US-Israel-Iran War: 'हमारी सेनाओं ने निर्णायक जीत दिलाई'; ईरान युद्ध पर डोनाल्ड ट्रंप अपने मुंह मियां मिट्ठू बने

US-Israel-Iran War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार (2 अप्रैल) को व्हाइट हाउस से राष्ट्र को संबोधित किया। इसमें उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचाया है। इस दौरान ट्रंप ने जल्द ही ईरान युद्ध समाप्त करने होने के संकते दिए। हालांकि, उन्होंने चेतावानी भी दी है

अपडेटेड Apr 02, 2026 पर 8:19 AM
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US-Israel-Iran War: डोनाल्ड ट्रंप ने जल्द ही ईरान युद्ध समाप्त होने का संकेत दिया है

US-Israel-Iran War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध में निर्णायक जीत का दावा किया है। गुरुवार (2 अप्रैल) को राष्ट्र को संबोधित करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेनाओं ने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में तेजी से और जबरदस्त सैन्य सफलता हासिल की है। ट्रंप के इस बयान से यह संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन कुछ ही हफ्तों में युद्ध को खत्म करने की तैयारी कर रहा है। संघर्ष शुरू होने के लगभग पांच हफ्ते बाद दिए गए अपने संबोधन में युद्ध के मैदान में मिली सफलताओं, ईरान के सैन्य ठिकानों के विनाश और वॉशिंगटन के इस लक्ष्य पर जोर दिया गया कि तेहरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके।

एक तरह से देखा जाए तो डोनाल्ड ट्रंप अपने मुंह मियां मिट्ठू बने हैं। ट्रंप ने अपने संबोधन की शुरुआत आर्टेमिस कार्यक्रम से जुड़े NASA के अंतरिक्ष यात्रियों को बधाई देकर की। इसके बाद उन्होंने युद्ध पर अपना ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने पिछले महीने को निर्णायक सैन्य सफलता का दौर बताया। उन्होंने इस अभियान को ऐसे अभियान के तौर पर पेश किया जिसने ईरान की पारंपरिक और रणनीतिक क्षमताओं को काफी कमजोर कर दिया है। साथ ही यह दोहराया कि अमेरिका अपने युद्धकालीन लक्ष्यों को पूरा करने के करीब है।

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, "मेरी पहली प्राथमिकता हमेशा कूटनीति का रास्ता ही रहा है। फिर भी उस शासन ने परमाणु हथियारों की अपनी लगातार खोज जारी रखी और किसी भी समझौते के हर प्रयास को ठुकरा दिया। इसी कारण से जून में मैंने 'ऑपरेशन मिडनाइट हैमर' के तहत ईरान की प्रमुख परमाणु सुविधाओं पर हमला करने का आदेश दिया... उन खूबसूरत B-2 बमवर्षकों ने शानदार प्रदर्शन किया।"


'परमाणु स्थलों को पूरी तरह से तबाह कर दिया'

उन्होंने आगे कहा, "हमने उन परमाणु स्थलों को पूरी तरह से तबाह कर दिया। इसके बाद उस शासन ने एक बिल्कुल अलग जगह पर अपना परमाणु कार्यक्रम फिर से बनाने की कोशिश की, जिससे यह साफ हो गया कि उनका परमाणु हथियारों की अपनी खोज को छोड़ने का कोई इरादा नहीं था। वे तेजी से पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों का एक विशाल भंडार भी बना रहे थे और जल्द ही उनके पास ऐसी मिसाइलें होतीं जो अमेरिकी धरती, यूरोप और पृथ्वी पर लगभग किसी भी अन्य जगह तक पहुंच सकती थीं।"

ट्रंप ने यह भी कहा, "ईरान की रणनीति बहुत साफ थी। वे जितनी हो सकें उतनी मिसाइलें बनाना चाहते थे। उन्होंने ऐसा ही किया, जितनी संभव हो उतनी लंबी दूरी वाली मिसाइलें बनाई। और उनके पास कुछ ऐसे हथियार थे जिनके बारे में किसी को यकीन ही नहीं था कि वे उनके पास हैं। हमें अभी-अभी इस बारे में पता चला। हमने उन्हें खत्म कर दिया। हमने उन सभी को खत्म कर दिया ताकि कोई भी उन्हें रोकने की हिम्मत न कर सके।"

अमेरिका के राष्ट्रपति ने कहा, "आज मैं ईरान में हमारे जांबाजों द्वारा की गई जबरदस्त प्रगति के बारे में जानकारी देना चाहता हूं। इस बात पर चर्चा करना चाहता हूं कि 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' अमेरिका की सुरक्षा और आजाद दुनिया की हिफाजत के लिए क्यों जरूरी है। जिस पहले दिन 2015 में मैंने राष्ट्रपति पद के लिए अपने चुनाव अभियान की घोषणा की थी, उसी दिन मैंने यह कसम खाई थी कि मैं ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दूंगा। यह शासन पिछले 47 सालों से 'अमेरिका का नाश हो, इज़रायल का नाश हो' के नारे लगाता आ रहा है।"

'रणनीतिक उद्देश्य पूरे होने के करीब'

उन्होंने आगे कहा, "बेरूत में मरीन बैरक पर हुए बम धमाके में 241 अमेरिकियों की हत्या और सड़क किनारे लगाए गए बमों से हमारे सैकड़ों सैनिकों के नरसंहार के पीछे उन्हीं के गुर्गे थे। वे USS Cole पर हुए हमले में भी शामिल थे। उन्होंने अनगिनत अन्य जघन्य अपराध किए, जिनमें 7 अक्टूबर को इज़रायल में हुई भयानक और खूनी क्रूरता भी शामिल है। एक ऐसी घटना जिसे ज्यादातर लोगों ने पहले कभी नहीं देखा था।"

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ट्रंप ने कहा कि ईरान युद्ध में वाशिंगटन के मुख्य रणनीतिक उद्देश्य पूरे होने के करीब हैं। ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा, "मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि ये मुख्य रणनीतिक उद्देश्य पूरे होने के करीब हैं।"उन्होंने इस बात पर जो दिया कि अमेरिकी सेना ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि मिसाइल और ड्रोन लॉन्च करने की उनकी क्षमता में भारी कमी आई है। उनके हथियार, कारखाने और रॉकेट लॉन्चर टुकड़े-टुकड़े किए जा रहे हैं।

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