US-Iran Agreement: दुनियाभर के ऊर्जा बाजारों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आ रही है। अल अरबिया की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हो गया है। इस समझौते के तहत अब होर्मुज में लगी नौसैनिक नाकेबंदी में ढील दी जाएगी और जहाजों की आवाजाही को फिर से खोला जाएगा। आपको बता दें कि 28 फरवरी को शुरू हुए इस संघर्ष के बाद ईरान ने दुनिया के इस सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग को बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह चरमरा गई थी।
फंसे हुए जहाजों की होगी निकासी
समझौते के मुताबिक, आने वाले कुछ घंटों के भीतर उन व्यापारिक जहाजों की रिहाई शुरू हो सकती है जो लंबे समय से इस जलडमरूमध्य में फंसे हुए थे। सूत्रों के अनुसार, अमेरिका नाकेबंदी में ढील देने पर सहमत हुआ है, जिसके बदले ईरान ने होर्मुज को चरणबद्ध तरीके से खोलने का वादा किया है। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक-तिहाई हिस्सा गुजरता है, इसलिए इस रास्ते के खुलने से कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट की उम्मीद है।
ट्रंप ने 'Project Freedom' पर लगाई थी रोक
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कूटनीतिक प्रगति पर खुशी जाहिर करते हुए उम्मीद जताई है कि यह युद्ध 'जल्द ही खत्म' होगा। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत 'बहुत अच्छी' रही है और दोनों देश एक 'पूर्ण और अंतिम समझौते' के बेहद करीब पहुंच गए हैं।
इस प्रगति को देखते हुए ट्रंप ने खाड़ी में फंसे हुए जहाजों को निकालने के लिए शुरू किया गया सैन्य अभियान 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' पर फिलहाल रोक लगा दी है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक अंतिम समझौता नहीं होता, नाकेबंदी पूरी तरह से नहीं हटाई जाएगी।
क्या है 14 सूत्रीय 'शांति प्रस्ताव'?
यह समझौता अमेरिका द्वारा प्रस्तावित एक पन्ने के 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन का हिस्सा है, जिस पर ईरान फिलहाल विचार कर रहा है। ईरान अपने परमाणु संवर्धन गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए तैयार हो सकता है। इसके बदले में अमेरिका ईरान पर लगे कुछ प्रतिबंधों को हटाएगा और विदेशों में फ्रीज किए गए अरबों डॉलर के ईरानी फंड को रिलीज करेगा। साथ ही दोनों पक्ष समुद्री ट्रांजिट के नियमों को आसान बनाने पर काम करेंगे।
धड़ाम हो सकती है कच्चे तेल की कीमतें
होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए 'संजीवनी' मिलने जैसा है। युद्ध की शुरुआत के बाद से कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार चली गई थीं। तनाव बढ़ने पर कई बार कीमतें $120 को भी पार कार गईं। अब इस समझौते की खबर मात्र से ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिली है जिससे भारत जैसे तेल आयातक देशों को बड़ी राहत मिलेगी।