर एआई सुरक्षा जोखिमों पर चर्चा करेंगे।

इसके बाद 24 सितंबर को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाले शिखर सम्मेलन में भी एआई सुरक्षा और सेमीकंडक्टर का यह मुद्दा छाया रह सकता है।

कुल मिलाकर एआई अब केवल एक तकनीकी टूल नहीं, बल्कि भू-राजनीति का नया हथियार बन चुका है। सुरक्षा चिंताओं के बीच अमेरिका अपनी बढ़त बनाए रखना चाहता है, वहीं चीन किसी भी कीमत पर पीछे नहीं रहना चाहता। ऐसे में एआई डेवलपमेंट में 'ब्रेक' लगाने का फैसला इतना आसान नहीं होगा, क्योंकि वैश्विक सहमति के बिना कोई भी देश रुकने को तैयार नहीं है।

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