ईरान की ही तकनीक से ईरान पर वार: अमेरिका ने बनाया 'शाहेद' की नकल कर LUCAS! क्यों कहा जाता है ड्रोन का 'टोयोटा कोरोला'?
LUCAS Drone: इस ड्रोन का नाम FLM 136 या “LUCAS” (Low-cost Uncrewed Combat Attack System) है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह युद्ध की शुरुआत से ही ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमला कर रहा है। वहीं, अमेरिका के महंगे और हाई-टेक हथियारों का इस मामले में कम इस्तेमाल हो रहा है
ईरान की ही तकनीक से ईरान पर वार: अमेरिका ने बनाया 'शाहेद' की नकल कर LUCAS! क्यों कहा जाता है ड्रोन का 'टोयोटा कोरोला'?
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष में अमेरिका एक सस्ता और असरदार हमला करने वाला ड्रोन इस्तेमाल कर रहा है। खास बात यह है कि यह ड्रोन किसी बड़ी टेक कंपनी या स्टार्टअप ने नहीं बनाया है। यह ड्रोन खुद अमेरिकी सेना ने तैयार किया है, और इसमें ईरान की ड्रोन तकनीक को समझकर उसका आसान वर्जन बनाया गया है।
इस ड्रोन का नाम FLM 136 या “LUCAS” (Low-cost Uncrewed Combat Attack System) है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह युद्ध की शुरुआत से ही ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमला कर रहा है। वहीं, अमेरिका के महंगे और हाई-टेक हथियारों का इस मामले में कम इस्तेमाल हो रहा है।
LUCAS ड्रोन क्या है?
डिफेंस रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी इंजीनियरों ने ईरान के ड्रोन की तकनीक को स्टडी करके उसी जैसा लेकिन आसान और काम का वर्जन तैयार किया। इसे “ड्रोन की टोयोटा कोरोला” भी कहा जा रहा है, यानी यह सस्ता, भरोसेमंद और काम का है।
पेंटागन के मुताबिक, हाल ही में हमले में इस्तेमाल किए गए ड्रोन LUCAS सिस्टम जैसे ही दिखते हैं। यह ड्रोन SpektreWorks नाम की कंपनी बनाती है, जो अमेरिका के फीनिक्स में स्थित है।
LUCAS को खास तौर पर सस्ता और वन टाइम यूज वाला ड्रोन बनाया गया है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि कई कंपनियां मिलकर इसे बड़ी संख्या में बना सकें।
एक LUCAS ड्रोन की कीमत करीब 35,000 डॉलर है, जो कि आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले महंगे हथियारों के मुकाबले काफी कम है।
आजकल सेना ऐसे सस्ते ड्रोन पर ज्यादा भरोसा कर रही है। इसे “Affordable Mass” रणनीति कहा जाता है, यानी कम कीमत में ज्यादा संख्या में हथियार इस्तेमाल करके दुश्मन पर दबाव बनाना।
यह रणनीति खास तौर पर रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद ज्यादा चर्चा में आई, क्योंकि उस युद्ध में ड्रोन बहुत प्रभावी साबित हुए।
ये ड्रोन कैसे काम करता है?
LUCAS ड्रोन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह एक ही समय में कई तरह के काम कर सके। इसका सिस्टम मॉड्यूलर और ओपन आर्किटेक्चर पर आधारित है, यानी जरूरत के हिसाब से इसके पार्ट्स और उपकरण आसानी से बदले जा सकते हैं।
ऑपरेटर मिशन के अनुसार, इसमें अलग-अलग पेलोड लगाकर इसे हमला करने, निगरानी करने और कम्युनिकेशन सपोर्ट देने जैसे कामों में इस्तेमाल कर सकते हैं। यह ड्रोन ट्रेनिंग के दौरान टारगेट ड्रोन की तरह भी काम करता है और असली युद्ध में कॉम्बैट ड्रोन के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसकी एक बड़ी खासियत यह है कि इसे चलाने के लिए बहुत ज्यादा एक्सपर्ट ट्रेनिंग की जरूरत नहीं होती, जिससे तेजी से बदलते युद्ध के हालात में इसे आसानी से तैनात किया जा सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह ड्रोन मध्यम ऊंचाई पर लंबी दूरी तक उड़ान भर सकता है, जिससे इसकी युद्ध में उपयोगिता और बढ़ जाती है।
अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, “Operation Epic Fury” के दौरान इसका इस्तेमाल ईरान की कमांड और कंट्रोल फैसिलिटी, एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट्स और मिलिट्री एयरफील्ड को निशाना बनाने के लिए किया गया।
LUCAS की कुछ खासियत
यह ड्रोन करीब 6 घंटे तक उड़ सकता है
500 मील यानी 800km से ज्यादा की दूरी तय कर सकता है
मिशन के दौरान खुद से (ऑटोमैटिक) उड़ान भर सकता है
कम खर्च में बार-बार लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता देता है
ईरान के सस्ते शाहेद ड्रोन से कितना अलग है LUCAS?
