Iran US Talks: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी की आहट सुनाई दे रही है। सीएनएन और एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान आज यानी 7 मई को अमेरिका द्वारा प्रस्तावित 'शांति समझौते' पर अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया दे सकता है। माना ये भी जा रहा है कि दोनों देश एक ऐतिहासिक समझौते के बेहद करीब पहुंच गए हैं।
क्या है अमेरिका का '14-पॉइंट' वाला फॉर्मूला?
Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बातचीत की मेज पर एक पन्ने का '14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन' रखा गया है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य तुरंत सीजफायर लागू करना और लंबी अवधि के स्थायी समाधान के लिए रास्ता साफ करना है।
इस समझौते के लागू होते ही 30 दिनों का एक 'नेगोशिएशन पीरियड' शुरू होगा, जिसमें बड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगानी होगी। इसके बदले में अमेरिका ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने और फ्रीज की गई ईरानी संपत्ति को अनलॉक करने की प्रक्रिया शुरू करेगा। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव कम करने और व्यापारिक जहाजों के लिए रास्ता आसान बनाने पर भी सहमति बनी है।
ट्रंप प्रशासन की नई कूटनीति
रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य गतिविधियों को कम करने का जो फैसला लिया था, वह इसी कूटनीतिक प्रगति का हिस्सा था। इस पूरी डील के पीछे अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर की बड़ी भूमिका बताई जा रही है। वे सीधे और मध्यस्थों के जरिए ईरानी अधिकारियों के संपर्क में हैं। अगर आज तेहरान की ओर से पॉजिटिव जवाब आता है, तो अगले फेज की बातचीत के लिए इस्लामाबाद या जिनेवा को चुना जा सकता है।
पिछले कई महीनों से ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है। वैश्विक तेल आपूर्ति के सबसे महत्वपूर्ण रास्ते 'होर्मुज जलडमरूमध्य' में सुरक्षा को लेकर पूरी दुनिया चिंतित थी। अगर यह डील सफल होती है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आ सकती है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने का सीधा असर इजराइल और अन्य खाड़ी देशों की सुरक्षा पर पड़ेगा। ईरान के लिए प्रतिबंधों का हटना उसकी चरमराती अर्थव्यवस्था के लिए 'संजीवनी' जैसा होगा।
क्या अभी भी कोई पेंच फंसा है?
हालांकि दोनों पक्ष समझौते के करीब हैं, लेकिन अभी तक वाशिंगटन या तेहरान की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। 14 सूत्रीय एजेंडे के कई प्रावधान 'शर्तों' पर आधारित हैं। इसका मतलब है कि अगर 30 दिनों की बातचीत के दौरान किसी एक पक्ष ने वादा तोड़ा, तो पूरी डील खटाई में पड़ सकती है।