US Military Used Grok AI Against Iran: टेक जगत के बेताज बादशाह एलॉन मस्क के AI टूल 'Grok' को लेकर एक ऐसा सनसनीखेज खुलासा हुआ है जिसने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। अमेरिकी सरकार के एक कानूनी दस्तावेज से यह साफ हो गया है कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई में मस्क के 'Grok' AI का इस्तेमाल किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस खतरनाक एआई टूल की मदद से अमेरिकी सेना ने महज 96 घंटे यानी 4 दिनों के भीतर ईरान के 2000 ठिकानों पर चुन-चुनकर बम बरसाए।
क्या है पूरा मामला और कैसे खुला यह बड़ा राज?
यह पूरा खुलासा एलन मस्क की कंपनी xAI के खिलाफ चल रहे एक पर्यावरण से जुड़े मुकदमे के दौरान हुआ। मस्क के विशाल डेटा सेंटर में इस्तेमाल होने वाले गैस टर्बाइनों के खिलाफ कोर्ट में केस दर्ज है।
इस मामले में अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने कोर्ट में मस्क का बचाव करते हुए एक दलील पेश की। सरकार ने कहा कि इस मुकदमे से अमेरिका की राष्ट्रीय, आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा को बड़ा खतरा है। सरकार ने दलील दी कि मस्क के डेटा सेंटर की बिजली सप्लाई रोकने से उस एआई इनोवेशन को झटका लगेगा, जो अमेरिकी रक्षा विभाग के सैन्य ऑपरेशन्स को सपोर्ट कर रहा है।
'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' में मस्क के एआई का जलवा
अदालत में सरकारी वकीलों ने पेंटागन के एआई चीफ कैमरन स्टेनली का एक शपथ पत्र पेश किया। इस बयान ने सबको चौंका दिया। पेंटागन चीफ ने कोर्ट को बताया कि मस्क का 'Grok' एआई पहले से ही अमेरिकी सेना के सबसे खुफिया और एडवांस एआई टारगेटिंग प्रोग्राम 'प्रोजेक्ट मेवन' (Project Maven) का हिस्सा बन चुका है।
इस प्रोजेक्ट के 'मेवन स्मार्ट सिस्टम' (MSS) की मदद से अमेरिकी सेना ने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के दौरान सिर्फ 96 घंटों के भीतर ईरान के 2000 अलग-अलग ठिकानों पर 2000 से ज्यादा घातक हथियार और बम दागे।
कैमरन स्टेनली ने मस्क की टेक्नोलॉजी की जमकर तारीफ की और कहा कि 'Grok Gov Model' की वजह से अमेरिकी सेना की ऑपरेशनल क्षमता और सटीकता में जबरदस्त इजाफा हुआ है।
मस्क के एआई पर क्यों चल रहा है कानूनी विवाद?
दरअसल, 'NAACP' नामक एक मानवाधिकार संगठन ने एलन मस्क की कंपनी xAI पर मुकदमा ठोक रखा है। संगठन का आरोप है कि मस्क की कंपनी बिना परमिट के दर्जनों टर्बाइन चलाकर 'क्लीन एयर एक्ट' का उल्लंघन कर रही है। उनका दावा है कि इन टर्बाइनों से निकलने वाला प्रदूषण अश्वेत बहुल इलाकों को नुकसान पहुंचा रहा है। दूसरी तरफ, xAI का कहना है कि ये टर्बाइन अस्थायी और मोबाइल हैं, इसलिए इन पर यह नियम लागू नहीं होता।
एंथ्रोपिक से क्यों टूटा पेंटागन का नाता?
शुरुआत में अमेरिकी सेना का यह खतरनाक प्रोजेक्ट मेवन, एंथ्रोपिक कंपनी के 'Claude' एआई मॉडल पर चल रहा था। लेकिन फरवरी के अंत में अमेरिकी सरकार ने एंथ्रोपिक के साथ अपने सारे कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर दिए। वजह यह थी कि एंथ्रोपिक ने अपने एआई टूल का इस्तेमाल पूरी तरह से ऑटोमैटिक हमलों और अमेरिकी नागरिकों की मास सर्विलांस के लिए करने से साफ मना कर दिया था।
इसके बाद पेंटागन ने एंथ्रोपिक की प्रतिद्वंदी कंपनियों जैसे गूगल, ओपनएआई (OpenAI) और एलॉन मस्क की xAI का रुख किया। हालांकि, गूगल के 600 से अधिक कर्मचारियों ने अपनी ही कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और मांग की कि सेना को खुफिया सैन्य अभियानों के लिए एआई न दिया जाए। मार्च में सरकार को यह भी मानना पड़ा कि Claude एआई का इस्तेमाल अभी भी ईरान के खिलाफ जंग में हो रहा है क्योंकि नए सिस्टम को पूरी तरह अपनाने में वक्त लग रहा है।