ईरान के शाहेद-136 (Shahed-136) और अमेरिका के नए LUCAS ड्रोन के बीच का अंतर "सादगी बनाम तकनीक" का है। दिलचस्प बात यह है कि LUCAS को असल में शाहेद ड्रोन की ही रिवर्स-इंजीनियरिंग यानी नकल करके बनाया गया है, लेकिन इसमें अमेरिकी दिमाग और आधुनिक सॉफ्टवेयर जोड़ा गया है।
LUCAS की कमजोरियां
जैमिंग का खतरा: यह पूरी तरह से सैटेलाइट और GPS लिंक पर निर्भर है, इसलिए शक्तिशाली इलेक्ट्रॉनिक जैमर्स इसे "अंधा" कर सकते हैं।
धीमी रफ्तार: प्रोपेलर इंजन होने के कारण इसकी गति बहुत कम है, जिससे यह एंटी-एयरक्राफ्ट गन और मिसाइलों के लिए एक आसान निशाना बन जाता है।
कम विस्फोटक क्षमता: लागत कम रखने के चक्कर में यह बहुत कम मात्रा में (18-40 किलो) बारूद ले जा सकता है, जो बड़े बंकरों को नष्ट करने के लिए नाकाफी है।
सीमित रेंज: ईरान के शाहेद (2500 Km) के मुकाबले इसकी मारक क्षमता सिर्फ 650-800 Km तक ही सीमित है।
कम मजबूती: इसे "एक बार इस्तेमाल" करने के लिए सस्ते मटेरियल से बनाया गया है, जिससे खराब मौसम या भारी बारिश में इसके फेल होने का डर रहता है।
शाहेद vs LUCAS
शाहेद: यह एक "अंधे" हथियार की तरह है। इसे लॉन्च करने से पहले जो जीपीएस कोऑर्डिनेट्स दिए जाते हैं, यह सीधा वहीं जाता है। अगर बीच में GPS जाम हो जाए, तो यह रास्ता भटक सकता है।
LUCAS: इसमें AI-बेस्ट है। यह न केवल जैमिंग को मात दे सकता है, बल्कि उड़ते समय 'लाइव फीड' दे सकता है और ऑपरेटर इसे बीच रास्ते में नया टारगेट दे सकता है।
शाहेद: यह अकेले काम करता है।
LUCAS: यह 'स्वार्म'तकनीक पर काम करता है। यानी 10-20 LUCAS ड्रोन आपस में बात कर सकते हैं और एक साथ मिलकर किसी बड़े डिफेंस सिस्टम (जैसे S-300) को उलझा सकते हैं। इसे स्पेस या हवा में मौजूद दूसरे विमानों से कंट्रोल किया जा सकता है।
शाहेद: यह केवल फटने के लिए बना है (Kamikaze)।
LUCAS: इसमें मॉड्यूलर डिजाइन है। आप इसका आगे का हिस्सा (Nose) बदल सकते हैं। मिशन के हिसाब से इसमें या तो विस्फोटक लगाया जा सकता है या फिर जासूसी के लिए हाई-टेक कैमरे (EO/IR Sensors)।
ईरान ने शाहेद को इसलिए बनाया ताकि वह महंगे मिसाइल डिफेंस सिस्टम (जैसे पैट्रियट) को आर्थिक रूप से थका सके।
अमेरिका ने LUCAS को इसलिए बनाया ताकि वह 20 लाख डॉलर की टॉमहॉक मिसाइल के बजाय 35,000 डॉलर में वही काम कर सके, लेकिन पूरी सटीकता के साथ।
आसान शब्दों में कहें, तो शाहेद एक सस्ता और जानलेवा "खंजर" है, जबकि LUCAS उसी खंजर का एक "डिजिटल और गाइडेड" वर्जन है। अमेरिका ने ईरान की ही तकनीक को पकड़कर उसमें अपनी सॉफ्टवेयर महारत जोड़ दी है, जिसे अब वे ईरान के खिलाफ ही इस्तेमाल कर रहे हैं।