US-Iran Tension: 'डुबो देंगे अमेरिकी वॉरशिप...', ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की डोनाल्ड ट्रंप को खुली चेतावनी

US-Iran Tension : सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए एक पोस्ट में खामेनेई ने कहा कि, अमेरिकी राष्ट्रपति बार-बार अपनी सेना को दुनिया की सबसे मजबूत ताकत बताते हैं। लेकिन कभी-कभी इतनी बड़ी ताकत को भी ऐसा झटका दिया जा सकता है, जिससे वह दोबारा खड़ी न हो सके

अपडेटेड Feb 17, 2026 पर 6:49 PM
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अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत से पहले तनाव तेजी से बढ़ता दिख रहा है।

US-Iran Tension : अमेरिका और ईरान के बीच जिनेवा में होने वाली अहम बातचीत से पहले मध्य पूर्व में तनाव तेजी से बढ़ता दिख रहा है। इसी बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने मंगलवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि “दुनिया की सबसे ताकतवर सेना” पर भी ऐसा जोरदार वार किया जा सकता है कि वह फिर संभल न सके। यह बयान उस समय आया है, जब अमेरिका और ईरान जिनेवा में परमाणु विवाद को लेकर इनडायरेक्ट बातचीत शुरू कर चुके हैं।

खामेनेई ने दी सख्त चेतावनी

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में खामेनेई ने कहा कि, अमेरिकी राष्ट्रपति बार-बार अपनी सेना को दुनिया की सबसे मजबूत ताकत बताते हैं। लेकिन कभी-कभी इतनी बड़ी ताकत को भी ऐसा झटका दिया जा सकता है, जिससे वह दोबारा खड़ी न हो सके। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका बार-बार यह कहता है कि उसने ईरान की ओर एक वॉरशिप भेजा है। खामेनेई ने माना कि वॉरशिप खतरनाक हथियार है, लेकिन उससे भी ज्यादा खतरनाक वह हथियार हो सकता है जो उस जहाज को समुद्र में डुबो दे।


ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने कहा, “अमेरिकी राष्ट्रपति खुद कह चुके हैं कि 47 साल में भी अमेरिका इस्लामिक रिपब्लिक को खत्म नहीं कर पाया। यह उनकी स्वीकारोक्ति है। मैं कहता हूं, आगे भी आप ऐसा नहीं कर पाएंगे।” उनका यह बयान अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के एक दिन बाद आया, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि वह मंगलवार को होने वाली अहम परमाणु वार्ता में परोक्ष रूप से शामिल रहेंगे।

दोनों देशों के बीच बढ़ा तनाव

ट्रंप ने यह भी कहा कि तेहरान ने पिछली टकरावों से सबक लिया है और अब शायद बातचीत के लिए ज्यादा तैयार हो। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि वे समझौता न करने के नतीजे झेलना चाहेंगे।”ट्रंप ने याद दिलाया कि अमेरिका पहले भी ईरान की परमाणु सुविधाओं पर कार्रवाई कर चुका है। उन्होंने कहा कि बेहतर होता अगर समझौते से मामला सुलझ जाता, बजाय इसके कि B-2 बॉम्बर विमान भेजने पड़ें। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बार ईरान सही फैसला करेगा।

बता दें कि, अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपना दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात कर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, अगर कूटनीतिक बातचीत नाकाम रहती है तो सेना लंबे समय तक चलने वाले अभियान की तैयारी कर रही है। जून में हुए हमलों से पहले बातचीत इस मुद्दे पर अटक गई थी कि अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी जमीन पर यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) पूरी तरह बंद करे। वाशिंगटन का मानना है कि यूरेनियम एनरिचमेंट परमाणु हथियार बनाने की दिशा में एक संभावित कदम हो सकता है। हालांकि, ईरान ने साफ कहा है कि वह “जीरो एनरिचमेंट” की शर्त नहीं मानेगा। उसका कहना है कि वह प्रतिबंधों में राहत के बदले अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने पर बात कर सकता है, लेकिन पूरी तरह संवर्धन रोकने के लिए तैयार नहीं है।

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